Chhattisgarh High Court:-रिटायरमेंट पर 6.26 लाख की वसूली पड़ी भारी! हाईकोर्ट ने विभाग को दिया झटका, कर्मचारी की गलती नहीं तो नहीं लौटानी होगी ‘एक्स्ट्रा सैलरी’

Chhattisgarh High Court:-बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के लिए अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी कर्मचारी को विभाग की गलती से गलत वेतन निर्धारण के कारण अतिरिक्त भुगतान हुआ है और इसमें कर्मचारी की कोई धोखाधड़ी, गलत जानकारी या तथ्य छिपाने की भूमिका नहीं है, तो परिस्थितियों के अनुसार उस राशि की वसूली करना उचित नहीं माना जा सकता।
मामला एक रिटायर उप निरीक्षक से जुड़ा है, जिससे सेवानिवृत्ति के समय 6 लाख 26 हजार 104 रुपये की अतिरिक्त राशि की वसूली की गई थी। कर्मचारी ने इस वसूली को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
Chhattisgarh High Court:-रिटायरमेंट के समय काटे गए 6.26 लाख रुपये
याचिकाकर्ता के मुताबिक उसके वेतन का निर्धारण विभाग की ओर से किया गया था। बाद में विभाग ने वेतन निर्धारण में गलती बताते हुए अतिरिक्त भुगतान की गणना की और सेवानिवृत्ति के समय 6,26,104 रुपये वापस जमा कराने की मांग की।
कर्मचारी का तर्क था कि अतिरिक्त भुगतान उसे विभागीय स्तर पर हुई गलती के कारण मिला था। उसने न तो कोई गलत जानकारी दी थी और न ही किसी तथ्य को छिपाकर अधिक वेतन हासिल किया था।
Chhattisgarh High Court:-सहमति पत्र को लेकर भी उठा सवाल
राज्य सरकार की ओर से वसूली का बचाव करते हुए कहा गया कि कर्मचारी ने अतिरिक्त भुगतान वापस करने के लिए सहमति पत्र दिया था। सरकार के अनुसार, जब कर्मचारी ने स्वयं राशि वापस करने पर सहमति जताई थी, तो बाद में वसूली को चुनौती देना उचित नहीं है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने केवल सहमति पत्र को वसूली को वैध ठहराने का पर्याप्त आधार नहीं माना। अदालत ने मामले की परिस्थितियों को भी महत्वपूर्ण माना।
Chhattisgarh High Court:-कर्मचारी ने कहा- लाभ रोकने की बात कहकर ली गई सहमति
याचिकाकर्ता का कहना था कि सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले उसके बकाया लाभों के भुगतान पर असर पड़ने की बात कहकर उससे राशि वापस करने के लिए सहमति ली गई थी।
अदालत ने इस पहलू को भी ध्यान में रखा और माना कि किसी कर्मचारी द्वारा दिया गया सहमति पत्र हर परिस्थिति में पूरी तरह स्वैच्छिक माना जाए, यह जरूरी नहीं है।
Chhattisgarh High Court:-वर्ग-3 कर्मचारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांत का हवाला
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों में स्थापित सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि विभागीय गलती से हुए अतिरिक्त भुगतान की वसूली पर कर्मचारी की स्थिति और मामले की परिस्थितियां महत्वपूर्ण हैं।
विशेष रूप से निम्न श्रेणी के कर्मचारियों से विभागीय गलती के कारण हुए अतिरिक्त भुगतान की वसूली को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले भी सुरक्षा प्रदान कर चुका है, बशर्ते कर्मचारी की ओर से धोखाधड़ी, गलत बयानी या तथ्य छिपाने जैसी स्थिति न हो।
Chhattisgarh High Court:-हाईकोर्ट के फैसले का बड़ा संदेश
इस मामले में कर्मचारी के खिलाफ धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर अतिरिक्त वेतन हासिल करने का आरोप साबित नहीं हुआ। अतिरिक्त भुगतान का कारण विभागीय स्तर पर हुआ गलत वेतन निर्धारण था।
ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने रिटायर उप निरीक्षक को राहत दी और उसके खिलाफ की गई 6 लाख 26 हजार 104 रुपये की वसूली को चुनौती देने वाली याचिका पर कर्मचारी के पक्ष में फैसला दिया।
Chhattisgarh High Court:-आम कर्मचारियों के लिए क्या मायने?
इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि हर स्थिति में अतिरिक्त वेतन की वसूली पर रोक है। यदि कर्मचारी ने जानबूझकर गलत जानकारी दी हो, धोखाधड़ी की हो या महत्वपूर्ण तथ्य छिपाकर अतिरिक्त भुगतान हासिल किया हो, तो स्थिति अलग हो सकती है।
लेकिन यदि अतिरिक्त भुगतान पूरी तरह विभाग की वेतन निर्धारण संबंधी गलती से हुआ है और कर्मचारी की ओर से कोई गलत आचरण नहीं है, तो वसूली के मामले में कर्मचारी को कानूनी संरक्षण मिल सकता है।
