Health Tips:-चाय के साथ गुड़ या शहद—गले की खराश में क्या है बेहतर? जानिए क्या कहती है रिसर्च

Health Tips:-सुबह की चाय हो या शाम की थकान, भारत में चाय पीने का चलन काफी आम है। मौसम बदलने पर इसी दौरान कई लोगों को गले में खराश, सूखापन या हल्की जलन की शिकायत भी होने लगती है। ऐसे में कुछ लोग चाय के साथ गुड़ लेते हैं, तो कुछ शहद को चाय या गर्म पानी में मिलाकर पीना पसंद करते हैं। लेकिन सवाल है—गले के लिए गुड़ बेहतर है या शहद?
Health Tips:-शहद को लेकर क्या कहती है रिसर्च?
शहद को लंबे समय से खांसी और गले की परेशानी में घरेलू उपाय के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। रिसर्च में भी इसके कुछ फायदे सामने आए हैं। एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-एनालिसिस में पाया गया कि शहद ऊपरी श्वसन तंत्र के संक्रमण में सामान्य देखभाल की तुलना में खांसी की आवृत्ति और गंभीरता कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने बेहतर गुणवत्ता के और अध्ययनों की जरूरत भी बताई है।
NHS भी गले की परेशानी और खांसी में गर्म नींबू-पानी में 1 से 2 चम्मच शहद लेने को लक्षणों में राहत के लिए सुझाता है।
Health Tips:-फिर गुड़ का क्या?
गुड़ में कुछ खनिज जरूर पाए जाते हैं, लेकिन इसे गले की खराश का इलाज मानना सही नहीं होगा। खासकर यह दावा कि रोजाना चाय के साथ गुड़ खाने से गले की समस्या निश्चित रूप से दूर हो जाएगी, इसके लिए मजबूत चिकित्सकीय प्रमाण नहीं हैं।
एक और जरूरी बात—चाय को आयरन का अच्छा स्रोत मानना सही नहीं है। बल्कि चाय में मौजूद पॉलीफेनॉल शरीर में भोजन से मिलने वाले नॉन-हीम आयरन के अवशोषण को कम कर सकते हैं। इसलिए जिन लोगों में आयरन की कमी है, उनके लिए भोजन या आयरन सप्लीमेंट के बिल्कुल साथ चाय लेना उचित नहीं माना जाता।
Health Tips:-क्या शहद वजन कम करता है?
यह दावा भी सावधानी से समझना जरूरी है। शहद प्राकृतिक खाद्य पदार्थ जरूर है, लेकिन इसमें शुगर होती है। WHO के मुताबिक शहद में मौजूद प्राकृतिक शर्करा भी फ्री शुगर में शामिल होती है और कुल फ्री शुगर का सेवन सीमित रखना चाहिए।
इसलिए शहद को वजन घटाने का कोई खास उपाय मानकर ज्यादा मात्रा में लेना सही नहीं है।
Health Tips:-तो चाय के साथ क्या लें?
अगर मकसद सिर्फ गले को आराम देना है, तो गुनगुना पानी या गर्म पेय में थोड़ी मात्रा में शहद कुछ लोगों को राहत दे सकता है। वहीं सामान्य तौर पर पर्याप्त पानी पीना और गले में खराश होने पर गर्म नमक-पानी से गरारे करना भी मददगार हो सकता है।
यानी गुड़ और शहद में से किसी एक को रोजाना चाय के साथ लेना जरूरी नहीं है। शहद को गले और खांसी में सीमित मात्रा में राहत के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसे बीमारी का इलाज नहीं समझना चाहिए।
ध्यान रखें: एक साल से छोटे बच्चों को शहद नहीं देना चाहिए, क्योंकि इससे शिशु बोटुलिज्म का खतरा हो सकता है।
अगर गले में खराश लंबे समय तक बनी रहे, तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या निगलने में ज्यादा दिक्कत हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
