छत्तीसगढ़

CG News:-खेतों में करंट का डर, हाईटेंशन लाइन पर हाईकोर्ट सख्त; रिपोर्ट में देरी पर केंद्र सरकार पर ₹10 हजार जुर्माना

CG News:-बिलासपुर। बिलासपुर जिले के रतनपुर क्षेत्र के गांवों से गुजर रही हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे और आसपास विद्युत प्रभाव की शिकायतों से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की कमेटी की रिपोर्ट लगातार लंबित रहने पर केंद्र सरकार पर ₹10 हजार का जुर्माना लगाया है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार को रिपोर्ट दाखिल करने का अंतिम अवसर देते हुए स्पष्ट किया है कि अब इसके लिए आगे कोई समय नहीं दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को होगी और उस दिन कमेटी की रिपोर्ट रिकॉर्ड पर उपलब्ध रहना अनिवार्य है।

CG News:-खेतों में करंट महसूस होने की शिकायत से शुरू हुआ मामला

यह मामला बिलासपुर जिले के रतनपुर क्षेत्र के गांवों में हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे और टावरों के आसपास ग्रामीणों द्वारा करंट के झटके महसूस किए जाने की शिकायतों से जुड़ा है। पहले प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि कई गांवों के खेतों में हाईटेंशन तारों और टावरों के आसपास विद्युत प्रभाव महसूस होने की शिकायत सामने आई थी।

रिपोर्टों के अनुसार, ग्रामीणों को खेतों में काम करने के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। सुरक्षा को लेकर ग्रामीण रबर के जूते और बूट पहनकर खेतों में जाने तक को मजबूर बताए गए थे। मामले में मवेशियों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई थी।

CG News:-इन 8 गांवों का मामला

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की रिपोर्ट में बिलासपुर जिले के अमटारा, कछार, लोफंदी, मोहतराई, लछनपुर, नवागांव, मदनपुर और भरारी गांवों से हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइन गुजरने की जानकारी सामने आई थी। इन गांवों को मामले में प्रमुख रूप से प्रभावित क्षेत्र के तौर पर सामने रखा गया है।

CG News:-2024 में हाईकोर्ट ने दिए थे तकनीकी जांच के निर्देश

मामले पर हाईकोर्ट ने 15 जुलाई 2024 को संबंधित केंद्रीय विद्युत निरीक्षण प्राधिकरण को प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने के निर्देश दिए थे। उद्देश्य यह पता लगाना था कि ट्रांसमिशन लाइनों के कारण जमीन या आसपास के क्षेत्र में किसी तरह का इंडक्शन अथवा अन्य विद्युत प्रभाव तो नहीं हो रहा है।

कोर्ट ने संबंधित कंपनियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए थे कि ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे स्थित कृषि भूमि के मालिकों को अनावश्यक परेशानी या खतरे का सामना न करना पड़े।

CG News:-पावर ग्रिड और जबलपुर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन भी पक्षकार

मामले में पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और जबलपुर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड को पक्षकार बनाया गया है। केंद्रीय प्राधिकरण की ओर से किए गए निरीक्षण के बाद तकनीकी रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष रखी गई थी।

हालांकि, बाद की कार्यवाही में बिजली कंपनियों की ओर से रिपोर्ट तैयार करने में इस्तेमाल किए गए तकनीकी मानकों और संबंधित दस्तावेजों की जानकारी मांगी गई। इसके बाद कोर्ट ने आवश्यक तकनीकी पैरामीटर और दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखने के निर्देश दिए।

CG News:-कमेटी बनी, लेकिन उपचारात्मक उपायों की रिपोर्ट अटकी

मामले में 25 अक्टूबर 2024 को एक कमेटी गठित कर आवश्यक उपचारात्मक उपायों यानी समस्या मिलने पर उसे दूर करने के उपायों को लेकर रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से रिपोर्ट पेश करने के लिए कई बार समय मांगा गया।

कोर्ट ने अलग-अलग मौकों पर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय दिया, लेकिन रिपोर्ट रिकॉर्ड पर नहीं आ सकी। मार्च 2025 में भी हाईकोर्ट ने रिपोर्ट पेश करने के लिए समय दिया था, मगर तब भी रिपोर्ट दाखिल नहीं हो सकी। उस समय की सुनवाई की रिपोर्टों में भी इस मामले में विस्तृत CEA रिपोर्ट लंबित रहने की बात सामने आई थी।

CG News:-बार-बार समय मिलने के बाद भी रिपोर्ट नहीं आई

अब 1 सितंबर 2026 की सुनवाई में भी जब कमेटी की रिपोर्ट रिकॉर्ड पर नहीं आई तो हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार को पहले ही पर्याप्त अवसर दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई।

इसी देरी को देखते हुए डिवीजन बेंच ने ₹10 हजार का जुर्माना लगाया और रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अंतिम अवसर दिया।

CG News:-8 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अगली सुनवाई तक 25 अक्टूबर 2024 को गठित कमेटी की उपचारात्मक उपायों से संबंधित रिपोर्ट रिकॉर्ड पर होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अब और समय नहीं दिया जाएगा।

मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि कमेटी अपनी रिपोर्ट में हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनों से ग्रामीणों और कृषि भूमि पर पड़ रहे संभावित विद्युत प्रभाव को लेकर क्या निष्कर्ष और समाधान सुझाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *