Liquor Scam:-छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में बड़ा खुलासा! 27 हजार पन्नों का 10वां चालान पेश, 20 लोग और 22 कंपनियां रडार पर

Liquor Scam:-छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाले में ACB/EOW ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने 14 अक्टूबर को रायपुर स्थित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत में करीब 27 हजार पन्नों का दसवां चालान पेश किया। इस चालान में 20 व्यक्तियों और 22 फर्मों एवं कंपनियों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में अवैध शराब उत्पादन और बिक्री से लेकर कमीशन वसूली, हवाला के जरिए रकम के लेन-देन और कथित अवैध कमाई को संपत्तियों में निवेश करने तक के साक्ष्य सामने आए हैं।
यह मामला 3,200 करोड़ रुपये से अधिक के कथित शराब घोटाले से जुड़ा है। चालान में रामगोपाल अग्रवाल, यश टुटेजा और अख्तर ढेबर सहित कई लोगों के नाम शामिल हैं। वहीं, छत्तीसगढ़ डिस्टिलरी लिमिटेड, वेलकम डिस्टिलरी, भाटिया वाइन्स मर्चेन्ट्स और प्रिज्म होलोग्राफी जैसी कंपनियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई गई है।
Liquor Scam:-कैसे चलता था कथित शराब घोटाले का पूरा नेटवर्क?
ACB/EOW की जांच के मुताबिक, शराब की आपूर्ति और बिक्री से जुड़ी सरकारी व्यवस्था का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। जांच एजेंसी ने शराब के अवैध उत्पादन, परिवहन और बिक्री के लिए एक व्यवस्थित नेटवर्क संचालित होने का आरोप लगाया है।
जांच के अनुसार, डिस्टिलरियों में नियमित उत्पादन के अलावा अतिरिक्त देशी शराब तैयार कराई जाती थी। इसे कथित तौर पर ‘पार्ट-B’ शराब कहा गया। इस शराब की बोतलों पर डुप्लीकेट होलोग्राम लगाए जाने और फर्जी या डुप्लीकेट परिवहन परमिट के माध्यम से सरकारी शराब दुकानों तक पहुंचाने के आरोप हैं।
एजेंसी का दावा है कि इस शराब की बिक्री सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं की जाती थी। इससे प्राप्त नकद रकम को नियमित बिक्री से अलग रखा जाता था और कथित सिंडिकेट तक पहुंचाया जाता था।
3,076 करोड़ रुपये से अधिक की रकम का हिसाब
चालान में शामिल आंकड़ों के मुताबिक, 15 जिलों में कथित तौर पर 60,50,950 पेटी पार्ट-B शराब की बिक्री का सकल मूल्य लगभग 2,174.67 करोड़ रुपये आंका गया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, देशी शराब की वैध आपूर्ति पर पार्ट-A कमीशन के रूप में लगभग 319.27 करोड़ रुपये और बाजार हिस्सेदारी तथा सप्लाई एरिया के नाम पर पार्ट-C कमीशन के रूप में करीब 52 करोड़ रुपये की राशि सामने आई है।
वहीं, विदेशी शराब से संबंधित विभिन्न मदों में लगभग 281.89 करोड़ रुपये का कमीशन और FL-10A लाइसेंसधारी कंपनियों का करीब 248.51 करोड़ रुपये का सकल लाभ बताया गया है।
इन मदों को मिलाकर कुल राशि लगभग 3,076.34 करोड़ रुपये बैठती है। इसमें कथित अवैध शराब की बिक्री का सकल मूल्य, कमीशन और लाइसेंसधारी कंपनियों का सकल लाभ शामिल है। इसलिए इसे सीधे सरकारी खजाने को हुए नुकसान की राशि मानना उचित नहीं होगा।
Liquor Scam:-रामगोपाल अग्रवाल पर 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम से जुड़ा आरोप
चालान में रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, पार्टी फंड के नाम पर 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की नकद रकम प्राप्त करने, उसका हिसाब रखने और आगे भेजने से जुड़े साक्ष्य मिले हैं।
यश टुटेजा के संबंध में एजेंसी ने कथित अवैध रकम को पारिवारिक खातों और संपत्तियों से जोड़ने तथा जमीन के लेन-देन के जरिए उसके स्रोत को वैध दिखाने की भूमिका का उल्लेख किया है।
वहीं, अख्तर ढेबर पर संबंधित फर्मों और कंपनियों के खातों में रकम को अनसिक्योर्ड लोन के रूप में प्राप्त कर जमीन और दूसरी अचल संपत्तियों में निवेश करने का आरोप है। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
Liquor Scam:-डुप्लीकेट होलोग्राम, बोतलों की सप्लाई और कमीशन का आरोप
जांच एजेंसी ने होलोग्राम, खाली बोतलों और शराब के परिवहन से जुड़ी कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
चालान के मुताबिक, प्रिज्म होलोग्राफी एंड सिक्योरिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से कथित तौर पर डुप्लीकेट होलोग्राम तैयार कराए गए, जिनका उपयोग पार्ट-B शराब की बोतलों पर किया गया।
