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Healthy Lifestyle:-सिर्फ 10 मिनट का सुप्त वीरासन? जानिए क्या सच में कमर दर्द और पाचन में मिलती है राहत

Healthy Lifestyle:-योग में कई ऐसे आसन हैं जो शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव, लचीलेपन और रिलैक्सेशन में मदद कर सकते हैं। सुप्त वीरासन (Supta Virasana) भी ऐसा ही एक आसन है, जिसमें वीरासन की स्थिति से धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकते हुए शरीर को सहारे के साथ लेटाया जाता है। इसे अंग्रेजी में Reclining Hero Pose कहा जाता है।

हालांकि सोशल मीडिया और कई लेखों में इसे कमर दर्द, कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं का सीधा इलाज बताया जाता है, लेकिन उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण इतने मजबूत नहीं हैं कि इन दावों को निश्चित चिकित्सा लाभ के तौर पर पेश किया जाए। शोध में योग को सामान्य स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और कुछ लोगों में लंबे समय के लोअर-बैक पेन में मददगार पाया गया है, लेकिन इसका असर व्यक्ति और योग के पूरे अभ्यास पर निर्भर करता है।

Healthy Lifestyle:-क्या है सुप्त वीरासन?

‘सुप्त’ का अर्थ होता है लेटना या पीछे की ओर विश्राम की स्थिति में जाना और ‘वीरासन’ का अर्थ वीर या Hero Pose है। इस आसन में पहले वीरासन में बैठा जाता है और फिर हाथों, कोहनियों या योगा बोल्स्टर जैसे सहारे की मदद से धीरे-धीरे पीछे की ओर झुका जाता है।

इस दौरान जांघों के आगे के हिस्से, कूल्हों और टखनों में स्ट्रेच महसूस हो सकता है। सही तरीके और शरीर की क्षमता के अनुसार किए जाने पर यह आसन रिलैक्सेशन और लचीलेपन के अभ्यास का हिस्सा हो सकता है।

Healthy Lifestyle:-शरीर को मिल सकता है अच्छा स्ट्रेच

सुप्त वीरासन में खास तौर पर जांघों के आगे के हिस्से और हिप फ्लेक्सर्स में स्ट्रेच आता है। लंबे समय तक बैठने, चलने या साइकिल चलाने जैसी गतिविधियों के बाद कुछ लोगों को इससे शरीर के सामने वाले हिस्से में खिंचाव और आराम महसूस हो सकता है।

योग के व्यापक शोध में भी नियमित योग अभ्यास को शारीरिक कार्यक्षमता और लचीलेपन में संभावित सुधार से जोड़ा गया है। हालांकि इन अध्ययनों के आधार पर सुप्त वीरासन को अकेले किसी बीमारी का उपचार नहीं माना जा सकता।

Healthy Lifestyle:-क्या कमर दर्द में फायदा करता है?

यह दावा थोड़ा सावधानी से समझने की जरूरत है। वैज्ञानिक अध्ययनों में योग को लंबे समय के लोअर-बैक पेन में कुछ लाभ से जोड़ा गया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सुप्त वीरासन अकेले कमर दर्द को ठीक कर देता है।

NCCIH के अनुसार, योग से क्रॉनिक लोअर-बैक पेन में दर्द और शारीरिक कार्यक्षमता में कुछ सुधार हो सकता है, लेकिन उपलब्ध प्रमाणों में प्रभाव सामान्यतः छोटा है और योग का असर दूसरे व्यायामों से बहुत अलग नहीं पाया गया है।

इसलिए कमर दर्द से परेशान व्यक्ति को इस आसन को इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए। खासकर अगर आसन करने पर दर्द बढ़ता है, तो इसे तुरंत रोक देना चाहिए।

Healthy Lifestyle:-पाचन और कब्ज को लेकर क्या है सच?

