Women And Child Development:-223 आंगनबाड़ी केंद्रों का सहारा ‘प्रभारी व्यवस्था’! सालभर से बिना परियोजना अधिकारी चल रहा महिला एवं बाल विकास विभाग

Women And Child Development:-महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर देवभोग ब्लॉक में गंभीर सवाल उठ रहे हैं। 94 गांवों के 223 आंगनबाड़ी केंद्रों और करीब 9,584 हितग्राहियों की जिम्मेदारी संभालने वाले विभाग में पिछले एक वर्ष से परियोजना अधिकारी का पद रिक्त है। इसके चलते पोषण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और आंगनबाड़ी संचालन से जुड़ी योजनाओं के संचालन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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Women And Child Development:-क्या है पूरा मामला?
देवभोग ब्लॉक, जो ओडिशा सीमा से लगा जिले का अंतिम क्षेत्र माना जाता है, वहां महिला एवं बाल विकास विभाग का परियोजना अधिकारी पद लंबे समय से खाली है। वर्तमान में विभाग का संचालन प्रभारी व्यवस्था के माध्यम से किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, जिला परियोजना अधिकारी समीर सौरभ को देवभोग परियोजना का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था, लेकिन उन्हें रायपुर स्थित संचालनालय में सहायक संचालक की जिम्मेदारी भी मिल चुकी है। ऐसे में राजधानी से लगभग 225 किलोमीटर दूर स्थित ब्लॉक की नियमित मॉनिटरिंग और निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

Women And Child Development:-भर्ती प्रक्रिया भी ठप
ब्लॉक के कई आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्यकर्ता और सहायिका के पद रिक्त हैं। विभाग को 9 रिक्त पदों पर भर्ती करनी है, लेकिन यह प्रक्रिया भी लगभग एक वर्ष से लंबित है।
सूत्रों के मुताबिक पिछली भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेजों में अनियमितताएं सामने आने के बाद मामला विवादों में आ गया था। इसके बाद नियुक्तियों की प्रक्रिया धीमी पड़ गई और अब कई केंद्रों में पद खाली होने से कामकाज प्रभावित हो रहा है।
Women And Child Development:-पोषण और शिक्षा योजनाओं पर असर की आशंका
जनपद अध्यक्ष पद्मलया निधि का कहना है कि कई केंद्रों में सहायिकाओं और कार्यकर्ताओं की कमी के कारण बच्चों को मिलने वाला गर्म भोजन, गर्भवती महिलाओं को पोषण आहार और प्रारंभिक शिक्षा संबंधी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
उनका आरोप है कि विभागीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा, बल्कि केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे और महिलाएं योजनाओं के वास्तविक लाभ से वंचित हो सकते हैं।
Women And Child Development:-सामाजिक भेदभाव भी बड़ी चुनौती
देवभोग क्षेत्र के कई आंगनबाड़ी केंद्रों में अनुसूचित जाति वर्ग की कार्यकर्ता और सहायिकाएं कार्यरत हैं। स्थानीय स्तर पर सामाजिक भेदभाव और छुआछूत जैसी मानसिकता के कारण कुछ स्थानों पर भोजन वितरण और अन्य गतिविधियों में दिक्कतें सामने आती रही हैं।
यह मुद्दा पहले भी शासन स्तर की समीक्षा बैठकों में उठ चुका है। इसके बावजूद जागरूकता अभियान अपेक्षित स्तर पर नहीं चल पाने की बात सामने आ रही है।
Women And Child Development:-विभाग का पक्ष
जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक पांडेय ने बताया कि जिले की पांच परियोजनाओं में से दो परियोजना अधिकारी के पद रिक्त हैं। फिलहाल प्रभारी अधिकारियों के माध्यम से योजनाओं का संचालन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि रिक्त पदों को भरने के लिए कलेक्टर के माध्यम से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। नियुक्तियां होने के बाद भर्ती प्रक्रिया और अन्य विभागीय कार्यों को गति मिलेगी।
