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Global Politics:-FATF में भारत की बढ़ी ताकत, पाकिस्तान की बढ़ी टेंशन! ग्रे लिस्ट में वापसी का खतरा फिर मंडराया

Global Politics:-वैश्विक स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद की फंडिंग के खिलाफ भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। इसी कड़ी में भारत को एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विवेक अग्रवाल को पहली बार फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) का उपाध्यक्ष चुना गया है। उनके इस चयन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव और नेतृत्व की स्वीकृति माना जा रहा है।

विवेक अग्रवाल जुलाई 2026 से जून 2027 तक FATF के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। वर्तमान में वे संस्कृति मंत्रालय में सचिव के पद पर कार्यरत हैं। FATF दुनिया भर में मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी संगठनों को मिलने वाली वित्तीय मदद पर नजर रखने वाली सबसे महत्वपूर्ण संस्था मानी जाती है।

Global Politics:-इसी बीच FATF ने अपनी ताजा समीक्षा रिपोर्ट जारी करते हुए नेपाल को बढ़ी हुई निगरानी वाले देशों की सूची (ग्रे लिस्ट) में बनाए रखने का फैसला किया है। FATF की क्षेत्रीय शाखा एशिया/पैसिफिक ग्रुप (APG) ने नेपाल को कई बार सुधार के लिए चेतावनी दी थी, लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं होने के कारण उसे निगरानी सूची में ही रखा गया है।

भारत को FATF में यह अहम जिम्मेदारी मिलने के बाद पाकिस्तान पर भी दबाव बढ़ सकता है। भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर आतंकवाद को वित्तीय सहायता देने और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने में विफल रहने के आरोप लगाता रहा है। ऐसे में पाकिस्तान को दोबारा FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल करने की मांग तेज होने लगी है।

Global Politics:विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि FATF में भारत की बढ़ी भूमिका आतंकवाद और अवैध धन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को और मजबूती प्रदान करेगी।

गौरतलब है कि पाकिस्तान जून 2018 में FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल हुआ था और अक्टूबर 2022 में उसे सूची से बाहर किया गया था। हालांकि भारत का मानना है कि पाकिस्तान अभी भी FATF की कई महत्वपूर्ण शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं कर पाया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी देश को FATF की ग्रे लिस्ट में डाला जाता है तो उसे विदेशी निवेश, अंतरराष्ट्रीय कर्ज और वैश्विक वित्तीय लेनदेन में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। वर्तमान में FATF की ग्रे लिस्ट में 18 देश शामिल हैं, जबकि ईरान, उत्तर कोरिया और म्यांमार ब्लैक लिस्ट में बने हुए हैं।

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