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Jantar Mantar Protest 2026:-जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को आखिर क्या हुआ था? सुप्रीम कोर्ट में उठे सवाल, अब एक महीने में सामने आएगी रिपोर्ट

Jantar Mantar Protest 2026:- दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा और पुलिस कार्रवाई का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने ऐसी जानकारी आई, जिसने जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती की जांच के लिए बनाई गई उच्चस्तरीय समिति को अब तक बेहद कम शिकायतें मिली हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने समिति को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए एक महीने का अतिरिक्त समय दिया है।

Jantar Mantar Protest 2026:- सुप्रीम कोर्ट ने जांच समिति को दिया बड़ा निर्देश

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने जांच की प्रगति पर विचार किया। अदालत को बताया गया कि पर्याप्त शिकायतें और साक्ष्य उपलब्ध नहीं होने के कारण समिति अभी किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है।

इसके बाद शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि मामले से जुड़ी लंबित याचिकाएं, वीडियो फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जांच समिति को उपलब्ध कराए जाएं, ताकि घटनाक्रम की निष्पक्ष और प्रभावी जांच की जा सके।

Jantar Mantar Protest 2026:- पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति कर रही जांच

छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई कथित हिंसा और पुलिस की भूमिका की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति बनाई है।

समिति में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश शलिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व डीजीपी एल.आर. बिश्नोई शामिल हैं।

समिति को प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं, कथित पुलिस ज्यादती और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

Jantar Mantar Protest 2026:- 149 अखबारों में नोटिस, फिर भी शिकायतें कम

जांच समिति ने अधिक से अधिक पीड़ितों और प्रत्यक्षदर्शियों तक पहुंचने के लिए कई प्रयास किए। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 13 अक्टूबर को एक ऑनलाइन शिकायत पोर्टल शुरू किया गया, जहां बिना नाम या पहचान संबंधी जानकारी दिए भी शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध कराई गई।

इसके अलावा देशभर के 149 समाचार पत्रों में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित किए गए। ईमेल, डाक और समिति के कार्यालय में सीधे शिकायत देने की व्यवस्था भी की गई।

17 अक्टूबर को प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई और 21 अक्टूबर को दोबारा शिकायतें आमंत्रित की गईं। इसके बावजूद समिति को अपेक्षा के अनुरूप शिकायतें प्राप्त नहीं हुईं।

Jantar Mantar Protest 2026:- पैलेट गन के इस्तेमाल पर भी उठे गंभीर सवाल

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि हिंसा से जुड़े मामलों में अब तक एक भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

उन्होंने यह भी पूछा कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन इस्तेमाल करने की अनुमति किसने दी थी। उनका कहना था कि समिति को उपलब्ध कराई गई जानकारी में केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।

हालांकि, ये याचिकाकर्ता पक्ष की दलीलें हैं। पुलिस कार्रवाई की वैधता और कथित ज्यादती के संबंध में समिति का अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।

Jantar Mantar Protest 2026:- पीड़ितों की संख्या को लेकर भी बहस

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट में पहले से जमा वीडियो और अन्य साक्ष्य समिति को भेजे जा सकते हैं, ताकि प्रत्येक पीड़ित को अलग से पेश होने की आवश्यकता न पड़े।

वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तीसरे पक्ष द्वारा किए जाने वाले दावों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जनहित याचिका दायर करने वाले लोग जितने पीड़ितों का दावा करते हैं, वास्तविक संख्या उससे अलग हो सकती है। इसलिए शिकायतों और साक्ष्यों का सत्यापन जरूरी है।

Jantar Mantar Protest 2026:- अब अगली रिपोर्ट पर टिकी नजर

सुप्रीम कोर्ट की ओर से अतिरिक्त समय दिए जाने के बाद जांच समिति के सामने शिकायतों, वीडियो फुटेज और अन्य दस्तावेजों की समीक्षा करने का अवसर होगा।

अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि 20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन के दौरान वास्तव में क्या हुआ था, कथित हिंसा के लिए कौन जिम्मेदार था और पुलिस कार्रवाई निर्धारित नियमों के अनुरूप थी या नहीं। इन सवालों पर स्थिति जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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