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Paternity Leave:-पिता को नजरअंदाज करना अन्याय: सुप्रीम कोर्ट ने पितृत्व अवकाश पर कानून बनाने को कहा

Paternity Leave:-देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से बड़ा सुझाव देते हुए कहा है कि पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) को भी एक जरूरी सामाजिक सुरक्षा सुविधा के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। कोर्ट ने साफ कहा कि बच्चे की परवरिश केवल मां की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि माता-पिता दोनों की साझा जिम्मेदारी है।


Paternity Leave:-क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

  • मां की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन पिता को नजरअंदाज करना गलत है
  • बच्चे के भावनात्मक, मानसिक और शारीरिक विकास में पिता की भूमिका भी अहम
  • केंद्र सरकार से पितृत्व अवकाश पर कानून बनाने पर विचार करने को कहा
  • परवरिश को साझा जिम्मेदारी बताया

Paternity Leave:-मामले की मुख्य बातें

मुद्दाकोर्ट का फैसला
पितृत्व अवकाशकानून बनाने की सिफारिश
परवरिश की जिम्मेदारीमाता-पिता दोनों की
गोद लेने का मामला3 महीने की शर्त हटाई
मातृत्व अवकाशगोद लेने वाली मां को 12 सप्ताह मिलेगा

Paternity Leave:-गोद लेने वाले मामले में बड़ा फैसला

यह टिप्पणी उस समय आई जब कोर्ट ने Maternity Benefit Act, 1961 की एक धारा को खारिज कर दिया।

पहले क्या नियम था?

  • अगर बच्चा 3 महीने से कम उम्र का हो तभी गोद लेने वाली मां को मातृत्व अवकाश मिलता था

Paternity Leave:-अब क्या होगा?

  • हर गोद लेने वाली मां को 12 हफ्ते (12 weeks) का मातृत्व अवकाश मिलेगा
  • उम्र की शर्त को खत्म कर दिया गया

Paternity Leave:-कोर्ट की सोच: परिवार में बराबरी जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा:

  • बच्चे की परवरिश सिर्फ मां का काम नहीं
  • पिता भी उतनी ही जिम्मेदारी निभाते हैं
  • दोनों की भागीदारी से ही बच्चे का सही विकास संभव है

Paternity Leave:-आगे क्या हो सकता है?

अगर केंद्र सरकार कोर्ट की सलाह मानती है, तो:

  • भारत में पितृत्व अवकाश कानून लागू हो सकता है
  • कामकाजी पिताओं को भी बच्चे के साथ समय बिताने का अधिकार मिलेगा
  • परिवार और समाज में जेंडर इक्वालिटी को बढ़ावा मिलेगा

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