छत्तीसगढ़

Jhiram Ghati Attack:-झीरम घाटी का वो सच, जिस पर 13 साल बाद भी सवाल बरकरार! हाईकोर्ट में अब क्या होगा?

Jhiram Ghati Attack:-छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले से जुड़े न्यायिक जांच आयोग का मामला एक बार फिर चर्चा में है। सालों से कानूनी प्रक्रिया में उलझे इस मामले में अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 21 दिसंबर 2026 को अंतिम सुनवाई करने का फैसला किया है। फिलहाल दूसरे जांच आयोग के कामकाज पर लगी रोक बरकरार रहेगी।

Jhiram Ghati Attack:-आखिर क्यों हाईकोर्ट पहुंचा मामला?

झीरम घाटी नक्सली हमले की जांच के लिए गठित दूसरे न्यायिक आयोग को लेकर विवाद लंबे समय से चल रहा है। भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने नए आयोग के गठन को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनका तर्क है कि पहले गठित आयोग अपनी जांच पूरी कर चुका था और रिपोर्ट भी सौंप दी गई थी। ऐसे में दूसरा आयोग बनाने की आवश्यकता नहीं थी।

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मई 2022 में नए आयोग की जांच प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। यह अंतरिम रोक अब भी प्रभावी है।

Jhiram Ghati Attack:-पहले आयोग की रिपोर्ट के बाद क्यों बना दूसरा आयोग?

झीरम घाटी हमले की जांच के लिए पहले जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग बनाया गया था। बाद में जस्टिस मिश्रा के आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद आयोग की स्थिति में बदलाव आया।

पहले आयोग ने अपनी रिपोर्ट तत्कालीन राज्यपाल को सौंप दी थी। हालांकि, तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया और जांच के लिए नए आयोग का गठन किया।

इसके तहत सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस सतीश अग्निहोत्री और जस्टिस मिनहाजुद्दीन को शामिल किया गया। लेकिन नया आयोग जांच आगे बढ़ाता, उससे पहले ही इसके गठन को अदालत में चुनौती दे दी गई।

Jhiram Ghati Attack:-कोर्ट में दोनों पक्षों ने क्या दलील दी?

सुनवाई के दौरान मामले में हस्तक्षेप करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि दूसरे आयोग का गठन उन अतिरिक्त जांच बिंदुओं के लिए किया गया था, जो पहले आयोग की जांच में शामिल नहीं थे।

उन्होंने तर्क दिया कि राज्य सरकार को नए जांच बिंदुओं या आयोग में रिक्ति जैसी परिस्थितियों में नया आयोग गठित करने का अधिकार है। इसलिए धरमलाल कौशिक की याचिका खारिज की जानी चाहिए और आयोग की जांच पर लगी रोक भी हटाई जानी चाहिए।

वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता की अनुपलब्धता का हवाला देते हुए सुनवाई स्थगित करने की मांग की गई। राज्य सरकार के अधिवक्ता ने भी आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा।

Jhiram Ghati Attack:-21 दिसंबर को होगी अहम सुनवाई

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने माना कि इस प्रकरण में गंभीर कानूनी प्रश्न शामिल हैं, जिन पर विस्तृत सुनवाई जरूरी है। अदालत ने हस्तक्षेप याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को भी अपनी दलील रखने की अनुमति दी है।

अब मामले की अंतिम सुनवाई 21 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है। तब तक दूसरे न्यायिक जांच आयोग पर लगी रोक जारी रहेगी।

Jhiram Ghati Attack:-क्या है झीरम घाटी हमला?

25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल सहित कई नेताओं और सुरक्षाकर्मियों की जान गई थी।

इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हमले की जांच, सुरक्षा व्यवस्था और साजिश से जुड़े सवाल वर्षों से राजनीतिक तथा कानूनी बहस का विषय बने हुए हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दूसरे जांच आयोग को आगे जांच करने की अनुमति मिलेगी या पहले आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी? इसका जवाब हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई और उसके बाद आने वाले आदेश से स्पष्ट होगा।

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