Bilaspur News:-बिलासपुर शिक्षा विभाग में नियमों पर सवाल, पदोन्नति से युक्तियुक्तकरण तक उठे आरोप

Bilaspur News:-बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला शिक्षा विभाग में पदोन्नति, प्रधान पाठक पदस्थापना और युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि विभागीय स्तर पर शासन और DPI के निर्देशों का पालन नहीं किया गया तथा कुछ मामलों में पहले निरस्त किए जा चुके प्रकरणों पर बाद में दोबारा आदेश जारी किए गए। मामले को लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत किए जाने के बावजूद जांच रिपोर्ट और कार्रवाई की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
Bilaspur News:-हाईकोर्ट तक पहुंचा था प्रधान पाठक पदस्थापना का विवाद
यह विवाद केवल शिकायतों तक सीमित नहीं रहा है। अप्रैल 2025 में बिलासपुर हाईकोर्ट के समक्ष सहायक शिक्षकों की प्रधान पाठक पद पर पदोन्नति के बाद पदस्थापना को लेकर कई याचिकाएं आई थीं। कोर्ट के आदेश में सूरज कुमार सोनी, हलधर प्रसाद साहू, रमेश कुमार साहू, शिप्रा सिंह बघेल और ज्ञानचंद पांडे समेत शिक्षकों की याचिकाओं का उल्लेख है।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि प्रधान पाठक पद पर पदोन्नति के बाद पदस्थापना में विभागीय दिशा-निर्देशों और काउंसलिंग प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उनका दावा था कि कुछ स्कूलों में प्रधान पाठक के पद रिक्त होने के बावजूद उन्हें अन्य स्थानों पर पदस्थ किया गया। हाईकोर्ट ने 16 अप्रैल 2025 के आदेश में संबंधित शिक्षकों को अपनी शिकायत DPI के समक्ष रखने का निर्देश दिया और पदस्थापना आदेश के प्रभाव पर 30 दिनों तक रोक लगाई।
Bilaspur News:-तीन शिक्षकों की पोस्टिंग पर उठे सवाल
बाद की रिपोर्टिंग में हलधर प्रसाद साहू, शिप्रा सिंह बघेल और सूरज कुमार सोनी की पदस्थापना को लेकर भी आरोप सामने आए। एक रिपोर्ट के मुताबिक हलधर साहू को राजेंद्र नगर के शासकीय स्कूल में प्रधान पाठक, शिप्रा बघेल को पौसरा और सूरज कुमार सोनी को भटगांव में पदस्थ किए जाने पर सवाल उठाए गए थे।
हालांकि, इन पदस्थापना संबंधी आरोपों को विभागीय जांच से सिद्ध तथ्य मानना उचित नहीं होगा। उपलब्ध हाईकोर्ट रिकॉर्ड यह जरूर पुष्टि करता है कि संबंधित शिक्षकों ने पदस्थापना प्रक्रिया और दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
Bilaspur News:-युक्तियुक्तकरण में भी कथित उलटफेर का आरोप
अब शिकायतकर्ताओं ने शिक्षा विभाग की युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कुछ प्रकरणों को जिला और संभाग स्तर पर परीक्षण के बाद खारिज किया गया था, लेकिन बाद में उन्हीं मामलों को नए आदेशों के जरिए दोबारा मान्यता दिए जाने की प्रक्रिया अपनाई गई।
शिकायत में संतोषी शर्मा, वंदना लहरे और जानकी चेलयके से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए नियमों के पालन पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि संतोषी शर्मा से संबंधित मामला पहले जिला और संभाग स्तर पर निरस्त हुआ था, लेकिन बाद में फरवरी 2026 में कथित तौर पर नया आदेश जारी किया गया।
इन विशिष्ट आदेशों की प्रमाणित सरकारी प्रतियां सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों में मुझे नहीं मिलीं, इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
Bilaspur News:-संतोषी शर्मा का नाम पहले भी आया था सामने
दिलचस्प बात यह है कि दिसंबर 2025 में युक्तियुक्तकरण के बाद नई पदस्थापना वाली जगह पर ज्वाइन नहीं करने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की खबरों में संतोषी शर्मा का नाम भी शामिल था। रिपोर्ट के मुताबिक बिलासपुर जिले के नौ शिक्षकों को आरोप पत्र जारी किए गए थे और संतोषी शर्मा भी उस सूची में थीं।
इससे यह स्पष्ट होता है कि युक्तियुक्तकरण से जुड़े मामले में उनका नाम पहले भी विभागीय कार्रवाई की खबरों में आ चुका है। हालांकि, वर्तमान शिकायत में लगाए गए अलग-अलग आरोपों की वैधता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
Bilaspur News:-कलेक्टर की अनुमति और जांच रिपोर्ट पर सवाल
शिकायतकर्ताओं ने युक्तियुक्तकरण से जुड़े निर्णयों में जिला स्तरीय प्रक्रिया और कलेक्टर की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जिन मामलों में जिला स्तर पर निर्णय प्रक्रिया आवश्यक थी, उनमें कथित तौर पर नियमों का पालन नहीं हुआ।
शिकायतकर्ताओं का यह भी दावा है कि 27 जून से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज होने के बावजूद बिलासपुर DEO कार्यालय की ओर से राज्य कार्यालय को जांच रिपोर्ट या स्पष्ट जवाब नहीं भेजा गया है।
हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र सरकारी पुष्टि उपलब्ध ऑनलाइन रिकॉर्ड से नहीं हो सकी है। इसलिए यह फिलहाल शिकायतकर्ताओं का आरोप ही है।
Bilaspur News:-अब जांच से खुलेगा पूरा मामला
पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल यही है कि पदोन्नति के बाद प्रधान पाठकों की पदस्थापना में निर्धारित काउंसलिंग और प्राथमिकता संबंधी दिशा-निर्देशों का कितना पालन हुआ और युक्तियुक्तकरण के मामलों में पहले लिए गए निर्णयों में बाद में बदलाव किस प्रक्रिया के तहत किया गया।
हाईकोर्ट के रिकॉर्ड से इतना जरूर स्पष्ट है कि प्रधान पाठक पदस्थापना का विवाद न्यायालय तक पहुंच चुका था और संबंधित शिक्षकों को DPI के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था।
अब यदि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत पर विभागीय जांच होती है, तो पदोन्नति, पदस्थापना और युक्तियुक्तकरण से जुड़े आदेशों की मूल फाइलों की जांच से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
