
57th GST Council:-जीएसटी व्यवस्था को आसान बनाने और कारोबारियों पर अनुपालन का बोझ कम करने की दिशा में 57वीं GST काउंसिल की बैठक में कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं। इन सिफारिशों का असर छोटे और मध्यम व्यापारियों से लेकर निर्माताओं, सेवा प्रदाताओं, निर्यातकों और ई-कॉमर्स कारोबारियों तक पड़ सकता है। हालांकि, व्यापारियों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि काउंसिल की सिफारिशें अपने आप कानून नहीं बन जातीं। संबंधित अधिनियम, नियम, अधिसूचना या सर्कुलर लागू होने के बाद ही उनका कानूनी प्रभाव होगा।
वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट सीए चेतन दास तारवानी के अनुसार, GST व्यवस्था में प्रक्रियागत सुधार और मुकदमेबाजी कम करने की दिशा में ये कदम व्यापार जगत के लिए सकारात्मक हैं। लेकिन व्यापारियों को केवल घोषणा के आधार पर अपनी टैक्स प्रक्रिया बदलने के बजाय संबंधित कानूनी बदलाव के प्रभावी होने का इंतजार करना चाहिए।
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57th GST Council:-₹10 हजार से कम टैक्स विवाद में शो-कॉज नोटिस नहीं
57वीं GST काउंसिल ने CGST Act की धारा 73, 74 और 74A में बदलाव की सिफारिश करते हुए ₹10,000 का न्यूनतम टैक्स थ्रेशोल्ड तय करने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत ₹10,000 से कम के टैक्स अमाउंट वाले मामलों में शो-कॉज नोटिस जारी नहीं करने की सिफारिश की गई है। यह सीमा CGST, SGST/UTGST, IGST और cess को मिलाकर देखी जाएगी। वहीं, ठीक ₹10,000 या उससे अधिक की राशि होने पर यह थ्रेशोल्ड पूरा माना जाएगा।
काउंसिल ने यह भी सिफारिश की है कि इस नई व्यवस्था के लागू होने के समय ₹10,000 से कम राशि वाले कुछ लंबित नोटिस और अपीलों को भी प्रस्तावित थ्रेशोल्ड के अनुरूप निपटाने का कानूनी प्रावधान किया जाए।
57th GST Council:-सामान्य पेनल्टी ₹25 हजार से घटकर ₹10 हजार करने की सिफारिश
व्यापारियों के लिए एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव CGST Act की धारा 125 से जुड़ा है। काउंसिल ने अधिकतम सामान्य पेनल्टी को ₹25,000 से घटाकर ₹10,000 करने की सिफारिश की है। इससे कई प्रक्रियागत या सामान्य गैर-अनुपालन मामलों में आर्थिक बोझ कम हो सकता है।
इसके अलावा, गैर-धोखाधड़ी वाले मामलों में समय पर टैक्स और ब्याज का भुगतान करने पर 5 प्रतिशत की कम पेनल्टी का भी प्रस्ताव है।
57th GST Council:-₹5 करोड़ तक कारोबार वाले कारोबारियों को लेट फीस में राहत
काउंसिल ने उन करदाताओं के लिए भी राहत की सिफारिश की है जिनका पिछले वित्त वर्ष में वार्षिक कारोबार ₹5 करोड़ तक रहा है। यदि ऐसे पात्र करदाता धारा 39(1) के तहत तय रिटर्न को देरी से दाखिल करते हैं, लेकिन जिस महीने रिटर्न की देय तारीख थी, उसी महीने के अंत तक उसे दाखिल कर देते हैं, तो लेट फीस माफ करने का प्रस्ताव है।
हालांकि, व्यापारियों को यह समझना जरूरी है कि लेट फीस में राहत का मतलब यह नहीं है कि हर तरह की ब्याज या अन्य कर देनदारी अपने आप समाप्त हो जाएगी।
57th GST Council:-ITC के नियमों में भी राहत की सिफारिश
57वीं बैठक में इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC से जुड़े नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलावों की सिफारिश की गई है। धारा 17(5) में संशोधन के प्रस्ताव के तहत outdoor catering, health और life insurance, free samples तथा कानून के अनुसार shelf-life खत्म होने पर नष्ट या लिख-ऑफ किए गए माल जैसी कुछ श्रेणियों पर मौजूदा ITC प्रतिबंधों को हटाने की सिफारिश की गई है।
इसके अलावा, zero-rated supplies से जुड़े मामलों में capital goods पर जमा ITC तथा inverted duty structure से जुड़े मामलों में input services और capital goods के ITC refund की पात्रता बढ़ाने का भी प्रस्ताव है।
57th GST Council:-90% तक provisional refund की प्रक्रिया होगी ज्यादा ऑटोमेटेड
