Bihar Politics:-‘अभेद किला ढहा!’ बांकीपुर में प्रशांत किशोर का बड़ा धमाका, 19,324 वोटों से BJP को दी करारी मात

Bihar Politics:-पटना। बिहार की राजनीति में सोमवार को बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। राजधानी पटना की प्रतिष्ठित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शानदार जीत दर्ज करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लंबे समय से कायम गढ़ को ध्वस्त कर दिया। यह प्रशांत किशोर की चुनावी राजनीति में पहली जीत है और इसे बिहार की राजनीति के लिए अहम मोड़ माना जा रहा है।
32 राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद प्रशांत किशोर को 64,151 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार नीरज सिन्हा को 44,827 वोट प्राप्त हुए। इस तरह प्रशांत किशोर ने 19,324 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की। वहीं राजद उम्मीदवार रेखा गुप्ता को करीब 14 हजार वोट ही मिले और वह मुकाबले में काफी पीछे रहीं।
Bihar Politics:-बीजेपी के मजबूत गढ़ में सेंध
बांकीपुर विधानसभा सीट वर्ष 1995 से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। इस सीट पर भाजपा की लगातार पकड़ रही, लेकिन इस उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने उस परंपरा को तोड़ते हुए जन सुराज को पहली बड़ी चुनावी सफलता दिलाई। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के विधानसभा से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई थी।
Bihar Politics:-मतगणना के हर राउंड में बढ़त
मतगणना की शुरुआत से ही प्रशांत किशोर बढ़त बनाए रहे। जैसे-जैसे राउंड आगे बढ़ते गए, उनकी बढ़त मजबूत होती गई और अंततः उन्होंने भाजपा को दोहरे अंकों के हजारों वोटों के अंतर से पराजित कर दिया। यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा नेताओं ने बांकीपुर को अपना अभेद्य किला बताया था।
Bihar Politics:-किसे मिले कितने वोट?
- प्रशांत किशोर (जन सुराज) – 64,151 वोट
- नीरज सिन्हा (भाजपा) – 44,827 वोट
- रेखा गुप्ता (राजद) – करीब 14,273 वोट
Bihar Politics:-25 उम्मीदवार मैदान में, लेकिन मुकाबला रहा दो दलों के बीच
बांकीपुर उपचुनाव में कुल 25 उम्मीदवार मैदान में थे। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे त्रिकोणीय मुकाबला माना था, लेकिन मतगणना के नतीजों ने साफ कर दिया कि वास्तविक मुकाबला जन सुराज और भाजपा के बीच ही रहा। राजद इस चुनाव में प्रभावी चुनौती पेश नहीं कर सकी।
Bihar Politics:-बिहार की राजनीति में नए समीकरणों के संकेत
राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की यह जीत केवल एक विधानसभा सीट की जीत नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे बिहार की राजनीति में नए राजनीतिक विकल्प के उभरने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा के पारंपरिक गढ़ में मिली यह जीत आगामी चुनावों से पहले राज्य की राजनीति में नए समीकरण बना सकती है। हालांकि व्यापक राजनीतिक प्रभाव का आकलन आने वाले चुनावों और जनमत के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
