अधयात्म

Temple Mystery:-इस शिवलिंग की पूजा करना है मना! फिर भी हर साल उमड़ती है हजारों श्रद्धालुओं की भीड़, जानिए क्या है 700 साल पुराना रहस्य

Temple Mystery:-उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित ‘एक हथिया देवाल’ शिव मंदिर अपनी अनोखी परंपरा और रहस्यमयी इतिहास के कारण देशभर के श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर में हर साल हजारों लोग भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यहां स्थापित शिवलिंग की पूजा नहीं की जाती।

Temple Mystery:-एक हाथ वाले शिल्पकार ने एक रात में बनाया मंदिर

लोककथाओं के अनुसार, गांव का एक कुशल शिल्पकार दुर्घटना में अपना एक हाथ खो बैठा था। लोगों के तानों और अपमान से दुखी होकर उसने गांव छोड़ने का फैसला किया। कहा जाता है कि जाने से पहले उसने पूरी रात एक विशाल चट्टान को तराशकर मंदिर का निर्माण कर दिया। सुबह जब ग्रामीण वहां पहुंचे तो भव्य मंदिर देखकर हैरान रह गए, लेकिन शिल्पकार हमेशा के लिए गांव छोड़ चुका था। इसी घटना के बाद इस मंदिर का नाम ‘एक हथिया देवाल’ पड़ा।

Temple Mystery:-शिवलिंग की उल्टी जलाधारी बनी पूजा न होने का कारण

मंदिर में स्थापित शिवलिंग की सबसे बड़ी विशेषता इसकी जलाधारी (अरघा) है, जो सामान्य परंपरा के विपरीत दिशा में बनी हुई है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार विद्वानों और पुजारियों ने इसे धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना। इसे सुधारने के प्रयास भी किए गए, लेकिन सफल नहीं हुए। तभी से इस शिवलिंग की नियमित पूजा-अर्चना बंद कर दी गई। श्रद्धालु यहां केवल भगवान शिव के दर्शन करते हैं और अपनी श्रद्धा अर्पित कर लौट जाते हैं।

Temple Mystery:-कत्यूरी काल की स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण

इतिहासकारों के अनुसार, यह मंदिर लगभग 12वीं-13वीं शताब्दी का माना जाता है और इसका संबंध कत्यूरी राजवंश से जोड़ा जाता है। मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय नागर शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। पुरातात्विक महत्व के कारण यह स्थल इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए भी विशेष आकर्षण रखता है।

Temple Mystery:-एक ही विशाल चट्टान को तराशकर बनाया गया मंदिर

इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि पूरा ढांचा एक ही विशाल पत्थर को काटकर तैयार किया गया है। मंदिर का प्रवेश द्वार पश्चिम दिशा की ओर है, जबकि गर्भगृह में स्थित शिवलिंग भी उसी चट्टान का हिस्सा है। इसकी नक्काशी और निर्माण शैली उस समय के शिल्प कौशल की उत्कृष्ट मिसाल मानी जाती है।

Temple Mystery:-मंदिर परिसर का नौला भी है आस्था का केंद्र

मंदिर के समीप एक प्राचीन जलस्रोत (नौला) स्थित है, जहां आज भी स्थानीय लोग बच्चों के मुंडन संस्कार और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कराते हैं। श्रद्धालु यहां स्नान कर धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं, हालांकि शिवलिंग की नियमित पूजा नहीं होती।

Temple Mystery:-आस्था और रहस्य का अनोखा संगम

‘एक हथिया देवाल’ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि लोककथाओं, इतिहास और आस्था का अद्भुत संगम है। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक इस रहस्यमयी मंदिर के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पूजा न होने की सदियों पुरानी परंपरा आज भी इस मंदिर को देश के सबसे अनोखे शिव मंदिरों में शामिल करती है।

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