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India Bhutan:-भारत ने भूटान को दीं 43 जर्सी गायें, सोशल मीडिया पर चर्चा तेज; जानिए कितना दूध देती है ये नस्ल

India Bhutan:-भारत और भूटान के बीच कृषि और पशुपालन क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भूटान के बूमथांग स्थित नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर में भारत की ओर से 43 शुद्ध नस्ल (Pureline) जर्सी गायें सौंपीं। इन गायों को भूटान के डेयरी कैटल ब्रीडिंग प्रोग्राम में इस्तेमाल किया जाएगा, जिसका उद्देश्य दूध उत्पादन क्षमता बढ़ाना और स्थानीय किसानों को समर्थन देना है।

जयशंकर ने 16 सितंबर को नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर का दौरा किया और 43 जर्सी गायें भूटान को सौंपीं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि इन गायों का इस्तेमाल डेयरी कैटल ब्रीडिंग प्रोग्राम के तहत दूध उत्पादकता बढ़ाने के लिए किया जाएगा। उनके मुताबिक, सेंटर का ब्रीडिंग प्रोग्राम करीब 40,000 किसानों को लाभ पहुंचाएगा।

India Bhutan:-43 गायें सिर्फ दूध उत्पादन के लिए नहीं

यह पहल केवल तत्काल दूध उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इन शुद्ध नस्ल की जर्सी गायों को भूटान के ब्रीडिंग प्रोग्राम का हिस्सा बनाया जाएगा। इसका मतलब है कि बेहतर आनुवंशिक गुणों वाले पशुओं की संख्या बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों में बेहतर दुग्ध उत्पादन क्षमता विकसित करने की कोशिश की जाएगी।

इस तरह के प्रजनन कार्यक्रम का फायदा सीधे 43 गायों तक सीमित नहीं रहता। अच्छी जेनेटिक क्षमता वाले पशुओं से आगे आने वाली संतानों के माध्यम से लंबे समय में डेयरी पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने का प्रयास किया जा सकता है।

भूटान में डेयरी फार्मिंग पहले से ही कई ग्रामीण परिवारों की आजीविका का हिस्सा है। भूटान ब्रॉडकास्टिंग सर्विस की एक हालिया रिपोर्ट में भी जर्सी पशुपालन से जुड़े किसानों की आय और दूध उत्पादन में इसके योगदान का उल्लेख किया गया है।

India Bhutan:-एक जर्सी गाय एक दिन में कितना दूध देती है?

जर्सी गाय को दुनिया की प्रमुख डेयरी नस्लों में गिना जाता है। हालांकि, सोशल मीडिया और कई रिपोर्टों में इसके दूध उत्पादन को लेकर 15 से 30 लीटर प्रतिदिन जैसे आंकड़े बताए जाते हैं, लेकिन इसे हर जर्सी गाय का सामान्य औसत मानना सही नहीं होगा।

वास्तविक दूध उत्पादन कई चीजों पर निर्भर करता है—जैसे गाय की आनुवंशिक क्षमता, आहार, स्वास्थ्य, उम्र, लैक्टेशन का चरण और पशुपालन का प्रबंधन। भारत में जर्सी क्रॉसब्रेड से जुड़े ICAR के एक अध्ययन में Jersey × Sahiwal गायों का औसत दैनिक दूध उत्पादन करीब 10.25 किलोग्राम दर्ज किया गया था।

NDDB के आंकड़ों में भी जर्सी क्रॉसब्रेड पशुओं के दूध और फैट उत्पादन को लेकर अलग-अलग आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं में काफी अंतर दिखाई देता है। इसलिए किसी एक संख्या को हर जर्सी गाय की रोजाना दूध क्षमता बताना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।

क्या 15–30 लीटर दूध संभव है?

हां, उच्च क्षमता वाली और अच्छी तरह प्रबंधित गायों में अधिक दूध उत्पादन संभव हो सकता है, लेकिन 15–30 लीटर को हर सामान्य जर्सी गाय का रोजाना औसत बताना भ्रामक होगा।

यानी किसी जर्सी गाय की वास्तविक दूध क्षमता जानने के लिए सिर्फ नस्ल देखना पर्याप्त नहीं है। उसके जेनेटिक्स, फीड, स्वास्थ्य और डेयरी प्रबंधन को भी देखना जरूरी है।

India Bhutan:-भूटान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

भारत की ओर से दी गई ये 43 गायें भूटान के डेयरी ब्रीडिंग कार्यक्रम को बेहतर आनुवंशिक सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दी गई हैं। इसका लक्ष्य दूध की उत्पादकता बढ़ाना और स्थानीय किसानों को बेहतर पशुधन उपलब्ध कराने में मदद करना है।

भूटान के आधिकारिक विदेश मंत्रालय के संयुक्त प्रेस बयान में भी 43 जर्सी गायों को नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर, बूमथांग को हस्तांतरित किए जाने की पुष्टि की गई है। यह पहल भारत-भूटान के व्यापक विकास सहयोग का हिस्सा है।

India Bhutan:-जयशंकर का भूटान दौरा 16 से 18 सितंबर तक

एक जरूरी तथ्य-सुधार यह भी है कि एस. जयशंकर की भूटान यात्रा 16 से 18 सितंबर 2026 तक रही। भूटान के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, यात्रा के दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं और क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की।

43 जर्सी गायों के अलावा यात्रा के दौरान कई अन्य विकास परियोजनाएं भी शुरू की गईं। इनमें मोंगार में 65-बेड वाले Gyaltsuen Jetsun Pema Mother and Child Hospital का उद्घाटन, पूर्वी भूटान में Jaganathan Bridge का उद्घाटन, 54 इलेक्ट्रिक वाहनों का हस्तांतरण और 500 किलोवाट Lunana Hydropower Project की आधारशिला रखना शामिल है।

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