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Traditional Food:-सिर्फ पारंपरिक खाना नहीं है ‘आयुर्वेद आहार’, FSSAI ने तय किए हैं खास नियम; जानिए क्या है पूरा कॉन्सेप्ट

Traditional Food:-भारतीय खान-पान की परंपरा में भोजन को सिर्फ भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि जीवनशैली और स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। इसी पारंपरिक ज्ञान को नियामक ढांचे से जोड़ते हुए भारत में ‘आयुर्वेद आहार’ (Ayurveda Aahara) के लिए विशेष खाद्य मानक लागू किए गए हैं।

Traditional Food:-आयुर्वेद आहार का मतलब क्या है?

FSSAI के Food Safety and Standards (Ayurveda Aahara) Regulations, 2022 के मुताबिक, आयुर्वेद आहार ऐसे खाद्य पदार्थ हैं, जिन्हें आयुर्वेद की प्रामाणिक पुस्तकों में बताए गए व्यंजनों, सामग्री या प्रक्रियाओं के आधार पर तैयार किया जाता है। इन प्रामाणिक पुस्तकों की सूची नियमों की Schedule A में दी गई है।

इसका मतलब यह है कि हर पारंपरिक, देसी या आयुर्वेद से जुड़ा बताया जाने वाला भोजन अपने आप ‘आयुर्वेद आहार’ नहीं बन जाता। किसी खाद्य उत्पाद को इस नियामक श्रेणी में आने के लिए संबंधित नियमों और निर्धारित आयुर्वेदिक संदर्भों का पालन करना होता है।

Traditional Food:-आहार, परंपरा और मानक—तीनों का मेल

आयुर्वेद आहार की अवधारणा को तीन स्तरों पर समझा जा सकता है।

पहला—आहार।
भोजन और उसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री इसका आधार है। लेकिन नियमों के तहत रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले सामान्य खाद्य पदार्थ जैसे चावल, दाल, आटा और सब्जियां सिर्फ सामान्य रूप में इस श्रेणी में शामिल नहीं हो जाते। नियमों में ऐसे दैनिक उपयोग के खाद्य पदार्थों को तब तक Ayurveda Aahara के दायरे से बाहर रखा गया है, जब तक वे निर्धारित प्रावधानों को पूरा न करें।

दूसरा—परंपरागत ज्ञान।
भारत में भोजन तैयार करने के तरीके, स्थानीय सामग्री और अलग-अलग क्षेत्रों की पारंपरिक रेसिपीज पीढ़ियों से आगे बढ़ती रही हैं। आयुर्वेद आहार का नियामक ढांचा इसी तरह के प्रामाणिक आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्णित रेसिपीज और प्रक्रियाओं को आधार बनाता है।

तीसरा—मानक।
यह सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। आयुर्वेद आहार के निर्माण, श्रेणीकरण और लेबलिंग के लिए FSSAI ने स्पष्ट नियम बनाए हैं। ये नियम खाद्य व्यवसाय संचालकों के लिए एक नियामक ढांचा उपलब्ध कराते हैं।

Traditional Food:-Category A क्या है?

2022 के नियमों में Ayurveda Aahara को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है। Category A में वे उत्पाद आते हैं जो Schedule A में सूचीबद्ध प्रामाणिक आयुर्वेदिक पुस्तकों में दिए गए व्यंजनों के अनुसार तैयार किए जाते हैं।

FSSAI ने जुलाई 2025 में Category A के तहत आने वाले Ayurveda Aahara की सूची उपलब्ध कराई थी। इसके बाद जून 2026 में इसके Part-2 recipes से संबंधित एक और अपडेट भी जारी किया गया।

FSSAI के आधिकारिक डेटाबेस में Category A के तहत कई पारंपरिक तैयारियां दर्ज हैं। इनमें कढ़ी, खिचड़ी, इडली, हर्बल ड्रिंक/काढ़ा जैसी तैयारियों के नाम भी दिखाई देते हैं, हालांकि किसी खास उत्पाद को Ayurveda Aahara मानने के लिए संबंधित निर्धारित रेसिपी और नियमों का पालन जरूरी है।

Traditional Food:-क्या आयुर्वेद आहार बीमारी ठीक करने का दावा कर सकता है?

यहां भी नियम काफी महत्वपूर्ण हैं। Ayurveda Aahara के लेबल, प्रस्तुति और विज्ञापन में यह दावा नहीं किया जा सकता कि उत्पाद किसी मानव रोग को रोकता, उसका इलाज करता या उसे ठीक करता है। इसके अलावा लेबल पर उपयोग का उद्देश्य, लक्षित समूह और अनुशंसित अवधि जैसी जानकारी देने से जुड़े प्रावधान भी हैं।

यानी ‘आयुर्वेद आहार’ को सीधे किसी बीमारी की दवा समझना सही नहीं है। यह एक खाद्य श्रेणी है, जिसकी अपनी नियामक व्यवस्था है।

Traditional Food:-क्यों चर्चा में है आयुर्वेद आहार?

आज जब लोग पारंपरिक खान-पान, स्थानीय खाद्य पदार्थों और भारतीय भोजन पद्धतियों को नए नजरिए से देख रहे हैं, ऐसे समय में Ayurveda Aahara की नियामक व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है।

FSSAI के नियमों का उद्देश्य ऐसे खाद्य पदार्थों के निर्माण और बाजार में उनकी प्रस्तुति के लिए स्पष्ट मानक उपलब्ध कराना है। इससे उपभोक्ताओं को भी यह समझने में मदद मिलती है कि किसी उत्पाद को ‘Ayurveda Aahara’ के रूप में पेश करने के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी है।

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