छत्तीसगढ़

Dr Syama Prasad Mukherjee:-“एक देश-एक विधान” के प्रणेता को नमन: बलिदान दिवस पर मुख्यमंत्री साय ने याद किए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचार

Dr Syama Prasad Mukherjee:-देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीक माने जाने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया। राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने डॉ. मुखर्जी के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि राष्ट्रवादी चिंतन के ऐसे स्तंभ थे जिन्होंने भारत की एकता और सांस्कृतिक अस्मिता को मजबूत करने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानने वाले डॉ. मुखर्जी के विचार आज भी करोड़ों भारतीयों को प्रेरणा देते हैं।

Dr Syama Prasad Mukherjee:-डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय राजनीति के उन प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने स्वतंत्र भारत की नीतियों और वैचारिक दिशा को प्रभावित किया। वे स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री रहे और बाद में भारतीय जनसंघ की स्थापना कर वैकल्पिक राजनीतिक विचारधारा को मजबूत आधार प्रदान किया। जम्मू-कश्मीर में अलग संविधान और अलग व्यवस्था के विरोध में उनके आंदोलन को भारतीय राजनीति के महत्वपूर्ण अध्यायों में माना जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए जो संघर्ष किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा। उन्होंने कहा कि विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण के लक्ष्य को प्राप्त करने में डॉ. मुखर्जी के आदर्श और सिद्धांत आज भी मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए समाज को डॉ. मुखर्जी के विचारों को आत्मसात करना होगा। उनके त्याग, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति की भावना भारतीय लोकतंत्र की अमूल्य धरोहर है।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, राम गर्ग सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे और सभी ने डॉ. मुखर्जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान दिवस देशभर में राष्ट्र सेवा, राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनके योगदान को स्मरण करने के अवसर के रूप में मनाया जाता है। उनके विचार आज भी राष्ट्रहित और सांस्कृतिक चेतना की चर्चा में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

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