इसी तरह, कुछ बोतल आपूर्तिकर्ताओं पर अतिरिक्त खाली बोतलें उपलब्ध कराने और उनकी लागत को नियमित आपूर्ति के बिलों में बढ़ोतरी करके समायोजित करने का आरोप है। परिवहन से जुड़ी गतिविधियों में भी कथित अवैध खर्च को अधिक बिलिंग के जरिए समायोजित किए जाने की बात कही गई है।
विदेशी शराब की आपूर्ति में FL-10A लाइसेंसधारी कंपनियों के जरिए कमीशन और लाभ के बंटवारे की व्यवस्था होने का भी दावा किया गया है।
Liquor Scam:-मैनपावर एजेंसियों के जरिए भी कथित गड़बड़ी
सरकारी शराब दुकानों में सुपरवाइजर, सेल्समैन और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति करने वाली मैनपावर एजेंसियों की भूमिका भी चालान में शामिल है।
ACB/EOW के अनुसार, दुकानों पर पहुंचने वाली कथित पार्ट-B शराब को बिना स्कैन किए उतारने, नियमित स्टॉक से अलग रखने और उसकी बिक्री को दैनिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं करने का तरीका अपनाया जाता था। इससे प्राप्त नकदी को अलग रखकर कथित सिंडिकेट तक पहुंचाने के आरोप हैं।
जांच एजेंसी ने यह भी बताया है कि मैनपावर एजेंसियों को ओवरटाइम, बोनस, चार अतिरिक्त दिनों के भुगतान और सर्विस चार्ज के मद में लगभग 182.98 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान मिला। कर्मचारियों के बयानों के अनुसार, उन्हें कुछ भुगतान नहीं मिले थे।
एजेंसी का दावा है कि इस रकम में से लगभग 62.99 करोड़ रुपये नकद और बैंकिंग माध्यमों से कथित तौर पर कमीशन के रूप में दिए गए। इस पहलू को लेकर भी दस्तावेज और कर्मचारियों के बयान चालान में शामिल किए गए हैं।
हवाला के जरिए दूसरे शहरों और विदेश तक रकम पहुंचाने का आरोप
चालान में कथित अवैध कमाई को अलग-अलग शहरों तक पहुंचाने के लिए हवाला और आंगड़िया नेटवर्क के इस्तेमाल का भी उल्लेख है।
जांच एजेंसी के अनुसार, नकद रकम को दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, राजकोट और अन्य शहरों तक पहुंचाया जाता था। कुछ लेन-देन में दुबई तक रकम उपलब्ध कराने का भी आरोप है।
इसके बाद कथित तौर पर शेल कंपनियों और अन्य व्यावसायिक संस्थाओं के बैंक खातों के जरिए रकम को अनसिक्योर्ड लोन या कारोबारी लेन-देन के रूप में दिखाया गया। इन पैसों का इस्तेमाल जमीन, अचल संपत्तियों और कारोबार में निवेश के लिए किए जाने का दावा किया गया है।
एजेंसी ने बैंक खातों, संपत्ति की रजिस्ट्रियों, मोबाइल से प्राप्त एक्सेल रिकॉर्ड, चैट, कॉल डिटेल और गवाहों के बयानों को जांच का हिस्सा बताया है।
Liquor Scam:-कोविड लॉकडाउन के दौरान भी शराब की बिक्री का आरोप
चालान में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान शराब के कथित अवैध परिवहन और बिक्री का मामला भी शामिल है। जांच एजेंसी के मुताबिक, सिलतरा स्थित एन.व्ही. डिस्टिलरी में नियमित संचालन बंद होने के बाद भी पहले से रखी शराब की निकासी कर उसे कुछ होटल और बार तक पहुंचाया गया।
एजेंसी ने मजदूरों और वाहनों की व्यवस्था के जरिए शराब पहुंचाने तथा बिक्री से मिली रकम के बंटवारे के आरोपों का उल्लेख किया है। मई 2020 में नियमित प्रबंधन की जानकारी और अनुमति के बिना नए उत्पादन से संबंधित विवरण भी जांच में शामिल किए गए हैं।
Liquor Scam:-फरार आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई
ACB/EOW के मुताबिक, रामगोपाल अग्रवाल न्यायिक अभिरक्षा में हैं। बीआर लोहिया और कुमार भाई ठक्कर उर्फ खंजन ठक्कर के खिलाफ फरारी में चालान पेश किए जाने की जानकारी दी गई है। एजेंसी ने बीआर लोहिया के विरुद्ध लुकआउट सर्कुलर और आगे की कार्रवाई के लिए इंटरपोल के सहयोग का भी उल्लेख किया है।
मामले में भारतीय दंड संहिता, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम के तहत अभियोजन की कार्रवाई की जा रही है। अन्य संबंधित व्यक्तियों, वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों को लेकर विवेचना जारी है।
फिलहाल, 27 हजार पन्नों का यह चालान कथित शराब घोटाले की जांच में एक अहम कदम है। इसमें कई व्यक्तियों और कंपनियों की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत द्वारा साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर लिया जाएगा।
