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BRICS 2026:-50 मिनट की मोदी-जिनपिंग बैठक में रिश्तों का नया संदेश! ‘3 Mutual’ पर जोर, लेकिन सीमा और भरोसे की चुनौती बरकरार

BRICS 2026:-नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच करीब 50 मिनट तक द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं की यह मुलाकात भारत-चीन संबंधों में जारी सतर्क सुधार के बीच बेहद अहम मानी जा रही है।

हालांकि, एक अहम फैक्ट-चेक यह है कि इसे गलवान संघर्ष के बाद दोनों नेताओं की पहली औपचारिक द्विपक्षीय बैठक कहना सही नहीं होगा। मोदी और जिनपिंग इससे पहले 31 अगस्त 2025 को चीन के तियानजिन में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान औपचारिक द्विपक्षीय बैठक कर चुके थे।

BRICS 2026:-‘3 Mutual’ से रिश्तों में भरोसे की कोशिश

भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए Mutual Respect यानी पारस्परिक सम्मान, Mutual Sensitivity यानी पारस्परिक संवेदनशीलता और Mutual Interest यानी पारस्परिक हित के सिद्धांतों पर जोर दिया गया।

लेकिन यहां भी यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ‘3 Mutual’ कोई बिल्कुल नया फॉर्मूला नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी भारत-चीन संबंधों के संदर्भ में इन सिद्धांतों का उल्लेख पहले भी कर चुके हैं। तियानजिन में अगस्त 2025 की बैठक के दौरान दोनों देशों ने इन्हीं आधारों पर रिश्तों को आगे बढ़ाने की बात कही थी। साथ ही यह भी दोहराया गया था कि दोनों देशों के मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए।

BRICS 2026:-सीमा पर शांति बनी रिश्तों की सबसे बड़ी शर्त

भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता भारत-चीन संबंधों के सामान्य विकास की बुनियाद है। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और यही कारण है कि कूटनीतिक बातचीत के बावजूद आपसी भरोसे की चुनौती बनी हुई है।

2024 में सैनिकों के डिसएंगेजमेंट समझौते के बाद संबंधों में कुछ सुधार जरूर देखा गया, लेकिन वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े कई बड़े मुद्दे अब भी संवेदनशील बने हुए हैं।

BRICS 2026:-व्यापार बढ़ा, लेकिन घाटा अब भी भारत की चिंता

बैठक के दौरान आर्थिक सहयोग, बाजार तक पहुंच और व्यापारिक संबंधों को लेकर भी चर्चा अहम रही। भारत लंबे समय से चीन के साथ बड़े व्यापार घाटे और बाजार पहुंच से जुड़ी चुनौतियों को उठाता रहा है।

दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत हुए हैं, लेकिन आर्थिक रिश्तों में असंतुलन भारत के लिए अब भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।

BRICS 2026:-BRICS के मंच से सहयोग का संदेश

मोदी और जिनपिंग की मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब दोनों देश BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों पर एक साथ काम कर रहे हैं। क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं के बीच यह बैठक एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत मानी जा रही है।

हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक भारत-चीन संबंधों में सुधार की प्रक्रिया को अभी पूर्ण सामान्यीकरण नहीं कहा जा सकता। सीमा विवाद, रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और आपसी अविश्वास जैसी चुनौतियां अब भी मौजूद हैं।

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