Mission Aagaman:-अब ISRO नहीं… भारत की अंतरिक्ष उड़ान का नया हीरो! 12 जुलाई से इतिहास रचने निकलेगा प्राइवेट रॉकेट ‘विक्रम-1’

Mission Aagaman:-नई दिल्ली। भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र अब एक नए दौर में प्रवेश करने जा रहा है। देश की निजी स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस अपने पहले ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल विक्रम-1 के साथ इतिहास रचने की तैयारी में है। ‘मिशन आगमन’ नाम से होने वाला यह मिशन भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च होगा, जिसकी लॉन्च विंडो 12 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तय की गई है। यह उड़ान श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से होगी।
कंपनी ने जानकारी दी है कि विक्रम-1 को भारत के ऐतिहासिक फर्स्ट लॉन्च पैड (FLP) पर पूरी तरह असेंबल और स्टैक कर दिया गया है। लॉन्च की अंतिम तारीख मौसम, सुरक्षा मंजूरी और अंतिम तकनीकी परीक्षणों के आधार पर तय होगी।
Mission Aagaman:-क्या है विक्रम-1 की खासियत?
करीब सात मंजिला ऊंचा यह मल्टी-स्टेज लॉन्च व्हीकल छोटे उपग्रहों को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करने के लिए विकसित किया गया है। मिशन के दौरान रॉकेट लगभग 450 किलोमीटर की ऊंचाई और 60 डिग्री इन्क्लिनेशन वाली कक्षा में पेलोड पहुंचाने का प्रयास करेगा। पहली उड़ान का मुख्य उद्देश्य रॉकेट के प्रोपल्शन, स्टेज सेपरेशन, गाइडेंस और नेविगेशन सिस्टम की वास्तविक परिस्थितियों में जांच करना है।
Mission Aagaman:-सिर्फ लॉन्च नहीं, भारत के स्पेस सेक्टर की बड़ी छलांग
स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना पूर्व ISRO वैज्ञानिकों ने की थी। इससे पहले कंपनी ने वर्ष 2022 में विक्रम-S सबऑर्बिटल मिशन के जरिए निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में सफलता हासिल की थी। अब विक्रम-1 की सफलता भारत के निजी स्पेस उद्योग को वैश्विक लॉन्च बाजार में नई पहचान दिला सकती है।
Mission Aagaman:-ISRO और IN-SPACe का अहम सहयोग
कंपनी ने इस मिशन को संभव बनाने के लिए ISRO और IN-SPACe के सहयोग की सराहना की है। भारत सरकार द्वारा निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खोलने के बाद यह मिशन उस नीति का सबसे बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मिशन सफल रहता है तो भारत की कमर्शियल स्पेस इंडस्ट्री को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा और देश की वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में हिस्सेदारी भी मजबूत होगी।
भारत की स्पेस यात्रा में यह मिशन केवल एक रॉकेट लॉन्च नहीं, बल्कि निजी अंतरिक्ष उद्योग के नए युग की शुरुआत माना जा रहा है। अब पूरे देश की नजरें ‘मिशन आगमन’ की ऐतिहासिक उड़ान पर टिकी हैं।