रिफंड के मामले में भी व्यापारियों और निर्यातकों के लिए राहत की सिफारिश की गई है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत zero-rated supplies और inverted duty structure से जुड़े पात्र low-risk refund claims में 90 प्रतिशत तक राशि का provisional refund सिस्टम आधारित तरीके से मंजूर किया जा सकेगा। साथ ही refund application की acknowledgement या deficiency memo जारी करने की समयसीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का प्रस्ताव है।
इससे कारोबारियों की working capital जरूरतों में मदद मिल सकती है और रिफंड के लिए विभागीय प्रक्रिया पर निर्भरता कम हो सकती है।
57th GST Council:-GST में गिरफ्तारी के प्रावधान हटाने और prosecution threshold बढ़ाने की सिफारिश
57वीं GST Council की सबसे बड़ी कानूनी सिफारिशों में से एक GST के तहत गिरफ्तारी के प्रावधान से जुड़ी है। काउंसिल ने CGST Act की धारा 69 को हटाकर GST में गिरफ्तारी की शक्ति समाप्त करने की सिफारिश की है। साथ ही prosecution की मौद्रिक सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने का प्रस्ताव है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि टैक्स चोरी या फर्जी ITC जैसे गंभीर मामलों में कार्रवाई पूरी तरह खत्म हो जाएगी। काउंसिल ने prosecution से जुड़े प्रावधानों में बदलाव के साथ गंभीर धोखाधड़ी और fraudulent ITC से जुड़े अपराधों के लिए अलग प्रावधान बनाए रखने की सिफारिश की है।
57th GST Council:-E-Way Bill की जांच में भी बदलाव
माल परिवहन से जुड़े मामलों में काउंसिल ने random interception को कम करने की दिशा में सिफारिश की है। प्रस्ताव के अनुसार किसी वाहन को रोकने के लिए विशिष्ट intelligence और Joint Commissioner या उससे ऊपर के अधिकारी की अनुमति जरूरी होगी। इसके अलावा transit states में अनावश्यक interception को सीमित करने का भी प्रस्ताव है।
इससे देशभर में माल की आवाजाही के दौरान होने वाली अनावश्यक रुकावट कम होने की उम्मीद है।
57th GST Council:-छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं को भी राहत
ई-कॉमर्स के जरिए दूसरे राज्यों में सामान बेचने वाले छोटे कारोबारियों के लिए भी सरल GST registration mechanism की सिफारिश की गई है। प्रस्तावित व्यवस्था में पात्र छोटे sellers कुछ शर्तों के साथ दूसरे राज्यों में अपने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के warehouse को principal place of business के रूप में घोषित कर registration प्राप्त कर सकेंगे। इससे हर राज्य में अलग physical business premises की जरूरत कम हो सकती है।
57th GST Council:-व्यापारियों के लिए सबसे जरूरी सावधानी
सीए चेतन दास तारवानी ने व्यापारियों से अपील की है कि वे GST Council की सिफारिशों को तुरंत लागू कानून न मानें। परिषद की सिफारिशों को प्रभावी बनाने के लिए संबंधित CGST Act में संशोधन, Rules में बदलाव, notification या circular जारी होना जरूरी है। खुद GST Council और PIB ने भी स्पष्ट किया है कि सिफारिशों को संबंधित कानूनी प्रक्रिया के जरिए लागू किया जाएगा और वही बदलाव कानूनी रूप से प्रभावी होंगे।
उन्होंने व्यापारियों को सलाह दी कि वे नियमित रूप से GSTR-1, GSTR-3B और GSTR-2B का मिलान, खरीद-बिक्री के बिल, स्टॉक रिकॉर्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज व्यवस्थित रखें। विभाग से कोई नोटिस मिलने पर उसका निर्धारित समयसीमा में जवाब देना भी जरूरी है।
सीए तारवानी के मुताबिक, “GST में प्रक्रिया को सरल बनाने और अनावश्यक मुकदमेबाजी कम करने की दिशा में ये सिफारिशें व्यापारियों के लिए सकारात्मक संकेत हैं। लेकिन राहत का लाभ लेने के लिए यह देखना जरूरी है कि संबंधित प्रावधान कब और किस रूप में कानून का हिस्सा बनते हैं। तब तक व्यापारियों को मौजूदा नियमों के अनुसार ही अपना अनुपालन जारी रखना चाहिए।”
कुल मिलाकर 57वीं GST Council की सिफारिशों का फोकस टैक्स दरों में बदलाव से ज्यादा GST compliance को सरल बनाने, छोटे विवादों को कम करने, ITC और refund प्रक्रिया को आसान बनाने तथा व्यापारियों और टैक्स अधिकारियों के बीच अनावश्यक विवाद घटाने पर है।
