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Naxal Surrender:-माओवादियों को बड़ा झटका: 20 लाख का इनामी केंद्रीय समिति सदस्य नरहरि पत्नी संग सरेंडर, कई राज्यों में 15 नक्सलियों ने डाले हथियार

Naxal Surrender:-प्रतिबंधित माओवादी संगठन को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। संगठन के केंद्रीय समिति सदस्य और 20 लाख रुपये के इनामी माओवादी पसुनूरी नरहरि उर्फ संतोष ने अपनी पत्नी जोबा उर्फ पूनम के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। तेलंगाना पुलिस के सामने हुए इस सरेंडर को सुरक्षा एजेंसियां बड़ी सफलता मान रही हैं। नरहरि लंबे समय से बिहार-झारखंड क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों का अहम चेहरा माना जाता था।

जानकारी के मुताबिक नरहरि तेलंगाना के हनमकोंडा जिले का रहने वाला है और पिछले करीब तीन दशकों से भूमिगत रहकर माओवादी संगठन के लिए काम कर रहा था। वह संगठन के पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो और बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुका है। बताया जा रहा है कि लगातार खराब स्वास्थ्य और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के कारण उसने सरेंडर का फैसला लिया।

नरहरि की पत्नी जोबा उर्फ पूनम भी माओवादी संगठन में क्षेत्रीय समिति सदस्य के रूप में सक्रिय थी। दोनों के एक साथ आत्मसमर्पण को माओवादी नेटवर्क के कमजोर होने का बड़ा संकेत माना जा रहा है। हाल के महीनों में तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में लगातार बड़े माओवादी नेताओं के सरेंडर होने से संगठन को भारी नुकसान पहुंचा है।

इधर महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में भी 15 इनामी नक्सलियों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। गढ़चिरौली जिले में 11 और कांकेर जिले में 4 नक्सलियों ने पुलिस अधिकारियों के सामने सरेंडर किया। इन सभी पर कुल मिलाकर करोड़ों रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कई नक्सली अब माओवादी विचारधारा से निराश होकर सामान्य जीवन अपनाना चाहते हैं।

Naxal Surrender:-गढ़चिरौली में सरेंडर करने वालों में कई बड़े कैडर शामिल हैं, जो अलग-अलग नक्सली घटनाओं में सक्रिय रहे थे। वहीं कांकेर में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास योजना के तहत तत्काल आर्थिक सहायता भी दी गई। अधिकारियों का कहना है कि सरकार की पुनर्वास नीति और लगातार चल रहे ऑपरेशन के कारण बड़ी संख्या में नक्सली हथियार छोड़ रहे हैं।

पिछले दो वर्षों में केवल छत्तीसगढ़ में ही 2380 से ज्यादा नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जबकि महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में 2022 से अब तक 146 से अधिक कट्टर नक्सलियों ने मुख्यधारा का रास्ता चुना है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लगातार हो रहे सरेंडर से माओवादी संगठन की पकड़ कमजोर पड़ती जा रही है।

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