Economy:-रिकॉर्ड निचले स्तर से थोड़ा संभला रुपया, तेल की बढ़ती कीमतों और ईरान तनाव ने बढ़ाई चिंता

Economy:-भारतीय रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया। हालांकि शुरुआती गिरावट के बाद रुपये में थोड़ी रिकवरी देखने को मिली, लेकिन बाजार में अब भी चिंता का माहौल बना हुआ है। लगातार सात कारोबारी सत्रों से रुपये में कमजोरी जारी है और इस दौरान इसमें करीब 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, रुपये पर सबसे ज्यादा दबाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता का है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, जिससे भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
Economy:-दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया के बाजारों को प्रभावित किया है। निवेशकों को डर है कि अगर हालात और बिगड़े तो तेल सप्लाई पर असर पड़ सकता है, जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और रुपये पर पड़ेगा।
बाजार जानकारों का कहना है कि विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पैसा निकालना भी रुपये की कमजोरी की बड़ी वजह है। इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ने से डॉलर और मजबूत हुआ है, जिससे एशियाई मुद्राओं पर दबाव बढ़ गया है।
इसी बीच देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी फिर बढ़ोतरी हुई है। सरकारी तेल कंपनियों ने एक हफ्ते के भीतर दूसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं, जिससे आम लोगों की जेब पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट नहीं आती या भारत में विदेशी निवेश का प्रवाह नहीं बढ़ता, तब तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है। फिलहाल बाजार की नजर मध्य-पूर्व के हालात और अमेरिकी नीतियों पर टिकी हुई है।