UPI Update:-₹2000 से ऊपर UPI चार्ज पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, MDR के खिलाफ दाखिल हुई याचिका

UPI Update:-₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट लेनदेन पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। एडवोकेट अंजन दत्ता ने इस नई शुल्क व्यवस्था को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय की ओर से 14 सितंबर 2026 को जारी अधिसूचना और 15 सितंबर को जारी MDR फ्रेमवर्क को रद्द करने की मांग की गई है।
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UPI Update:-क्या है नया UPI MDR नियम?
NPCI के नए फ्रेमवर्क के मुताबिक, 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4% MDR लागू होगा, यदि भुगतान ₹2,000 से अधिक है। इस शुल्क की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन रखी गई है। यानी ₹75,000 या उससे अधिक के पात्र लेनदेन पर भी अधिकतम ₹300 MDR लगेगा।
हालांकि, यह नियम हर UPI भुगतान पर लागू नहीं होगा। Person-to-Person (P2P) लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे, चाहे रकम कितनी भी हो। ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान और छोटे व्यापारियों के लिए निर्धारित Zero-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले लेनदेन भी शुल्कमुक्त रहेंगे। वित्त मंत्रालय के अनुसार करीब 96% P2M लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे।
UPI Update:-किन क्षेत्रों में ₹5 का MDR?
कुछ जरूरी और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। ₹2,000 से अधिक के पात्र लेनदेन पर इन श्रेणियों में ₹5 का फ्लैट MDR लागू होगा। इनमें रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कुछ कृषि संबंधी भुगतान शामिल हैं।
UPI Update:-क्या ग्राहक से सीधे UPI चार्ज लिया जाएगा?
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि MDR को सरकार ने UPI टैक्स नहीं बताया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार MDR सरकार या NPCI द्वारा टैक्स के रूप में वसूल नहीं किया जाएगा, बल्कि भुगतान इकोसिस्टम में शामिल बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स आदि के बीच वितरित किया जाएगा। सरकार का कहना है कि ग्राहकों पर इसका शुल्क नहीं डाला जाएगा।
यानी ₹10,000 का पात्र मर्चेंट UPI भुगतान करने पर ग्राहक से अलग से ₹40 UPI शुल्क लेने की व्यवस्था नहीं की गई है। 0.4% MDR मर्चेंट-पक्ष पर लागू होता है। हालांकि, याचिकाकर्ता और आलोचकों की चिंता यही है कि कारोबारी भविष्य में अपनी लागत का कुछ हिस्सा कीमतों के जरिए ग्राहकों पर डाल सकते हैं। यह फिलहाल एक आशंका/तर्क है, न कि यह तथ्य कि हर व्यापारी ऐसा करेगा।
UPI Update:-सुप्रीम कोर्ट में क्या चुनौती दी गई?
अंजन दत्ता की याचिका में 14 और 15 सितंबर को जारी सरकारी अधिसूचनाओं और MDR framework को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि नई शुल्क व्यवस्था के व्यापक आर्थिक प्रभाव हो सकते हैं और इसका बोझ अंततः आम नागरिकों तक पहुंच सकता है। याचिका में केंद्र सरकार के साथ RBI, NPCI और UPI से संबंधित Steering Committee को भी पक्षकार बनाया गया है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर अंतिम फैसला नहीं दिया है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि नया MDR नियम रद्द होगा या लागू रहेगा।
UPI Update:-विपक्ष ने भी उठाए सवाल
UPI MDR को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने नए शुल्क को “UPI tax” बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। उनके आरोपों पर केंद्र सरकार का पक्ष अलग है। सरकार का कहना है कि MDR कोई टैक्स नहीं है और इसका उद्देश्य UPI इकोसिस्टम की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को बनाए रखना है।
क्या बदलेगा, एक नजर में
- ₹2,000 तक P2M भुगतान: MDR नहीं
- ₹2,000 से अधिक चुनिंदा P2M भुगतान: 0.4% MDR
- अधिकतम MDR: ₹300 प्रति लेनदेन
- ₹75,000 या अधिक के पात्र भुगतान: अधिकतम ₹300
- P2P भुगतान: रकम चाहे जितनी हो, मुफ्त
- कुछ जरूरी सेक्टर: ₹5 फ्लैट MDR
- नया नियम लागू: 15 अक्टूबर 2026
- सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: दायर हो चुकी है, लेकिन अभी अंतिम फैसला नहीं आया है।
इस तरह, “₹2,000 से ऊपर हर UPI भुगतान पर ग्राहक से चार्ज लगेगा” कहना सही नहीं होगा। नया framework मुख्य रूप से निर्दिष्ट मर्चेंट लेनदेन पर MDR से संबंधित है, जबकि P2P भुगतान और कई छोटे/निर्धारित लेनदेन मुफ्त रखे गए हैं।
