CG News:-PM आवास पर रायपुर प्रेस क्लब में 80 मिनट की बहस, बघेल-शर्मा के आंकड़े आमने-सामने; सरकारी रिकॉर्ड से क्या तस्वीर निकलती है?

CG News:-रायपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में चल रही खींचतान मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को रायपुर प्रेस क्लब के मंच तक पहुंच गई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के बीच करीब 80 मिनट तक आमने-सामने बहस हुई। दोनों नेताओं ने योजना के तहत स्वीकृत और बनाए गए मकानों, पिछली सरकार के कार्यकाल तथा मौजूदा सरकार के दावों को लेकर अलग-अलग आंकड़े रखे।
इस बहस की खास बात यह रही कि दोनों नेताओं ने सार्वजनिक मंच पर एक-दूसरे के दावों को चुनौती दी। हालांकि, उपलब्ध सरकारी आंकड़ों को देखने पर साफ होता है कि ‘लक्ष्य’, ‘स्वीकृत आवास’ और ‘पूर्ण आवास’ एक ही चीज नहीं हैं। यही अंतर बहस में सामने आए कई आंकड़ों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
CG News:-सरकारी रिकॉर्ड में छत्तीसगढ़ के कितने PM आवास?
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से 21 जुलाई 2026 को जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, 16 जुलाई 2026 तक छत्तीसगढ़ के लिए PMAY-G में 26,42,224 आवासों का लक्ष्य दर्ज था।
इसी अवधि तक राज्य की ओर से 24,51,294 आवास स्वीकृत किए गए थे, जबकि 20,16,970 आवास पूरे हो चुके थे। लक्ष्य के मुकाबले 6,25,254 आवासों का निर्माण पूरा होना बाकी बताया गया था।
यानी सरकारी रिकॉर्ड में 26.42 लाख का आंकड़ा कुल लक्ष्य से जुड़ा है, जबकि 20.16 लाख पूर्ण आवास का आंकड़ा वास्तविक निर्माण पूरा होने से संबंधित है। इसलिए इन आंकड़ों को सीधे जोड़कर कुल लाभार्थियों या परिवारों की संख्या निकालना सही नहीं होगा।
CG News:-बहस में क्या बोले विजय शर्मा?
बहस के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने राज्य सरकार के कार्यकाल में PM आवास के निर्माण को लेकर सरकार का पक्ष रखा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने दावा किया कि साय सरकार के कार्यकाल में अब तक 11.75 लाख से अधिक आवास पूरे किए जा चुके हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने बड़ी संख्या में आवासों के लिए स्वीकृति दी है और आवास निर्माण के लिए हजारों करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई है। शर्मा ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आवास निर्माण और स्वीकृतियों को लेकर भी सवाल उठाए।
शर्मा की ओर से यह दावा भी किया गया कि सितंबर 2023 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सात लाख आवास स्वीकृत किए थे, लेकिन उनमें से केवल करीब 84 हजार हितग्राहियों के खातों में राशि पहुंची। यह आंकड़ा बहस के दौरान उनके द्वारा रखा गया दावा है, इसलिए इसे सरकारी रिकॉर्ड से स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़े के रूप में नहीं लिखा जाना चाहिए।
CG News:-भूपेश बघेल ने उठाया ‘आंकड़ों’ का सवाल
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार द्वारा अलग-अलग समय पर बताए गए आवासों के आंकड़ों को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने पुराने स्वीकृत आवासों और नई घोषणाओं को जोड़कर सरकार से पूछा कि आखिर अलग-अलग आंकड़ों के बीच वास्तविक स्थिति क्या है।
बघेल ने अपने कार्यकाल के दौरान PM आवास योजना के प्रभावित होने के लिए केंद्र से जुड़े मुद्दों और पोर्टल बंद होने सहित अन्य कारणों का उल्लेख किया। बहस के दौरान उन्होंने सरकार के आंकड़ों की व्याख्या पर भी सवाल उठाए।
CG News:-‘46 लाख आवास’ वाला गणित कितना सही?
बहस की सबसे बड़ी उलझन यहीं दिखाई देती है। अलग-अलग राजनीतिक दावों में कैबिनेट निर्णय, केंद्र से मिला लक्ष्य, राज्य द्वारा स्वीकृति, हितग्राही स्वीकृति और पूर्ण हो चुके मकानों को अलग-अलग संदर्भों में इस्तेमाल किया गया।
उदाहरण के तौर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के 16 जुलाई 2026 के आंकड़े में छत्तीसगढ़ का लक्ष्य 26.42 लाख, राज्य द्वारा स्वीकृत आवास 24.51 लाख और पूर्ण आवास 20.16 लाख हैं।
इसलिए 18 लाख, सात लाख या अन्य अलग-अलग आंकड़ों को सीधे जोड़कर 46 लाख अलग-अलग मकान मान लेना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा, जब तक हर आंकड़े की अवधि और श्रेणी स्पष्ट न की जाए।
CG News:-सरकारी आंकड़ों से निकलती है क्या तस्वीर?
उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों से इतना स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में PMAY-G के तहत बड़ी संख्या में आवास स्वीकृत और पूर्ण हुए हैं, लेकिन लक्ष्य और पूर्ण आवास के बीच अंतर अभी भी मौजूद था।
16 जुलाई 2026 तक 26.42 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 20.16 लाख मकान पूर्ण होने का सरकारी आंकड़ा था। इसका अर्थ है कि लक्ष्य का पूरा हिस्सा उस तारीख तक पूरा नहीं हुआ था।
साथ ही, केंद्र के आधिकारिक दस्तावेज यह भी दिखाते हैं कि PMAY-G में अलग-अलग वर्षों के लक्ष्य और स्वीकृतियों के आधार पर प्रगति दर्ज की जाती है। इसलिए किसी सरकार के पूरे कार्यकाल का आकलन करने के लिए सिर्फ एक आंकड़े के बजाय वर्षवार स्वीकृति, निर्माण पूरा होने, जारी राशि और लंबित आवास को साथ देखना जरूरी है।
CG News:-बहस का सबसे बड़ा संदेश
रायपुर प्रेस क्लब की यह बहस केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रही। इसने PM आवास योजना से जुड़े आंकड़ों को सार्वजनिक रूप से समझने की जरूरत भी सामने रखी।
जनता के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि कितने परिवारों को लक्ष्य में शामिल किया गया, कितने आवास स्वीकृत हुए, कितने हितग्राहियों को पहली और अगली किस्त मिली, कितने मकान पूरे हुए और कितने अभी लंबित हैं।
यही वजह है कि दोनों नेताओं के दावों के बीच किसी एक पक्ष को ‘विजेता’ घोषित करने के बजाय सरकारी पोर्टल और वर्षवार आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर पूरी तस्वीर देखना ज्यादा उचित है।
रायपुर की इस बहस ने कम से कम इतना जरूर किया कि PM आवास योजना के आंकड़े राजनीतिक बयानों से निकलकर सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में आ गए। अब जरूरत इस बात की है कि सरकार और विपक्ष दोनों एक ही समयावधि और एक ही श्रेणी के आंकड़ों के साथ जनता के सामने अपनी बात रखें।
