राजनीति

Indian Politics:-NEET पर राहुल गांधी के धरने के बाद सरकार झुकी या बदली रणनीति? संसद में चर्चा को मिली मंजूरी, फिर बढ़ी नई मांग

Indian Politics:-NEET परीक्षा और उससे जुड़े विवादों को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों के समर्थन में कांग्रेस सांसदों और कार्यकर्ताओं के साथ संसद परिसर के निकट धरना दिया। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने राहुल गांधी से मुलाकात कर बातचीत की।

Indian Politics:-सरकार ने संसद में चर्चा का दिया भरोसा

बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने राहुल गांधी से धरना समाप्त करने का अनुरोध किया क्योंकि प्रदर्शन के कारण आम लोगों को असुविधा हो रही थी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार NEET परीक्षा और उससे जुड़े सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा कराने के लिए तैयार होती है, तो वह अपना धरना समाप्त कर देंगे।

मंत्री के अनुसार, शीर्ष नेतृत्व से बातचीत के बाद सरकार ने NEET मामले पर संसद में विस्तृत चर्चा कराने का आश्वासन दिया।

Indian Politics:-चर्चा के बाद सामने आई नई मांग

डॉ. जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि सरकार की ओर से संसद में चर्चा पर सहमति जताने के बाद राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी रख दी। उनके अनुसार, राहुल गांधी ने कहा कि अब उनकी दो प्रमुख मांगें हैं—पहली, NEET मुद्दे पर संसद में चर्चा और दूसरी, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा।

Indian Politics:-सरकार ने राहुल गांधी के रुख पर उठाए सवाल

केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि सरकार NEET से जुड़े सभी विषयों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन कांग्रेस की ओर से अभी तक नियमों के तहत औपचारिक चर्चा का नोटिस नहीं दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष के नेता जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से अपनी घोषित मांगों पर स्पष्टता और निरंतरता की अपेक्षा की जाती है।

Indian Politics:-NEET मुद्दे पर बढ़ी सियासी गर्मी

NEET परीक्षा को लेकर पिछले कई महीनों से विपक्ष सरकार पर लगातार सवाल उठा रहा है। परीक्षा प्रक्रिया, कथित अनियमितताओं और छात्रों की समस्याओं को लेकर संसद से लेकर सड़क तक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। अब सरकार द्वारा संसद में चर्चा के लिए सहमति दिए जाने के बाद यह मुद्दा आगामी संसदीय कार्यवाही में प्रमुख विषय बन सकता है।

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