Political News:-PM मोदी से सुदीप बंद्योपाध्याय की मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल, NDA में एंट्री के संकेत से TMC में मचा बवाल

Political News:-संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले देश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग हुए 20 सांसदों के समूह के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने शनिवार (18 जुलाई) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात ने पश्चिम बंगाल की राजनीति और संसद के आगामी सत्र से पहले नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चाओं को तेज कर दिया है।
बताया जा रहा है कि बागी सांसदों के समूह ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ काम करने की इच्छा भी जताई है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सुदीप बंद्योपाध्याय और उनके सहयोगियों को मानसून सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में भी आमंत्रित किया है।
Political News:-लोकसभा में मिली अलग पहचान
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने TMC से अलग हुए 20 सांसदों को संसद में अलग बैठने की अनुमति दे दी है। हालांकि, इन सांसदों के नए राजनीतिक दल नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) को अलग संसदीय दल के रूप में औपचारिक मान्यता देने पर अंतिम फैसला अभी लंबित है।
Political News:-विपक्ष ने किया विरोध, सर्वदलीय बैठक से वॉकआउट
बागी सांसदों को सर्वदलीय बैठक में बुलाए जाने पर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया। विपक्ष का कहना था कि जब तक NCPI को आधिकारिक मान्यता नहीं मिलती, तब तक उसके प्रतिनिधियों को बैठक में बुलाना उचित नहीं है। विरोध स्वरूप विपक्षी नेताओं ने बैठक से वॉकआउट भी किया, हालांकि कुछ देर बाद वे दोबारा बैठक में शामिल हो गए।
Political News:-बंगाल चुनाव के बाद बढ़ी थी बगावत
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC की हार के बाद पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने अलग होकर NCPI का दामन थाम लिया था। इसके बाद उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से संसद में अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की। बताया जा रहा है कि इस नए समूह में सुदीप बंद्योपाध्याय को फ्लोर लीडर और काकोली घोष दस्तीदार को चीफ व्हिप बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
Political News:-मानसून सत्र से पहले बदले सियासी समीकरण
20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले हुए इस घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। यदि NCPI को संसदीय मान्यता मिलती है और वह NDA का हिस्सा बनती है, तो संसद के भीतर सत्ता पक्ष की स्थिति और मजबूत हो सकती है। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर सभी राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हुई हैं।
