Chamber Of Commerce:-बिलासपुर में चेंबर की पहली बड़ी बैठक, लेकिन बैठक से पहले इस्तीफे ने बढ़ाई हलचल; संविधान में बदलाव की मांग पर घमासान

Chamber Of Commerce:-छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक पहली बार बिलासपुर में आयोजित हुई। बैठक में व्यापार और उद्योग के विकास, कारोबारियों की समस्याओं, ट्रांसपोर्टिंग से जुड़ी दिक्कतों और संगठन के विस्तार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। बिलासपुर में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक होने को क्षेत्र के व्यापारिक संगठनों के लिए अहम पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
बैठक में बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों में व्यापार एवं उद्योग को बढ़ावा देने, स्थानीय कारोबारियों को संगठन से जोड़ने तथा परिवहन से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर जोर दिया गया। व्यापारिक प्रतिनिधियों का कहना है कि क्षेत्र की समस्याओं को प्रदेश स्तर पर उठाने के लिए ऐसी बैठकें महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।
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हालांकि बैठक से ठीक पहले चेंबर के संभाग कार्यकारी अध्यक्ष और संविधान संशोधन समिति से जुड़े कमल सोनी के इस्तीफे ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। सोनी ने चेंबर की कार्यप्रणाली और संविधान में मौजूद कुछ प्रावधानों को लेकर सवाल उठाते हुए पद से इस्तीफा दिया है।

उनकी प्रमुख आपत्ति संगठन में नेतृत्व के अवसरों के समान वितरण को लेकर बताई गई है। उनका कहना है कि प्रदेशभर के व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन में प्रदेश के सभी संभागों को शीर्ष पदों पर समान अवसर मिलना चाहिए।
सोनी ने चेंबर के संविधान की धारा 15 का हवाला देते हुए दावा किया है कि अध्यक्ष, महामंत्री और कोषाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए रायपुर और नया रायपुर क्षेत्र से जुड़ी पात्रता का प्रावधान अन्य क्षेत्रों के व्यापारियों के लिए असमान स्थिति पैदा करता है। इसी आधार पर वे संविधान में संशोधन और नेतृत्व व्यवस्था को अधिक संतुलित करने की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने बिलासपुर को स्टेट कैपिटल रीजन में शामिल करने और क्षेत्र में औद्योगिक पार्क विकसित करने की मांग भी उठाई है। उनका तर्क है कि बिलासपुर में हाईकोर्ट, रेलवे जोन तथा कोयला, बिजली, लाइमस्टोन और जल जैसे महत्वपूर्ण संसाधन मौजूद हैं, बावजूद इसके क्षेत्र की औद्योगिक क्षमता का अपेक्षित उपयोग नहीं हो पाया है।
Chamber Of Commerce:-इससे पहले भी चेंबर के चुनाव और संविधान से जुड़े प्रावधानों को लेकर कमल सोनी की ओर से सवाल उठाए जाने की रिपोर्ट सामने आ चुकी है। 2025 में चुनावी नियमों में रायपुर-केंद्रित पात्रता को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई थी।
दूसरी ओर, चेंबर से जुड़े पदाधिकारियों का पक्ष है कि संविधान में संशोधन का विषय आमसभा के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसे कार्यकारिणी बैठक के स्तर पर तय नहीं किया जा सकता।
ऐसे में बिलासपुर में हुई बैठक एक तरफ जहां क्षेत्रीय व्यापार और उद्योग की समस्याओं को प्रदेश स्तर पर रखने का मंच बनी, वहीं दूसरी तरफ कमल सोनी के इस्तीफे के बाद चेंबर में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संविधान में बदलाव का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में आ गया है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि चेंबर नेतृत्व क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संविधान संशोधन से जुड़े उठाए गए सवालों पर आगे क्या रुख अपनाता है।
