Lashkar E Taiba:-आतंक की दुनिया में भी ‘वंशवाद’! लश्कर-ए-तैयबा की कमान हाफिज सईद से बेटे तल्हा सईद के हाथों में, ISI ने किया बड़ा फेरबदल

Lashkar E Taiba:-भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद गंभीर झटके झेल चुके प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संगठन के संस्थापक और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकी हाफिज सईद ने ऑपरेशनल जिम्मेदारी अपने बेटे तल्हा सईद को सौंप दी है, जबकि स्वयं अब संगठन के वैचारिक मार्गदर्शक (मेंटर) की भूमिका निभाएगा।
बताया जा रहा है कि कई सप्ताह तक चली अंदरूनी चर्चाओं के बाद यह फैसला लिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने भी इस बदलाव को समर्थन दिया है ताकि संगठन को नए सिरे से खड़ा किया जा सके।
Lashkar E Taiba:-तीन हिस्सों में बांटा गया संगठन
रिपोर्ट्स के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा को पाकिस्तान के भीतर तीन क्षेत्रीय कमांड में पुनर्गठित किया गया है—
| क्षेत्र | नई कमांड |
|---|---|
| बलूचिस्तान | क्षेत्रीय विंग |
| खैबर पख्तूनख्वा | क्षेत्रीय विंग |
| पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) | क्षेत्रीय विंग |
हालांकि, जम्मू-कश्मीर और भारत के खिलाफ कथित आतंकी गतिविधियों के लिए शीर्ष कमान पहले की तरह केंद्रीकृत रहने की बात कही गई है।
Lashkar E Taiba:-तल्हा बने ऑपरेशनल बॉस, हाफिज रहेंगे ‘मेंटर’
सूत्रों के अनुसार, तल्हा सईद संगठन के दैनिक संचालन और रणनीतिक फैसलों की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि हाफिज सईद संगठन के वैचारिक नेतृत्व और भर्ती अभियान में प्रभाव बनाए रखने की भूमिका निभाएगा।
Lashkar E Taiba:-स्थानीय भर्ती पर रहेगा फोकस
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नए ढांचे का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर नेटवर्क मजबूत करना और भर्ती बढ़ाना है। इससे संगठन अपने प्रभाव को दोबारा स्थापित करने की कोशिश कर सकता है।
Lashkar E Taiba:-पाकिस्तान की आंतरिक चुनौतियों से भी जुड़ी रणनीति
भारतीय सुरक्षा सूत्रों के हवाले से कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पाकिस्तान की सेना, TTP और BLA जैसे उग्रवादी संगठनों से बढ़ती चुनौतियों के बीच लश्कर के नेटवर्क का उपयोग अपनी आंतरिक सुरक्षा रणनीति में भी करना चाहती है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
Lashkar E Taiba:-क्या बदलेंगे हालात?
विशेषज्ञों का मानना है कि नेतृत्व परिवर्तन और पुनर्गठन से संगठन अपने कमजोर पड़े ढांचे को मजबूत करने की कोशिश कर सकता है। हालांकि, भारत की सुरक्षा एजेंसियां इस घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और सीमा पार आतंकी गतिविधियों को लेकर सतर्क हैं।
