Crude Oil Price Crash:-₹100 वाले तेल का डर टला! 70 डॉलर के करीब पहुंचा कच्चा तेल, क्या अब सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?

Crude Oil Price Crash:-अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी देखने को मिल रही है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि WTI (वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट) और मर्बन क्रूड भी कमजोर स्तर पर बने रहे। कुछ सप्ताह पहले मध्य पूर्व में बढ़े तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेज़ी से उछली थीं, लेकिन अब हालात सामान्य होने के साथ वैश्विक बाजार को राहत मिलती दिख रही है।
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Crude Oil Price Crash:-कच्चे तेल में क्यों आई गिरावट?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में सकारात्मक संकेत मिलने से बाजार में सप्लाई बाधित होने का खतरा कम हुआ है। इसके अलावा मध्य पूर्व में युद्ध जैसी आशंकाएं फिलहाल कमजोर पड़ने से निवेशकों का भरोसा लौटा है। इसी वजह से तेल की कीमतों में शामिल ‘रिस्क प्रीमियम’ तेजी से घटा है।
ब्रेंट, WTI और मर्बन क्रूड के ताजा भाव
- ब्रेंट क्रूड: करीब 70.60 डॉलर प्रति बैरल
- WTI क्रूड: करीब 67 डॉलर प्रति बैरल
- मर्बन क्रूड: करीब 65 डॉलर प्रति बैरल
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह गिरावट जारी रहती है तो तेल आयात करने वाले देशों, खासकर भारत, को बड़ा फायदा मिल सकता है।
Crude Oil Price Crash:-OPEC+ की रणनीति भी बनी वजह
तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC+ ने उत्पादन बढ़ाने के संकेत दिए हैं। इसके साथ ही सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से अधिक सप्लाई की उम्मीद ने बाजार में उपलब्धता को लेकर चिंता कम कर दी है। बढ़ती आपूर्ति और मांग में संतुलन बनने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
Crude Oil Price Crash:-होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह सामान्य नहीं, फिर भी बाजार शांत
दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति जिस होर्मुज स्ट्रेट से गुजरती है, वहां स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। इसके बावजूद बाजार भविष्य की संभावित सप्लाई को ध्यान में रखकर कीमतें तय करता है। निवेशकों को भरोसा है कि समुद्री मार्ग पर तनाव और नहीं बढ़ेगा, इसलिए कीमतों में नरमी बनी हुई है।
Crude Oil Price Crash:-क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा असर भारत के क्रूड ऑयल आयात बिल पर पड़ सकता है। इससे सरकार पर ईंधन की लागत का दबाव कम होगा। हालांकि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करतीं। इनमें टैक्स, रिफाइनिंग लागत, फ्रेट और मार्केटिंग खर्च भी शामिल होते हैं। ऐसे में तुरंत कीमतें घटने की संभावना कम है, लेकिन यदि कच्चा तेल लंबे समय तक 70 डॉलर के आसपास बना रहता है तो भविष्य में उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।
Crude Oil Price Crash:-अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि सस्ता कच्चा तेल भारत के लिए कई मोर्चों पर राहत लेकर आ सकता है। इससे आयात बिल कम होगा, चालू खाते का घाटा नियंत्रित रहेगा, महंगाई पर दबाव घटेगा और उद्योगों की लागत कम होने से आर्थिक विकास को भी गति मिल सकती है।
