CG News:-धान खरीदी में बड़ा बदलाव! अब सिर्फ 10% ब्रोकन चावल ही होगा स्वीकार, किसानों और राइस मिलर्स को मिलेगा फायदा

CG News:-छत्तीसगढ़ सरकार ने आगामी धान खरीदी सीजन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मंत्रिमंडलीय उप समिति की बैठक में तय किया गया कि अब सेंट्रल और स्टेट पूल के लिए अधिकतम 10 प्रतिशत ब्रोकन (टूटा) चावल ही स्वीकार किया जाएगा, जबकि पहले 25 प्रतिशत तक ब्रोकन चावल लेने की व्यवस्था थी। इस निर्णय से धान खरीदी और कस्टम मिलिंग व्यवस्था में सुधार होने के साथ-साथ अतिरिक्त धान की नीलामी की जरूरत भी काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बैठक के बाद बताया कि सरकार का उद्देश्य धान खरीदी प्रक्रिया को अधिक सरल, सुगम और प्रभावी बनाना है। इसके साथ ही अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि खरीदी केंद्रों पर बारदाने (बोरी) की किसी भी प्रकार की कमी न हो, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी का सामना न करना पड़े।
CG News:-नीलामी की जरूरत होगी कम
मंत्री ने बताया कि पहले 25 प्रतिशत तक ब्रोकन चावल स्वीकार किए जाने के कारण मिलिंग के बाद बड़ी मात्रा में धान और टूटा चावल बच जाता था, जिसे राज्य सरकार को बाद में नीलाम करना पड़ता था। अब 10 प्रतिशत की सीमा तय होने से धान का बेहतर उपयोग होगा और अतिरिक्त स्टॉक की समस्या कम होगी। यह फैसला केंद्र सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के लिए चावल की गुणवत्ता सुधारने की नई नीति के अनुरूप भी माना जा रहा है।
CG News:-धान खरीदी और मिलिंग की नई रणनीति
बैठक में धान खरीदी, कस्टम मिलिंग, भंडारण और वितरण व्यवस्था को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। सरकार का लक्ष्य है कि पूरी प्रक्रिया समयबद्ध, पारदर्शी और किसानों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाई जाए।
CG News:-देश में सबसे अधिक कीमत पर धान खरीदता है छत्तीसगढ़
बैठक में यह भी बताया गया कि छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां किसानों से सबसे अधिक मूल्य पर धान खरीदा जाता है। राज्य सरकार प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी करती है, जिससे लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलता है।
CG News:-बैठक में ये मंत्री रहे मौजूद
उप मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में मंत्री दयालदास बघेल, टंकराम वर्मा, रामविचार नेताम और श्याम बिहारी जायसवाल शामिल रहे। समिति ने आगामी खरीफ विपणन सत्र को ध्यान में रखते हुए कई प्रशासनिक और तकनीकी पहलुओं पर भी चर्चा की।
