Furniture Scam:-स्कूलों में फर्नीचर आया नहीं, भुगतान हो गया! 15 साल पुराने मामले में 10 आरोपियों पर 20 हजार पन्नों का चालान

Furniture Scam:-छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्कूलों के लिए फर्नीचर खरीदने के नाम पर कथित अनियमितताओं का मामला एक बार फिर चर्चा में है। वर्ष 2010-11 में हुए इस मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय, अम्बिकापुर में करीब 20 हजार पन्नों का चालान पेश किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, मामले में शासन को कुल 67.48 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक क्षति हुई है। आरोप है कि कई जगह फर्नीचर की वास्तविक आपूर्ति किए बिना या निर्धारित मात्रा से कम सामान देने के बावजूद भुगतान कर दिया गया।
Furniture Scam:-2.70 करोड़ रुपये का था फर्नीचर खरीदी का बजट
यह मामला करीब 15 साल पुराना है। वर्ष 2010-11 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत अविभाजित सरगुजा जिले के पूर्व माध्यमिक स्कूलों में फर्नीचर खरीदने के लिए लगभग 2.70 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था।
राजीव गांधी शिक्षा मिशन, अम्बिकापुर के जिला कार्यालय की ओर से तत्कालीन कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक की मंजूरी के बाद निर्धारित दरों पर 10 फर्मों को फर्नीचर आपूर्ति के क्रय आदेश जारी किए गए थे।
दस्तावेजों के अनुसार, 28 मार्च 2011 को फर्मों के भुगतान के लिए कुल 2,68,18,838 रुपये के चेक जारी किए गए। क्रय आदेश में 20 दिनों के भीतर फर्नीचर की आपूर्ति करने की शर्त रखी गई थी।
लेकिन जांच में भुगतान और वास्तविक आपूर्ति के बीच अंतर सामने आया। आरोप है कि फर्नीचर का भौतिक सत्यापन और जरूरी दस्तावेजों की जांच पूरी होने से पहले ही कुछ फर्मों को भुगतान कर दिया गया।
Furniture Scam:-बिना सत्यापन भुगतान, न गुणवत्ता जांच और न पूरे दस्तावेज
मामले की जांच समाचार पत्रों में प्रकाशित शिकायतों के बाद शुरू हुई। स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देश पर कलेक्टर ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। समिति ने जून 2013 में स्कूलों और फर्नीचर खरीदी से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की तथा जुलाई 2013 में अपनी रिपोर्ट सौंपी।
जांच रिपोर्ट में कई प्रक्रियागत अनियमितताओं का उल्लेख किया गया। आरोप है कि फर्मों ने बिलों के साथ स्कूलवार आपूर्ति सूची और प्रधान पाठकों के हस्ताक्षर वाली प्राप्ति रसीदें जमा नहीं की थीं।
इसके अलावा, फर्नीचर की गुणवत्ता की जांच, क्रय समिति से भौतिक सत्यापन और फर्मों के साथ जरूरी अनुबंध जैसी प्रक्रियाओं का भी पूरी तरह पालन नहीं किया गया। सुरक्षा निधि जमा कराने से जुड़ी शर्तों के पालन पर भी सवाल उठे।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इन अनियमितताओं के कारण सरकारी धन के दुरुपयोग की स्थिति बनी।
Furniture Scam:-दर्शन फेब्रिकेशन के नाम पर 22.91 लाख रुपये का भुगतान
इस मामले में दर्शन फेब्रिकेशन नाम की फर्म से जुड़ा लेन-देन जांच के केंद्र में रहा। आरोप है कि तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पाण्डेय ने दर्शन फेब्रिकेशन के नाम जारी क्रय आदेश आकृति प्रिंटिंग प्रेस के संचालक संजय पटेल को सौंप दिया।
जांच के अनुसार, इसके बाद दर्शन फेब्रिकेशन के नाम से ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की अम्बिकापुर शाखा में बैंक खाता खुलवाया गया। 28 मार्च 2011 को इस खाते में 22,91,909 रुपये जमा किए गए, जिन्हें बाद में निकाल लिया गया।
