Pitru Paksha 2026:-गया में ही क्यों होता है पिंडदान? गयासुर की वो कथा, जहां भगवान विष्णु के चरणों से जुड़ा है मोक्ष का रहस्य!

Pitru Paksha 2026:-पितृ पक्ष शुरू होते ही देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने गया पहुंचते हैं। लेकिन सवाल है कि आखिर गया को ही पिंडदान के लिए इतना विशेष क्यों माना जाता है?
इसके पीछे जुड़ी है गयासुर की पौराणिक कथा, भगवान विष्णु के चरणचिह्न और फल्गु नदी से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।
Pitru Paksha 2026:-गयासुर को मिला था ऐसा वरदान
पौराणिक मान्यता के अनुसार, गयासुर नाम के असुर ने भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया कि उसके स्पर्श मात्र से जीवों को पापों से मुक्ति मिल जाएगी।
इसके बाद बड़ी संख्या में लोग गयासुर के पास पहुंचने लगे। मान्यता है कि इससे देवताओं को चिंता हुई, क्योंकि लोग उसके स्पर्श से पापमुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करने लगे थे।
Pitru Paksha 2026:-भगवान विष्णु ने गयासुर को धरती पर लिटाया
कथा के अनुसार, देवताओं के अनुरोध पर भगवान विष्णु ने गयासुर से यज्ञ के लिए उसका शरीर मांगा। गयासुर इसके लिए तैयार हो गया और धरती पर लेट गया।
इसी प्रसंग में धर्मशिला और भगवान विष्णु के चरण की कथा सामने आती है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने गयासुर को अपने चरण से दबाकर स्थिर किया। इसी से यह स्थान गयाक्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध हुआ और यहां पितरों के लिए किए जाने वाले कर्मकांड को विशेष महत्व मिला।
Pitru Paksha 2026:-यही है विष्णुपद मंदिर का रहस्य
गया के प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर में एक चट्टान पर भगवान विष्णु का चरणचिह्न माना जाता है। Incredible India के अनुसार यह पदचिह्न करीब 40 सेंटीमीटर लंबा बताया गया है।
धार्मिक मान्यता है कि यही वह स्थान है जहां भगवान विष्णु ने गयासुर को अपने चरणों से दबाया था। वर्तमान विष्णुपद मंदिर का निर्माण 1787 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर ने करवाया था।
Pitru Paksha 2026:-राम और सीता से भी जुड़ी है पिंडदान की परंपरा
गया की पितृ परंपरा का संबंध भगवान राम और माता सीता से भी जोड़ा जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान राम ने गया में अपने पिता राजा दशरथ के लिए पिंडदान किया था। वहीं फल्गु नदी के किनारे स्थित सीता कुंड को माता सीता से जुड़ी पिंडदान की कथा का स्थल माना जाता है। बिहार पर्यटन भी गया में राम द्वारा दशरथ के पिंडदान और सीता द्वारा फल्गु नदी के किनारे पिंडदान की परंपरा का उल्लेख करता है।
Pitru Paksha 2026:-फल्गु नदी का भी है खास महत्व
गया की पितृ परंपरा में फल्गु नदी का महत्वपूर्ण स्थान है। यहां पितृ पक्ष के दौरान श्रद्धालु तर्पण और पिंडदान करते हैं। बिहार पर्यटन के अनुसार गया में पिंडदान के लिए 48 प्रमुख पवित्र स्थलों का उल्लेख मिलता है, जिनमें फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर, सीता कुंड और पंचतीर्थ प्रमुख हैं।
फल्गु नदी से जुड़ी एक प्रसिद्ध धार्मिक कथा में माता सीता द्वारा पिंडदान और नदी को दिए गए श्राप का उल्लेख मिलता है। इसी वजह से फल्गु नदी को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं आज भी प्रचलित हैं।
Pitru Paksha 2026:-इसलिए गया बना पितृ कर्म का बड़ा तीर्थ
गयासुर की पौराणिक कथा, भगवान विष्णु के चरणचिह्न, फल्गु नदी, सीता कुंड और राम से जुड़ी मान्यताओं ने गया को पितृ कर्म के प्रमुख तीर्थों में विशेष स्थान दिया है।
पितृ पक्ष में यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं और अपने पूर्वजों की शांति एवं सद्गति की कामना से श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं।
यानी गया सिर्फ एक तीर्थ नहीं, बल्कि पौराणिक कथाओं, आस्था और सदियों पुरानी पितृ परंपरा का संगम है।
