Spiritual India:-प्रयागराज का वो घर, जहां ठहरते थे नीब करौरी बाबा; ‘हनुमान अंश’ के बाद बढ़ी भक्तों की भीड़

Spiritual India:-शहर की एक सामान्य-सी गली में स्थित एक घर इन दिनों श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां न कोई बड़ा मंदिर है, न कोई भव्य मूर्ति और न ही पूजा-पाठ का शोर। इसके बावजूद हर शाम लोग इस घर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वजह है इस घर का संबंध प्रसिद्ध संत नीब करौरी बाबा से।
प्रयागराज के Church Lane स्थित 18/4 नंबर के इस मकान में नीब करौरी बाबा कभी ठहरा करते थे। बाबा के अनुयायियों के लिए यह जगह इसलिए खास है क्योंकि माना जाता है कि उन्होंने यहां समय बिताया, विश्राम किया और प्रार्थना की थी। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘Hanuman Ansh’ के बाद बाबा को लेकर बढ़ी दिलचस्पी का असर इस घर पर भी दिखाई दे रहा है।
Spiritual India:-मंदिर नहीं, फिर भी हर शाम पहुंचते हैं श्रद्धालु
यह मकान बाहर से देखने पर आसपास के दूसरे घरों जैसा ही सामान्य दिखाई देता है। यहां कोई मंदिर का बोर्ड या पूजा स्थल जैसा भव्य ढांचा नहीं है। इसके बावजूद श्रद्धालु शाम के समय यहां पहुंचकर बाबा से जुड़े कमरे के दर्शन करते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, घर को रोजाना शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। यहां किसी तरह का चढ़ावा स्वीकार नहीं किया जाता। दर्शन के बाद घर की देखभाल करने वाली सत्या पांडे श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में लड्डू देती हैं। वह अपने पति इंद्रेश प्रसाद के साथ इस घर की देखरेख करती हैं।
Spiritual India:-इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर से था बाबा का रिश्ता
यह घर कभी इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के शिक्षक रहे प्रोफेसर सुधीर मुखर्जी का था। रिपोर्ट के अनुसार, नीब करौरी बाबा साल में एक-दो बार उनसे मिलने यहां आया करते थे।
सुधीर मुखर्जी और बाबा का संबंध काफी पुराना बताया जाता है। मुखर्जी की बाबा से पहली मुलाकात 1935 में कोलकाता के दक्षिणेश्वर मंदिर में हुई थी। उस समय बाबा ने उन्हें जाप के लिए एक मंत्र दिया था।
बाद में जब सुधीर मुखर्जी पढ़ाई के लिए 1950 में इलाहाबाद आए और अपने मामा के घर कर्नलगंज में रहने लगे, तब उनकी बाबा से दोबारा मुलाकात हुई। आगे चलकर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के शिक्षक बनने के बाद उन्होंने 1956 में Church Lane का यह घर बनवाया।

Spiritual India:-आज भी सुरक्षित है बाबा का कमरा
इस घर की सबसे खास बात यह है कि यहां बाबा से जुड़ा उनका विश्राम और प्रार्थना कक्ष आज भी सुरक्षित रखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बाबा का तख्त और तकिया आज भी श्रद्धा के साथ रखा जाता है और वहां रोज फूल चढ़ाए जाते हैं।
हर मंगलवार बाबा की बेडशीट बदली जाती है। श्रद्धालुओं की मान्यता के अनुसार बाबा को पसंद आने वाला लौकी की सब्जी, मूंग दाल और बेसन की रोटी भी भोग के रूप में अर्पित की जाती है।
Spiritual India:-‘बाबा कहते थे- ये घर मेरा है’
इस घर की देखभाल करने वाली सत्या पांडे के मुताबिक, उनका मुखर्जी परिवार से जुड़ाव 1991 के आसपास हुआ। वह नैनीताल गई थीं, जहां उनका बेटा घोड़ाखाल स्थित सैनिक स्कूल में पढ़ता था। इसके बाद वह कैंची धाम गईं और वहीं से उनका प्रोफेसर सुधीर मुखर्जी से संपर्क हुआ।
सत्या के अनुसार, मुखर्जी दंपती की अपनी कोई संतान नहीं थी और उन्होंने उन्हें बेटी की तरह माना। प्रोफेसर सुधीर मुखर्जी का निधन 1997 में हुआ, जबकि उनकी पत्नी कमला का कुछ वर्ष बाद निधन हो गया।
सत्या का कहना है कि बाबा प्रोफेसर मुखर्जी से कहा करते थे कि यह घर उनका है और वह हमेशा यहीं रहेंगे। यही विश्वास आज भी इस घर से जुड़े श्रद्धालुओं की आस्था का हिस्सा है।
Spiritual India:-‘हनुमान अंश’ के बाद फिर चर्चा में आया घर
नीब करौरी बाबा के जीवन और आध्यात्मिक विरासत से प्रेरित फिल्म ‘Hanuman Ansh’ के रिलीज होने के बाद बाबा को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। फिल्म की शूटिंग इस Church Lane वाले घर में नहीं हुई है, लेकिन फिल्म में बाबा से जुड़े संदर्भों के कारण उनके जीवन से जुड़े स्थानों के बारे में लोग ज्यादा जानकारी तलाश रहे हैं।

बाबा की आध्यात्मिक विरासत से जुड़े स्थानों को लेकर उत्तर प्रदेश में भी हाल के दिनों में रुचि बढ़ी है। सरकार ने नीब करौरी बाबा से जुड़े प्रमुख स्थलों को जोड़ने वाले आध्यात्मिक पर्यटन सर्किट की पहल भी की है।
Spiritual India:-आस्था का ऐसा केंद्र, जहां नहीं है कोई भव्य मंदिर
प्रयागराज का यह घर इस बात की मिसाल है कि किसी स्थान की धार्मिक पहचान हमेशा किसी बड़े मंदिर या स्मारक से ही नहीं बनती। श्रद्धालुओं के लिए यहां बाबा की स्मृतियां और उनसे जुड़ी वस्तुएं ही सबसे बड़ी वजह हैं।
