Delhi High Court:-AI पोस्ट पर घिरे CJP नेता, गौरव भाटिया केस में दिल्ली HC की सख्त नसीहत; 24 घंटे में पोस्ट हटाने पर राजी

Delhi High Court:-भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया की ओर से दायर ₹2 करोड़ के मानहानि मामले में गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामला सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक कथित AI-जनरेटेड ग्राफिक से जुड़ा है, जिसमें भाटिया की तस्वीर के साथ ऐसे बयान जोड़े गए थे, जिन्हें उन्होंने कभी नहीं दिया। सुनवाई के दौरान Cockroach Janta Party (CJP) से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका ने विवादित पोस्ट हटाने पर सहमति जताई। दोनों ने 24 घंटे के भीतर पोस्ट हटाने की बात कही।
Delhi High Court:-कोर्ट ने कहा- बिना सत्यापन किसी पर हमला करना सही नहीं
जस्टिस तुषार राव गेडेला की अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि विरोध और असहमति जताने के कई तरीके हो सकते हैं, लेकिन बिना तथ्य की पुष्टि किए किसी पर इस तरह हमला करना उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यदि CJP से जुड़े दोनों नेता खुद पोस्ट हटाने को तैयार हैं तो अदालत की ओर से अलग से तत्काल टेकडाउन आदेश जारी करने की जरूरत नहीं है।
कोर्ट ने दोनों नेताओं को यह भी नसीहत दी कि अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन अभिव्यक्ति का तरीका अधिक जिम्मेदार और स्पष्ट होना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि वे युवा हैं और उन्हें अपना समय मुकदमेबाजी में लगाने के बजाय अपने दूसरे काम और पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए।
Delhi High Court:-क्या था AI पोस्ट का विवाद?
यह विवाद 5 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किए गए एक ग्राफिक से शुरू हुआ। गौरव भाटिया की याचिका के मुताबिक, पोस्ट में उनकी तस्वीर के साथ स्वातंत्र्य भारद्वाज को लेकर कथित तौर पर “दिमागी नक्सली” और “जातिवादी” जैसे शब्दों वाला बयान जोड़ा गया था।
भाटिया का दावा है कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था और AI की मदद से तैयार किए गए ग्राफिक को इस तरह पेश किया गया, जिससे लोगों को यह गलतफहमी हो कि उक्त बयान उन्हीं का है। उनके मुताबिक, पोस्ट से उनकी सार्वजनिक छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
Delhi High Court:-पोस्ट को 1.32 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा
भाटिया की ओर से दाखिल मानहानि याचिका में दावा किया गया है कि विवादित पोस्ट को 1.32 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा। याचिका में आरोप लगाया गया कि सौरव दास ने सामग्री पोस्ट की, जबकि आशुतोष रांका ने उसे आगे शेयर किया। इसी आधार पर भाटिया ने ₹2 करोड़ के हर्जाने के साथ-साथ विवादित सामग्री को हटाने और भविष्य में उसके दोबारा प्रसार पर रोक लगाने की मांग की है।
Delhi High Court:-सौरव दास ने कहा- पोस्ट पहले ही डिलीट कर दी
सुनवाई के दौरान सौरव दास के वकील ने अदालत को बताया कि संबंधित पोस्ट पहले ही डिलीट की जा चुकी है। हालांकि, कोर्ट ने ध्यान दिलाया कि एक अन्य पोस्ट भी मौजूद थी। इसके बाद अदालत ने दोनों नेताओं के वकीलों से निर्देश लेने को कहा कि बाकी विवादित सामग्री भी हटाई जाएगी या नहीं।
बाद में सौरव दास और आशुतोष रांका ने 24 घंटे के भीतर पोस्ट हटाने पर सहमति जताई। महत्वपूर्ण बात यह है कि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह सहमति अदालत के मौखिक सुझाव के बाद बनी; इसे फिलहाल अंतिम मानहानि फैसले के रूप में नहीं देखा जा सकता।
Delhi High Court:-अभिजीत दीपके को लेकर भी कोर्ट ने उठाया सवाल
सुनवाई में CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को मामले में पक्षकार बनाए जाने पर भी कोर्ट ने सवाल उठाया। जस्टिस गेडेला ने पूछा कि भाटिया की आपत्तिजनक बताई गई पोस्ट में दीपके की क्या भूमिका है।
दीपके के वकील ने अदालत को बताया कि उनके खिलाफ ऐसी कोई पोस्ट नहीं है और विवादित सामग्री मुख्य रूप से सौरव दास और आशुतोष रांका से जुड़ी है। कोर्ट ने भी पहली नजर में माना कि दीपके के खिलाफ संबंधित पोस्ट को लेकर स्पष्ट आरोप नजर नहीं आता।
Delhi High Court:-मामला अभी खत्म नहीं हुआ
गौरव भाटिया ने CJP और उसके नेताओं के खिलाफ ₹2 करोड़ की मानहानि याचिका दायर की है। कोर्ट में पोस्ट हटाने को लेकर बनी सहमति इस विवाद का अंतिम न्यायिक फैसला नहीं है। सुनवाई के दौरान अदालत ने सोशल मीडिया पर किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आरोप या सामग्री साझा करने से पहले तथ्य की पुष्टि करने की जरूरत पर जोर दिया।
यह मामला AI से तैयार या बदली गई सोशल मीडिया सामग्री के जरिए किसी सार्वजनिक व्यक्ति के नाम से कथित रूप से फर्जी बयान प्रसारित किए जाने और उसके कानूनी परिणामों को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