पूछताछ के दौरान संजय पटेल ने कथित तौर पर सात लाख रुपये कमीशन के रूप में तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक को देने की बात कही। जांच एजेंसी का आरोप है कि संबंधित फर्म ने किसी भी स्कूल में फर्नीचर की वास्तविक आपूर्ति नहीं की।
हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में सुनवाई के बाद ही होगा।
Furniture Scam:-दूसरी फर्म पर भी बिना आपूर्ति भुगतान लेने का आरोप
जांच में महारानी स्टील एंड अप्लायंस, रायपुर का मामला भी सामने आया। फर्म के संचालक प्रेमचंद जैन को 28 मार्च 2011 को 11,44,349 रुपये का भुगतान किया गया था।
जांच एजेंसी के मुताबिक, भुगतान की गई राशि निकालने के बावजूद फर्म ने किसी स्कूल में फर्नीचर की आपूर्ति नहीं की। प्रेमचंद जैन की 7 अगस्त 2025 को मृत्यु हो चुकी है।
इसके अलावा, अन्य आठ फर्मों के मामले में भी निर्धारित मात्रा से कम फर्नीचर की आपूर्ति किए जाने की बात सामने आई। जांच में भुगतान की गई राशि और वास्तव में उपलब्ध कराए गए सामान के बीच अंतर को आर्थिक क्षति की गणना का आधार बनाया गया।
Furniture Scam:-जांच में 67.48 लाख रुपये की आर्थिक क्षति
EOW/ACB की जांच के मुताबिक, फर्नीचर की आपूर्ति नहीं होने से संबंधित राशि, वैट और निरीक्षण शुल्क को मिलाकर शासन को कुल 67,48,008.28 रुपये की आर्थिक क्षति हुई।
जांच में बताई गई राशि का विवरण इस प्रकार है:
- आपूर्ति नहीं किए गए फर्नीचर की राशि: 56,84,848 रुपये
- वैट की राशि: 9,47,938 रुपये
- निरीक्षण शुल्क: 1,15,222.28 रुपये
- कुल आर्थिक क्षति: 67,48,008.28 रुपये
एजेंसी ने इन अनियमितताओं के संबंध में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर 10 आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय में चालान पेश किया है।
Furniture Scam:-तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक समेत 10 आरोपी
चालान में तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पाण्डेय और दर्शन फेब्रिकेशन के संचालक संजय पटेल समेत विभिन्न फर्नीचर फर्मों से जुड़े आठ अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।
आरोपियों की सूची इस प्रकार है:
- सत्यप्रकाश पाण्डेय — तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक
- संजय पटेल — दर्शन फेब्रिकेशन
- अजय कुमार अग्रवाल — अम्बिका अलमीरा एंड स्टील फेब्रिकेटर्स
- ममता अग्रवाल — सेलेनो स्टील
- बिधी सिंह कटलारिया — महामाया फेब्रिकेटर्स
- राजकुमार बंसल — सूर्या स्टील एंड वुडन इंडस्ट्रीज
- संदीप तिवारी — श्री साई इंडस्ट्रीज
- हितेश कुमार अग्रवाल — श्याम मेटल प्रोडक्ट्स
- रितेश कुमार अग्रवाल — श्री श्याम इंडस्ट्रीज
- संजीव गुप्ता — पंकज फर्नीचर मार्ट
जांच एजेंसी का आरोप है कि तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक ने संबंधित आपूर्तिकर्ताओं के साथ मिलकर कथित आपराधिक षड्यंत्र के तहत नियमों की अनदेखी करते हुए भुगतान कराया। मामले में भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
Furniture Scam:-अगस्त में गिरफ्तार हुए थे दो आरोपी
EOW/ACB के मुताबिक, तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पाण्डेय और संजय पटेल को पूछताछ एवं बयान दर्ज कराने के लिए कई बार नोटिस दिए गए थे। जांच एजेंसी का कहना है कि दोनों के जांच में शामिल नहीं होने के बाद 19 अगस्त 2026 को उन्हें गिरफ्तार किया गया।
दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया था।
अब मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय, अम्बिकापुर में चालान पेश किया गया है। करीब 20 हजार पन्नों के इस चालान के बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
