Goncha 2026:-बस्तर का सबसे बड़ा आस्था महापर्व गोंचा तैयार… 9 दिन तक जगदलपुर रहेगा भक्ति, संस्कृति और परंपरा के रंग में रंगा

Goncha 2026:-बस्तर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान माने जाने वाले ऐतिहासिक गोंचा महापर्व की तैयारियां तेज हो गई हैं। हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू होने वाला यह पर्व इस बार भी पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाएगा। नौ दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में महाभंडारा, धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के शामिल होने की संभावना है।
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Goncha 2026:-क्या है गोंचा पर्व?
गोंचा पर्व बस्तर की सबसे प्राचीन धार्मिक परंपराओं में से एक है। यह पर्व भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा से जुड़ा हुआ माना जाता है। बस्तर में इसे स्थानीय संस्कृति के अनुरूप विशेष स्वरूप में मनाया जाता है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की भव्य रथयात्रा निकाली जाती है।
गोंचा पर्व की सबसे खास पहचान ‘तु्पकी’ (लकड़ी या बांस से बनी पारंपरिक बंदूक) और गोंचा फल है। श्रद्धालु तुपकी के माध्यम से गोंचा फल चलाकर पारंपरिक उत्सव का आनंद लेते हैं। यह अनोखी परंपरा देशभर में केवल बस्तर में ही देखने को मिलती है।
Goncha 2026:-9 दिनों तक होंगे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन
मंदिर समिति के अनुसार, इस वर्ष भी पूरे नौ दिनों तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ महाभंडारा, भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सामाजिक आयोजन किए जाएंगे। हर साल की तरह इस बार भी स्थानीय समाज और श्रद्धालुओं के सहयोग से पूरे आयोजन को सफल बनाने की तैयारी की जा रही है।

Goncha 2026:-बजट बढ़ाने का प्रस्ताव
गोंचा पर्व के बेहतर आयोजन के लिए पूर्व में संस्कृति विभाग द्वारा 5 लाख रुपये का बजट उपलब्ध कराया जाता रहा है। इस बार आयोजन का स्वरूप और व्यवस्थाएं बेहतर बनाने के उद्देश्य से 18 लाख रुपये का प्रस्ताव तहसीलदार के माध्यम से राज्य शासन को भेजा गया है।
मंदिर समिति के सदस्य नरेंद्र पाणिग्राही ने बताया कि प्रस्ताव की जानकारी मिलने के बाद जल्द ही तहसीलदार और कलेक्टर के साथ बैठक की जाएगी। बैठक में सुरक्षा, साफ-सफाई, यातायात, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और शासन से मिलने वाले सहयोग पर विस्तार से चर्चा होगी, ताकि इस बार का आयोजन पहले से अधिक भव्य और सुव्यवस्थित हो सके।
Goncha 2026:-पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
गोंचा महापर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि बस्तर की समृद्ध लोक संस्कृति, कला और परंपरा का भी प्रतीक है। हर वर्ष इस पर्व को देखने के लिए छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से पर्यटक और श्रद्धालु जगदलपुर पहुंचते हैं। इससे स्थानीय हस्तशिल्प, व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है।
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