Fraud Case:-NEET में कम रैंक के बाद बेटे के MBBS एडमिशन की तलाश, BJP नेता से 55 लाख की कथित ठगी; 5 लोगों पर FIR

Fraud Case:-गुजरात के वडोदरा में मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने के नाम पर एक भाजपा नेता से 55 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि पांच लोगों ने 2019 में उनके बेटे को निजी मेडिकल कॉलेज में मैनेजमेंट कोटे से MBBS सीट दिलाने का भरोसा दिया था। रकम लेने के बावजूद न तो बेटे का एडमिशन कराया गया और न ही पैसे वापस किए गए। बाद में रकम लौटाने के लिए दिए गए चेक भी कथित तौर पर बाउंस हो गए।
मामले में वडोदरा के गोरवा थाने में 1 सितंबर 2026 को FIR दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता मुकेश दीक्षित वडोदरा नगर निगम के पूर्व पार्षद और शहर भाजपा की मीडिया विंग से जुड़े रहे हैं। पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
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Fraud Case:-कम NEET रैंक के बाद मैनेजमेंट कोटे से सीट की तलाश
शिकायत के मुताबिक, मुकेश दीक्षित का बेटा शिवांग 12वीं की पढ़ाई साइंस स्ट्रीम से पूरी करने के बाद मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाना चाहता था। 2019 में NEET में अपेक्षाकृत कम रैंक आने के बाद परिवार ने निजी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के विकल्प तलाशने शुरू किए।
इसी दौरान अप्रैल 2019 में दीक्षित की नजर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने से जुड़े एक विज्ञापन पर पड़ी। इसके बाद उन्होंने अजितेशकुमार सारंगी से संपर्क किया। आरोप है कि सारंगी ने कर्नाटक, महाराष्ट्र या राजस्थान के निजी मेडिकल कॉलेज में मैनेजमेंट कोटे के जरिए उनके बेटे का एडमिशन कराने का भरोसा दिया।
Fraud Case:-60 लाख रुपये में एडमिशन कराने का दावा
FIR में दर्ज शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने एडमिशन के लिए करीब 60 लाख रुपये खर्च होने की बात कही थी। शुरुआत में 10 लाख रुपये देने की बात हुई। दीक्षित के अनुसार, उन्होंने यह रकम आरोपियों को दी। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर उनके बेटे के एडमिशन से संबंधित एक पत्र भी दिखाया गया।
बाद में आरोपियों ने दावा किया कि उनके बेटे का NEET आवेदन भी प्रक्रिया के तहत पूरा करा दिया गया है और एडमिशन के लिए अतिरिक्त रकम की मांग की गई। शिकायत के मुताबिक, अलग-अलग भुगतान के जरिए दीक्षित ने कुल 55 लाख रुपये आरोपियों को दिए।
Fraud Case:-सीट नहीं मिली तो अगले साल का दिया भरोसा
मई-जून 2019 के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि उस समय मैनेजमेंट कोटे की सीट उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके बाद परिवार को अगले साल एडमिशन कराने का भरोसा दिया गया।
लेकिन 2020 में भी बेटे का मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं हो सका। इसके बाद दीक्षित ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की। आरोप है कि पैसे लौटाने के बजाय आरोपियों की ओर से उन्हें चेक दिए गए, लेकिन वे चेक कथित तौर पर बाउंस हो गए।
Fraud Case:-ऑफिस बंद होने के बाद पुलिस में शिकायत
शिकायत के अनुसार, बाद में आरोपियों ने वडोदरा स्थित अपना कार्यालय भी बंद कर दिया। दीक्षित ने पुलिस को बताया कि उन्होंने पहले भी मामले को लेकर शिकायत करने की कोशिश की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, 2022 में उन्होंने पुलिस से संपर्क किया था, लेकिन उस समय उन्हें सिविल कोर्ट जाने की सलाह दी गई। इसके बाद कोविड-19 महामारी के दौरान उनकी तबीयत खराब होने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका।
अब करीब सात साल बाद, 1 सितंबर 2026 को गोरवा पुलिस ने पांच आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू की है।
Fraud Case:-पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
पुलिस के अनुसार मामले में वडोदरा निवासी अजितेशकुमार सारंगी, तेजल सारंगी और चंद्रेश याज्ञनिक के अलावा दिल्ली निवासी रंजीत मुखिया और संजीव झा के नाम सामने आए हैं। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, पैसों के लेन-देन और एडमिशन के नाम पर किए गए दावों की जांच कर रही है।
Fraud Case:-मेडिकल एडमिशन के नाम पर ठगी का पहले भी सामने आया मामला
यह वडोदरा में मेडिकल एडमिशन के नाम पर कथित धोखाधड़ी का पहला मामला नहीं है। Times of India के मुताबिक, गोरवा थाने में 2023 में भी एक व्यक्ति से उसके बेटे का मेडिकल कॉलेज में एडमिशन कराने के नाम पर 65 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला दर्ज हुआ था। उसी वर्ष पुलिस ने मेडिकल एडमिशन के नाम पर अभिभावकों को निशाना बनाने वाले कथित रैकेट का भी खुलासा किया था।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपों की पुष्टि जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया में होगी।
