रायपुर

Dr Syama Prasad Mukherjee:-डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती: रायपुर में वन मंत्री केदार कश्यप ने दी श्रद्धांजलि, कहा- राष्ट्रसेवा के उनके आदर्श आज भी हैं प्रेरणास्रोत

Dr Syama Prasad Mukherjee:-भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक, शिक्षाविद और स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर सोमवार को राजधानी रायपुर में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने शारदा चौक स्थित डॉ. मुखर्जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

इस दौरान मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता, शिक्षा और जनसेवा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने देश की एकता और अखंडता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी तथा उनके विचार आज भी युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं।

Dr Syama Prasad Mukherjee:-राष्ट्र की एकता के लिए दिया सर्वोच्च बलिदान

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय राजनीति के उन नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में लागू अलग व्यवस्था का खुलकर विरोध किया। उनका प्रसिद्ध नारा “एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान नहीं चलेंगे” राष्ट्रीय एकता का प्रतीक माना जाता है। वर्ष 1953 में जम्मू-कश्मीर यात्रा के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया था, जहां हिरासत के दौरान 23 जून 1953 को उनका निधन हो गया। उनके योगदान को भारतीय राजनीति और राष्ट्रवाद के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।

Dr Syama Prasad Mukherjee:-इन जनप्रतिनिधियों ने भी दी श्रद्धांजलि

कार्यक्रम में रायपुर उत्तर विधानसभा के विधायक पुरंदर मिश्रा, रमेश सिंह ठाकुर, छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज सहित कई जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने डॉ. मुखर्जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

Dr Syama Prasad Mukherjee:-डॉ. मुखर्जी के बारे में संक्षेप में

विषयजानकारी
जन्म6 जुलाई 1901, कोलकाता
प्रमुख पहचानभारतीय जनसंघ के संस्थापक
शिक्षाशिक्षाविद एवं कोलकाता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति
स्वतंत्र भारत में भूमिकाप्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री
प्रमुख विचारराष्ट्रीय एकता, अखंड भारत, राष्ट्रवाद
निधन23 जून 1953, जम्मू-कश्मीर

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