बिलासपुर

High Court:-हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: एक बार Study Leave का लाभ लिया तो दूसरी बार उच्च शिक्षा के लिए NOC मांगना अधिकार नहीं

High Court:-बिलासपुर। शासकीय कर्मचारियों की उच्च शिक्षा और Study Leave को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारी Study Leave या उच्च शिक्षा के लिए छुट्टी को अपना कानूनी अधिकार मानकर दावा नहीं कर सकता। ऐसी अनुमति संबंधित नियमों और शासन की नीति के अधीन होती है।

यह मामला बलिराम कश्यप शासकीय मेडिकल कॉलेज, जगदलपुर में पदस्थ स्टाफ नर्स राजनी गुरु से जुड़ा है। उन्होंने M.Sc. Nursing में प्रवेश के लिए विभाग से NOC और आगे की पढ़ाई के लिए अवकाश की मांग की थी। इससे पहले वह Post Basic B.Sc. Nursing की पढ़ाई के लिए वर्ष 2019 से 2021 तक Study Leave का लाभ ले चुकी थीं। विभाग ने दूसरी बार अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

High Court:-दूसरी बार पढ़ाई के लिए मांगी NOC

राजनी गुरु ने पहले हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि M.Sc. Nursing की पढ़ाई के लिए उन्हें अनुमति दी जाए। बाद में उन्होंने Review Petition के जरिए यह तर्क रखा कि उन्होंने Study Leave नहीं बल्कि Extraordinary Leave के लिए आवेदन किया था।

कोर्ट ने रिकॉर्ड की जांच के बाद पाया कि संबंधित पत्र में मुख्य रूप से M.Sc. Nursing की काउंसलिंग में शामिल होने के लिए NOC की मांग की गई थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल इस आधार पर कि कर्मचारी उच्च शिक्षा हासिल करना चाहता है, उसे छुट्टी या अनुमति देने का दावा नहीं किया जा सकता।

High Court:-कोर्ट ने Rule 42(6) को माना अहम

छत्तीसगढ़ सिविल सर्विसेज (Leave) Rules, 2010 के Rule 42 के तहत Study Leave की व्यवस्था है। नियम में यह भी प्रावधान है कि Study Leave इतनी बार नहीं दी जानी चाहिए कि कर्मचारी अपने नियमित काम से लगातार दूर रहे या उसके कारण विभागीय cadre व्यवस्था प्रभावित हो।

हाई कोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारी Study Leave अथवा किसी उच्च शिक्षा के लिए छुट्टी को मौलिक या कानूनी अधिकार के रूप में दावा नहीं कर सकता। इसका निर्णय संबंधित नियमों, सरकारी नीति और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर किया जाएगा।

High Court:-पहले ही ले चुकी थीं Study Leave

मामले में विभाग की ओर से यह बताया गया था कि याचिकाकर्ता पहले ही वर्ष 2019 से 2021 के बीच Study Leave का लाभ ले चुकी थीं। विभाग ने यह भी उल्लेख किया कि Study Leave की पात्रता का लाभ पहले लिया जा चुका है। कोर्ट ने इस आधार पर विभाग के निर्णय में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

कोर्ट ने यह भी पाया कि याचिकाकर्ता यह साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज पेश नहीं कर सकीं कि समान परिस्थितियों वाले अन्य कर्मचारियों को दूसरी बार ऐसी अनुमति दी गई थी। केवल मौखिक दावे के आधार पर भेदभाव का आरोप स्वीकार नहीं किया जा सकता।

High Court:-Review Petition भी खारिज

मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू ने की। 5 जनवरी 2024 को कोर्ट ने Review Petition No. 66/2023 को खारिज कर दिया और पहले के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

High Court:-क्या है फैसले का मतलब?

इस फैसले का सीधा मतलब यह नहीं है कि हर सरकारी कर्मचारी को जीवनभर में केवल एक ही बार किसी भी परिस्थिति में Study Leave मिल सकती है। बल्कि इस मामले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि Study Leave कोई ऐसा अधिकार नहीं है जिसे कर्मचारी स्वतः मांग सके। इसकी मंजूरी संबंधित सेवा नियमों, शासन की नीति और विभागीय जरूरतों के अनुसार होगी।

यानी उच्च शिक्षा की इच्छा अपनी जगह, लेकिन सरकारी नौकरी में दोबारा Study Leave या NOC मिलना कर्मचारी का स्वतः कानूनी अधिकार नहीं है।

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