CGPSC घोटाला:- पूर्व CM के OSD रहे चेतन बोरघरिया गिरफ्तार, ED ने PMLA में लिया हिरासत में

CGPSC घोटाला:-रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार, प्रश्नपत्र लीक और अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने बलरामपुर-रामानुजगंज के अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया को धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी 11 सितंबर 2026 को सामने आई है।
चेतन बोरघरिया पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के OSD रह चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वे वर्ष 2019 से 2022 के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष कार्याधिकारी के पद पर तैनात थे। वर्तमान में वे बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में अपर कलेक्टर के पद पर पदस्थ थे।
CGPSC घोटाला:-2020-21 की परीक्षाओं से जुड़ा है मामला
ED की जांच CGPSC की वर्ष 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार, प्रश्नपत्र लीक और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग एंगल पर केंद्रित है। एजेंसी ने इस मामले में इससे पहले CGPSC के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और उत्कर्ष चंद्राकर समेत अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है।

ED ने 1 सितंबर को CGPSC मामले में रायपुर, दुर्ग और जशपुर में पांच ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान एजेंसी ने कथित तौर पर आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जब्त किए थे। इसी कार्रवाई में उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार किया गया था।
CGPSC घोटाला:-चेतन बोरघरिया के ठिकानों पर भी हुई थी कार्रवाई
1 सितंबर को ED की टीम ने धमतरी स्थित चेतन बोरघरिया के आवास पर भी कार्रवाई की थी। इसके अलावा बलरामपुर में उनसे पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई थी। उस समय ED की ओर से उनकी पूछताछ के कारण को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी।
अब ED ने उन्हें PMLA के तहत गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों के अनुसार उन्हें मामले की विशेष PMLA अदालत में पेश किया जाएगा और जांच एजेंसी आगे की पूछताछ के लिए हिरासत की मांग कर सकती है।
CGPSC घोटाला:-WhatsApp चैट और रिमांड वाले दावे पर सावधानी
आपके दिए मूल कंटेंट में उत्कर्ष चंद्राकर और चेतन बोरघरिया के बीच WhatsApp चैट को 6 दिन की ED रिमांड का आधार बताया गया है। लेकिन उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों और ED की आधिकारिक प्रेस रिलीज में इस चैट तथा छह दिन की रिमांड का स्पष्ट स्वतंत्र सत्यापन नहीं मिला है। इसलिए इसे फिलहाल पुष्ट तथ्य की तरह नहीं लिखना बेहतर होगा।
जांच जैसे संवेदनशील मामले में अदालत के आदेश या ED के आधिकारिक रिमांड दस्तावेज सामने आने के बाद ही WhatsApp चैट और रिमांड की अवधि को निश्चित तथ्य के रूप में प्रकाशित करना उचित होगा।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि चेतन बोरघरिया की गिरफ्तारी CGPSC भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की जांच का नया बड़ा पड़ाव है। आगे की पूछताछ में एजेंसी कथित वित्तीय लेनदेन, संपर्कों और डिजिटल साक्ष्यों की कड़ियों को खंगाल सकती है।
