छत्तीसगढ़

CG News:-पुरानी कुर्सियों का हिसाब अधूरा, नई खरीदी की तैयारी! खैरागढ़ नपा में फिर उठे सवाल

CG News:-खैरागढ़ नगर पालिका परिषद में प्रस्तावित नई खरीदी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। अलग-अलग वार्डों के लिए RCC और स्टील कुर्सियां, डेस्क-बेंच तथा LED लाइट खरीदने की तैयारी की चर्चा के बीच स्थानीय स्तर पर सबसे बड़ा सवाल पुरानी खरीदी गई सामग्री के हिसाब और उसकी वर्तमान स्थिति को लेकर उठ रहा है।

प्रस्तावित खरीदी में वार्डों के लिए डेस्क-बेंच, LED लाइट और RCC/स्टील कुर्सियों जैसी सामग्री शामिल होने की बात सामने आई है। ऐसे में नागरिकों और राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि पहले खरीदी गई कुर्सियां और अन्य सामग्री वर्तमान में कहां हैं, कितनी उपयोग में हैं और नई खरीदी की आवश्यकता किस आधार पर तय की गई है?

खैरागढ़ नगर पालिका से जुड़े खरीद मामलों को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है—करीब 37 लाख रुपये से अधिक की जिम/खेल सामग्री खरीदी में अनियमितताओं के मामले में तत्कालीन अधिकारी कुलदीप झा के खिलाफ कार्रवाई हुई थी, लेकिन यह मामला उनके गुंडरदेही नगर पालिका में पदस्थ रहने के दौरान की खरीदी से संबंधित था। जांच रिपोर्ट में क्रय नियमों के पालन, निविदा प्रक्रिया और स्टॉक रजिस्टर में सामग्री की प्रविष्टि को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। उस समय कुलदीप झा खैरागढ़ में पदस्थ थे और उन्हें निलंबित किया गया था।

इसलिए खैरागढ़ की वर्तमान खरीदी से उस मामले को सीधे जोड़ना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। हालांकि, खैरागढ़ नगर पालिका में RCC कुर्सियों की खरीदी और उनकी संख्या व उपलब्धता को लेकर अलग से सवाल और आरोप पहले सार्वजनिक चर्चा का विषय रहे हैं। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में दावा किया गया कि खरीदी गई कुर्सियों की संख्या और जमीन पर दिखाई देने वाली सामग्री के बीच अंतर को लेकर सवाल उठे थे।

नगर पालिका की राजनीति भी पिछले वर्षों में काफी विवादों में रही है। तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष शैलेंद्र वर्मा के इस्तीफे को लेकर 2024 में बड़ा विवाद हुआ था। वर्मा ने शुरुआत में इस्तीफा देने से इनकार करते हुए इसे कथित रूप से फर्जी बताया और मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। बाद में मई 2024 में उनका इस्तीफा स्वीकार किए जाने की खबर सामने आई।

CG News:-अब नई खरीदी के प्रस्तावों की चर्चा के साथ एक बार फिर पारदर्शिता का मुद्दा सामने है। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि नई कुर्सियां, डेस्क-बेंच या LED लाइट खरीदी जाएंगी या नहीं, बल्कि उससे पहले यह स्पष्ट होना जरूरी है कि—

पुरानी सामग्री कितनी खरीदी गई थी?
वह वर्तमान में कहां उपलब्ध है?
कितनी सामग्री उपयोग योग्य है?
और नई खरीदी की वास्तविक जरूरत का आकलन किस आधार पर किया गया है?

नगर पालिका यदि पुरानी खरीदी और प्रस्तावित नई सामग्री का पूरा विवरण सार्वजनिक करती है, तो विवाद और आशंकाओं पर विराम लग सकता है। लेकिन बिना स्पष्ट जानकारी के हर नई खरीदी के साथ पुराने सवाल फिर उठना तय माना जा रहा है।

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