सुप्त वीरासन से पेट और शरीर के सामने वाले हिस्से में स्ट्रेच महसूस हो सकता है, लेकिन यह कहना कि सिर्फ 10 मिनट इस आसन को करने से पाचन शक्ति दुरुस्त हो जाएगी या कब्ज ठीक हो जाएगा, वैज्ञानिक रूप से पर्याप्त रूप से प्रमाणित नहीं है।

इसलिए इसे पाचन संबंधी बीमारी या कब्ज के उपचार के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त पानी, फाइबर युक्त भोजन और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह पाचन संबंधी समस्याओं के लिए अधिक महत्वपूर्ण हैं।

Healthy Lifestyle:-10 मिनट करना जरूरी है क्या?

नहीं। सुप्त वीरासन को हर व्यक्ति के लिए 10 मिनट तक करना जरूरी नहीं है। यह अपेक्षाकृत गहरा स्ट्रेच देने वाला आसन है और शुरुआत में लंबे समय तक रुकना असहज हो सकता है।

शुरुआती लोग विशेषज्ञ की निगरानी में कम समय से शुरुआत कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर पीठ के नीचे बोल्स्टर या मुड़े हुए कंबल का सहारा लिया जा सकता है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, आसन में दर्द या तेज दबाव महसूस होने पर मुद्रा को आसान बनाना या उससे बाहर आना चाहिए।

Healthy Lifestyle:-खाने के 15-20 मिनट बाद करना सही है?

मूल कंटेंट में खाने के सिर्फ 15-20 मिनट बाद सुप्त वीरासन करने को पाचन के लिए बेहतर बताया गया है। इस दावे के लिए मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले।

दरअसल, यह आसन घुटनों, टखनों और शरीर के सामने वाले हिस्से पर काफी स्ट्रेच डाल सकता है। इसलिए इसे भोजन के तुरंत बाद करने को सामान्य नियम के रूप में बताना उचित नहीं है। आरामदायक समय और व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अभ्यास करना बेहतर है।

किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?

सुप्त वीरासन में घुटनों और टखनों पर काफी मोड़ आता है। इसलिए निम्न स्थितियों में इसे बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए—

  • घुटने में दर्द, चोट या हाल की सर्जरी
  • टखने या पैर में चोट अथवा दर्द
  • ऐसा लोअर-बैक पेन जो पीछे झुकने से बढ़ता हो
  • कूल्हे या रीढ़ से जुड़ी समस्या
  • आसन करते समय तेज दर्द, झनझनाहट या सुन्नपन
  • गर्भावस्था में बिना चिकित्सकीय/योग विशेषज्ञ की सलाह के

योग सामान्यतः स्वस्थ लोगों के लिए उचित तरीके से किया जाए तो सुरक्षित माना जाता है, लेकिन गलत तकनीक या शरीर की क्षमता से अधिक स्ट्रेच करने पर चोट का जोखिम रहता है। गर्भावस्था और अन्य विशेष स्वास्थ्य स्थितियों में योग के कुछ आसनों में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है।

Healthy Lifestyle:-कैसे करें सुप्त वीरासन?

  1. सबसे पहले योग मैट पर वीरासन में बैठें।
  2. घुटनों और पैरों की स्थिति आरामदायक रखें।
  3. हाथों का सहारा लेते हुए धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकें।
  4. पहले कोहनियों और फिर जरूरत महसूस होने पर पीठ को बोल्स्टर या कंबल के सहारे टिकाएं।
  5. गर्दन और पीठ पर अनावश्यक दबाव न डालें।
  6. सांस सामान्य और सहज रखें।
  7. किसी भी तरह का तेज दर्द या दबाव महसूस हो तो तुरंत मुद्रा से बाहर आएं।
  8. आसन से बाहर निकलते समय भी धीरे-धीरे आगे आएं।

शुरुआती लोगों के लिए बिना सहारे जमीन पर पूरी तरह पीछे लेटना जरूरी नहीं है। बोल्स्टर या मुड़े हुए कंबल का इस्तेमाल आसन को अधिक आरामदायक बनाने में मदद कर सकता है।

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