CGPSC Scam:-CGPSC घोटाले में ED का बड़ा खुलासा: 170 ट्रांजेक्शन में ₹66.64 लाख, पेपर लीक और 3 करोड़ से ज्यादा की कथित वसूली की जांच तेज

CGPSC Scam:-छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी CGPSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच अब एक और अहम मोड़ पर पहुंच गई है। बलरामपुर-रामानुजगंज के अपर कलेक्टर और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तत्कालीन OSD रहे चेतन बोरघरिया की गिरफ्तारी के बाद एजेंसी ने बैंक लेन-देन और डिजिटल साक्ष्यों को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं।
ED के मुताबिक, बोरघरिया के बैंक खाते में संबंधित अवधि के दौरान 170 अलग-अलग लेन-देन के जरिए कुल 66.64 लाख रुपये जमा हुए। एजेंसी अब इन रकम के स्रोत और कथित CGPSC घोटाले से इनके संबंध की जांच कर रही है।
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CGPSC Scam:-3 करोड़ रुपये से ज्यादा की कथित वसूली
ED की जांच CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2020 और 2021 में कथित प्रश्नपत्र लीक, चयन प्रक्रिया में हेरफेर और अवैध धन वसूली से जुड़े मामले पर केंद्रित है।
जांच एजेंसी के अनुसार, उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC-2021 के कुछ अभ्यर्थियों से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन सुनिश्चित कराने के नाम पर कथित तौर पर 3 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई थी। इस रकम के वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है।
ED का आरोप है कि कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले कथित तौर पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था। जांच में रायपुर के एक मैरिज हॉल में प्रश्नपत्र दिखाए जाने और बाद में मुख्य परीक्षा की तैयारी के नाम पर उम्मीदवारों को महासमुंद क्षेत्र में ले जाने जैसे आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है।
CGPSC Scam:-बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच कथित चैट
ED ने बोरघरिया से जुड़े परिसरों में तलाशी के दौरान मोबाइल फोन समेत कई डिजिटल उपकरण जब्त किए थे। एजेंसी का दावा है कि इन उपकरणों से चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच कथित बातचीत सामने आई है।
जांच एजेंसी ने अदालत में बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर दोनों के बीच कथित संपर्क और वित्तीय लेन-देन की बात रखी थी। इसी आधार पर बोरघरिया से पूछताछ की जा रही है।
CGPSC Scam:-Figurecave E-Com कंपनी भी जांच के दायरे में
ED के अनुसार, M/s Figurecave E-Com (OPC) Private Limited के जरिए हुए वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है। एजेंसी का आरोप है कि इस कंपनी का इस्तेमाल कथित तौर पर अपराध से अर्जित रकम को जमा करने और अलग-अलग लेन-देन के जरिए घुमाने के लिए किया गया।
हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अभी अदालत में होना बाकी है। जांच एजेंसी फिलहाल बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे वित्तीय नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
CGPSC Scam:-2020-21 की परीक्षाओं से जुड़ा है मामला
CGPSC का यह मामला 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार, प्रश्नपत्र लीक और चयन प्रक्रिया में हेरफेर से जुड़ा है। ED ने PMLA के तहत इस मामले की जांच शुरू की है, जबकि मूल आपराधिक जांच में CBI भी कार्रवाई कर चुकी है।
CBI की जांच में भी परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और प्रभावशाली लोगों से जुड़े उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने के आरोप सामने आए हैं। इसी व्यापक मामले में CGPSC के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और उत्कर्ष चंद्राकर को भी ED पहले गिरफ्तार कर चुकी है।
CGPSC Scam:-फिलहाल 7 दिन की ED कस्टडी में बोरघरिया
चेतन बोरघरिया को ED ने PMLA के तहत गिरफ्तार किया है। शुरुआती अदालत की कार्रवाई में उन्हें 6 दिन की ED रिमांड मिली थी, जबकि 14 सितंबर की ताजा रिपोर्टों के मुताबिक अब उन्हें 7 दिन की कस्टोडियल रिमांड में लेकर पूछताछ की जा रही है।
ED का कहना है कि जांच अभी जारी है। इसलिए बैंक खातों में मिले लेन-देन, डिजिटल चैट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर सामने आ रहे आरोपों को फिलहाल जांच एजेंसी के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
