छत्तीसगढ़

Jhiram Verdict:-झीरम घाटी हत्याकांड: 10 दोषियों को फांसी, 13 साल बाद आया फैसला; जजमेंट में साजिश और 26/11 का भी जिक्र

Jhiram Verdict:-छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड में 13 साल बाद अदालत ने 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई है। जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 16 सितंबर 2026 को यह फैसला सुनाया। इससे पहले 5 सितंबर को अदालत ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था।

25 मई 2013 को बस्तर के झीरम घाटी इलाके में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर माओवादियों ने हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत कई लोगों की मौत हुई थी।

Jhiram Verdict:-25 फरवरी से हमले की तैयारी का जिक्र

अदालत के फैसले में सामने आई जानकारी के मुताबिक, हमले की योजना और तैयारियों को लेकर फरवरी 2013 से बैठकों का सिलसिला शुरू होने का उल्लेख है। रिपोर्टों के अनुसार, 25 फरवरी 2013 की बैठक में झीरम घाटी में बड़ी कार्रवाई की योजना पर चर्चा हुई थी।

जजमेंट में नक्सली संगठन की बैठकों, अलग-अलग दस्तों की भूमिका और हमले की तैयारी से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, हमले के संचालन और स्थान चयन से लेकर संसाधन जुटाने तक अलग-अलग लोगों को जिम्मेदारियां दिए जाने की बात सामने आई है।

NIA की जांच के मुताबिक यह हमला प्रतिबंधित CPI (Maoist) के Tactical Counter Offensive Campaign यानी TCOC के दौरान योजनाबद्ध तरीके से किया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार, हमले का प्रमुख निशाना वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा थे।

Jhiram Verdict:-10 आरोपियों को मृत्युदंड

मामले में जिन 10 आरोपियों का ट्रायल हुआ, उन्हें 5 सितंबर को दोषी करार दिया गया था। इसके बाद 16 सितंबर को अदालत ने सभी 10 को मृत्युदंड सुनाया।

दोषी ठहराए गए आरोपियों में प्रमिला मोडियम, चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना, सुमिता उर्फ पुनेम मोडियम, मुक्का मंडवी, कोसा कवासी उर्फ कोसाराम, आयता मरकाम, मड़कम देवा, जोगा मड़कम, बंजामी सन्ना उर्फ चमरा और महादेव नाग शामिल हैं।

NIA के मामले में इन आरोपियों पर हत्या, आपराधिक साजिश और गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए थे। अदालत ने इन्हें दोषी ठहराने के बाद सजा-ए-मौत सुनाई।

Jhiram Verdict:-NIA ने पेश किए 101 गवाह

इस मामले की सुनवाई कई वर्षों तक चली। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने 101 गवाहों के बयान पेश किए। मामले में करीब 294 सुनवाइयां हुईं और ट्रायल एक दशक से ज्यादा समय तक चला।

NIA ने जांच के बाद सितंबर 2014 में पहली चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद सितंबर 2015 में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की गई। कुल 39 आरोपियों को चार्जशीट में शामिल किया गया था। इनमें से 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि एक की ट्रायल के दौरान मौत हो गई। 28 अन्य आरोपी वांटेड बताए गए हैं।

इसलिए मूल खबर में दिए गए “27 आरोपी फरार” के आंकड़े को अपडेट करना जरूरी है। उपलब्ध ताजा रिपोर्टिंग में यह संख्या 28 वांटेड आरोपियों की है।

Jhiram Verdict:-हमले में कितने लोगों की मौत हुई?

झीरम घाटी हमले में मृतकों की संख्या को लेकर रिपोर्टों में 27 और 29 दोनों आंकड़े मिलते हैं। NIA से संबंधित हालिया रिपोर्टिंग में 27 लोगों की मौत और 38 लोगों के घायल होने का आंकड़ा दिया गया है। वहीं कई रिपोर्टों में बाद में हुई मौतों को शामिल करते हुए कुल मृतक संख्या 29 बताई गई है।

इसलिए खबर में केवल एक आंकड़ा लिखने के बजाय यह स्पष्ट करना ज्यादा सटीक होगा कि हमले में 27 लोगों की तत्काल मौत का NIA रिकॉर्ड मिलता है, जबकि बाद की मौतों को शामिल कर कई रिपोर्टों में मृतकों की कुल संख्या 29 बताई गई है।

Jhiram Verdict:-हथियार लूटने की बात भी जजमेंट में

NIA की जांच के अनुसार हमले के बाद माओवादियों ने सुरक्षा बलों के हथियार और अन्य सामान भी लूटे थे। उपलब्ध रिपोर्ट में 9 एमएम पिस्टल, दो AK-47 राइफल, हैंड ग्रेनेड और संचार उपकरण समेत हथियारों की लूट का उल्लेख है।

ऐसे में मूल कॉपी में लिखा गया “22 हथियार लूटे गए” वाला आंकड़ा बिना जजमेंट की मूल कॉपी से पुष्टि किए प्रकाशित करना उचित नहीं होगा।

Jhiram Verdict:-26/11 मुंबई हमले का भी अदालत ने किया उल्लेख

इस मामले के फैसले में 26/11 मुंबई आतंकी हमले से जुड़ी न्यायिक नजीर का भी उल्लेख किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। अदालत ने साजिश, हमले की तैयारी और अपराध में आरोपियों की भूमिका जैसे कानूनी पहलुओं पर विचार करते हुए मुंबई हमले से जुड़े न्यायिक दृष्टांत का संदर्भ दिया।

अदालत ने झीरम मामले में अपराध की गंभीरता और दोषियों की भूमिका को ध्यान में रखते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई मौत की सजा का अंतिम क्रियान्वयन हाईकोर्ट की पुष्टि और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार दोषियों को हाईकोर्ट में अपील के लिए 30 दिन का समय भी दिया गया है।

Jhiram Verdict:-13 साल बाद आया फैसला, लेकिन मामला पूरी तरह खत्म नहीं

झीरम घाटी मामले में 10 दोषियों को मृत्युदंड मिल गया है, लेकिन चार्जशीट में शामिल 28 अन्य वांटेड आरोपियों के संबंध में यह ट्रायल फैसला नहीं है। इसलिए इस मामले की पूरी कानूनी प्रक्रिया अभी समाप्त नहीं मानी जा सकती।

झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े राजनीतिक-माओवादी हमलों में से एक रहा है। 25 मई 2013 की इस घटना ने राज्य की तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व की शीर्ष पंक्ति को भारी नुकसान पहुंचाया था। 13 साल से अधिक समय बाद आए इस फैसले ने मामले की न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण चरण पूरा किया है।

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