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Chandra Grahan 2026:-रक्षाबंधन पर ग्रहण का अलर्ट! क्या इस बार भाई की कलाई रहेगी सूनी? जानिए आखिर क्या है पूरा सच

Chandra Grahan 2026:-रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण की खबर सामने आने के बाद लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं पैदा हो गई हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार राखी बांधने पर रोक रहेगी? क्या सूतक काल लगेगा? क्या पूजा-पाठ प्रभावित होगा? हालांकि खगोलीय तथ्यों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भारत में रक्षाबंधन का पर्व पूरी तरह सामान्य तरीके से मनाया जाएगा।

Chandra Grahan 2026:-28 अगस्त को लगेगा आंशिक चंद्र ग्रहण

28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को आंशिक चंद्र ग्रहण लगेगा। भारतीय समयानुसार ग्रहण की शुरुआत सुबह 6:53 बजे होगी और इसका समापन 12:31 बजे होगा। ग्रहण के दौरान चंद्रमा का बड़ा हिस्सा पृथ्वी की छाया में रहेगा, इसलिए अमेरिका और कुछ अन्य देशों में यह बेहद आकर्षक दिखाई देगा तथा कुछ स्थानों पर ‘ब्लड मून’ जैसा दृश्य भी देखने को मिल सकता है।

Chandra Grahan 2026:-भारत में नहीं दिखेगा ग्रहण

सबसे राहत की बात यह है कि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ग्रहण के समय भारत में चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा, इसलिए इसका प्रत्यक्ष दर्शन संभव नहीं होगा। इसी वजह से भारत में इस ग्रहण का धार्मिक प्रभाव भी मान्य नहीं माना गया है।

Chandra Grahan 2026:-क्या लगेगा सूतक काल?

धार्मिक परंपराओं के अनुसार चंद्र ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू होता है। लेकिन शास्त्रों में यह भी स्पष्ट है कि सूतक केवल वहीं मान्य होता है, जहां ग्रहण दिखाई देता है। चूंकि 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल लागू नहीं होगा।

Chandra Grahan 2026:-राखी बांधने और पूजा-पाठ पर नहीं होगी कोई रोक

ग्रहण भारत में अदृश्य रहने के कारण भाई-बहन पूरे उत्साह और परंपरा के साथ रक्षाबंधन मना सकेंगे। पूजा-पाठ, मंदिरों के कपाट और अन्य शुभ कार्यों पर भी किसी प्रकार की रोक नहीं रहेगी। हालांकि ज्योतिषाचार्य भद्राकाल से बचकर शुभ मुहूर्त में राखी बांधने की सलाह देते हैं। उपलब्ध पंचांग के अनुसार 28 अगस्त की सुबह भद्रा समाप्त हो चुकी होगी और सुबह का समय राखी बांधने के लिए शुभ रहेगा।

Chandra Grahan 2026:-बिना भ्रम के मनाएं रक्षाबंधन

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण को लेकर किसी प्रकार की अफवाह या भ्रम में आने की आवश्यकता नहीं है। भारत में ग्रहण दिखाई न देने के कारण न सूतक की बाधा होगी और न ही पूजा-पाठ या राखी बांधने में कोई धार्मिक प्रतिबंध रहेगा। ऐसे में भाई-बहन श्रद्धा, प्रेम और उत्साह के साथ यह पावन पर्व मना सकते हैं।

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