PMAwas Yojana:-पीएम आवास के लिए रेत मंगाई, अब ₹25,600 का जुर्माना! देवभोग में माइनिंग विभाग की कार्रवाई के खिलाफ धरने पर बैठा हितग्राही

PMAwas Yojana:-गरीब परिवारों को पक्का मकान देने के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री आवास योजना के एक हितग्राही को मकान बनाने के लिए रेत जुटाना भारी पड़ गया। गरियाबंद जिले के देवभोग में रेत से भरे ट्रैक्टर की जब्ती के बाद हितग्राही सनत नागेश ने एसडीएम कार्यालय के सामने धरना दिया। मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब हितग्राही के अनुसार, विभाग ने ट्रैक्टर मालिक और संबंधित पक्ष को ₹25,600 का अर्थदंड जमा करने का नोटिस जारी कर दिया। हितग्राही ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए जब्त रेत और वाहन को छोड़ने की मांग की है।
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PMAwas Yojana:-क्या है पूरा मामला?
मामला देवभोग नगर पंचायत का है। जानकारी के अनुसार, 6 अक्टूबर को क्षेत्र में रेत परिवहन कर रहे एक ट्रैक्टर को खनिज विभाग ने जब्त कर लिया था। बताया जा रहा है कि यह रेत प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे मकान के निर्माण के लिए मंगाई गई थी।

हितग्राही सनत नागेश का कहना है कि क्षेत्र में रेत खदानें बंद होने के कारण निर्माण कार्य के लिए रेत जुटाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में उसने अपने रिश्तेदार के ट्रैक्टर से रेत मंगवाई थी। इसी दौरान खनिज विभाग की कार्रवाई में ट्रैक्टर और रेत जब्त कर ली गई।
इसके बाद हितग्राही ने प्रशासन से वाहन और रेत छोड़ने की मांग की। लेकिन मांग पूरी नहीं होने पर वह 12 अक्टूबर को एसडीएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गया। उसके समर्थन में अन्य आवास हितग्राही और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
PMAwas Yojana:-धरने के बाद ₹25,600 के जुर्माने का नोटिस
हितग्राही के मुताबिक, ट्रैक्टर और रेत छोड़ने की मांग को लेकर धरना देने के बावजूद उसे राहत नहीं मिली। उलटे, शाम तक ट्रैक्टर मालिक और संबंधित पक्ष के नाम ₹25,600 का अर्थदंड जमा करने का नोटिस जारी कर दिया गया।
सनत नागेश ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि 6 अक्टूबर को वाहन पकड़ा गया था, लेकिन इसके बाद कार्रवाई को लेकर उसे परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उसका कहना है कि वह प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अपना घर बनवा रहा है और इतनी बड़ी जुर्माने की राशि भरना उसके लिए मुश्किल है।

हालांकि, अर्थदंड किस कानूनी प्रावधान के तहत लगाया गया है और नोटिस में विभाग ने क्या आधार बताया है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए आधिकारिक नोटिस का परीक्षण जरूरी है।
PMAwas Yojana:-15 अक्टूबर तक रेत खदानों पर प्रतिबंध
इस मामले की एक अहम कड़ी रेत खदानों पर लगा प्रतिबंध है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदेश में मानसून अवधि के दौरान रेत खदानों से उत्खनन पर 15 अक्टूबर तक रोक लागू है। ऐसे में निर्माण कार्य के लिए रेत की उपलब्धता हितग्राहियों के सामने चुनौती बनी हुई है।
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्धारित समय में मकान पूरा करने का दबाव भी रहता है। रेत की सीमित उपलब्धता और बाजार में ऊंची कीमतों के बीच जरूरतमंद परिवारों के लिए निर्माण कार्य आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आवास निर्माण के लिए रेत उपलब्ध कराने की व्यवस्था और अवैध परिवहन पर रोक लगाने की कार्रवाई के बीच तालमेल कैसे बनाया जाए, ताकि जरूरतमंद हितग्राहियों को परेशानी न हो और खनिज नियमों का पालन भी सुनिश्चित किया जा सके।
PMAwas Yojana:-जनप्रतिनिधियों ने भी उठाए सवाल
मामले को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने खनिज विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। स्थानीय पार्षद का आरोप है कि कम खर्च में रेत जुटाने की कोशिश करने वाले आवास हितग्राहियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, जबकि अवैध रेत परिवहन के दूसरे मामलों पर भी समान रूप से सख्ती होनी चाहिए।
हालांकि, अधिकारियों और कथित रेत कारोबारियों के बीच मिलीभगत के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
PMAwas Yojana:-प्रशासन का क्या कहना है?
मामले में जिला खनिज अधिकारी अर्चना ठाकुर से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन उपलब्ध जानकारी में उनकी ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
वहीं, कलेक्टर रणवीर शर्मा ने मामले को खनिज विभाग से संबंधित बताते हुए कहा कि इस संबंध में खनिज अधिकारी ही जानकारी दे सकती हैं। 12 अक्टूबर को प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, देवभोग एसडीएम नेहा भेड़िया ने बताया कि उन्होंने जिला खनिज अधिकारी को उचित कार्रवाई करने और संबंधित पक्ष को अवगत कराने के निर्देश दिए थे।
PMAwas Yojana:-अब सबसे बड़ा सवाल—आखिर रेत मिलेगी कैसे?
देवभोग का यह मामला प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को उजागर करता है। एक तरफ सरकार की मंशा जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने की है, तो दूसरी तरफ निर्माण सामग्री की उपलब्धता और खनिज नियमों के पालन का सवाल है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या निर्णय लेता है, जब्त ट्रैक्टर और रेत को लेकर क्या राहत मिलती है और आवास निर्माण के लिए रेत उपलब्ध कराने की व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जाती है।

