Chhattisgarh News:-जंगल में लौटी खुशियां, बढ़ी बाघों की दहाड़: छत्तीसगढ़ में तेंदुआ शावकों का सफल रेस्क्यू, टाइगर संख्या 35 तक पहुंची

Chhattisgarh News:-रायपुर। छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण को लेकर वन विभाग के प्रयासों के बीच बस्तर से राहत और उपलब्धि दोनों की खबर सामने आई है। चित्रकोट रेंज के दुर्गम जंगलों में मां से बिछड़े तेंदुए के शावकों को करीब 48 घंटे के चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू अभियान के बाद सुरक्षित उनकी मां से मिला दिया गया। ट्रैप कैमरों में मादा तेंदुए के दोनों शावकों तक पहुंचने की पुष्टि हुई।
जानकारी के मुताबिक 22 अगस्त को चित्रकोट रेंज के पहाड़ी वन क्षेत्र में तेंदुए का एक नवजात शावक मिलने की सूचना वन विभाग को मिली थी। टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर शावक को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। इसके बाद उसे उसकी मां से मिलाने के लिए प्राकृतिक आवास में सुरक्षित स्थान पर छोड़ा गया और पूरे इलाके में निगरानी शुरू की गई। बाद में दूसरे शावक की भी मौजूदगी सामने आई, जिसके बाद दोनों शावकों पर हाई-रेजोल्यूशन ट्रैप कैमरों के जरिए नजर रखी गई।
भारी बारिश, घने जंगल और दुर्गम पहाड़ी इलाके के बावजूद वन विभाग की टीम लगातार अभियान में जुटी रही। कैमरा ट्रैप में मादा तेंदुए के दोनों शावकों तक पहुंचने और उन्हें अपने साथ जंगल में ले जाने की तस्वीरें सामने आने के बाद अभियान को सफल घोषित किया गया। वन मंत्री केदार कश्यप ने वन विभाग की टीम की तत्परता और संवेदनशीलता की सराहना की।
Chhattisgarh News:-2022 के 17 बाघ से अब संख्या 35
वन्यजीव संरक्षण के मोर्चे पर छत्तीसगढ़ को एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। वन मंत्री केदार कश्यप के अनुसार वर्ष 2022 में प्रदेश में 17 बाघ दर्ज किए गए थे, जबकि अब राज्य के जंगलों में बाघों की संख्या बढ़कर 35 हो गई है। यह आंकड़ा राज्य में बाघ संरक्षण और उनके आवासों को सुरक्षित रखने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम के तौर पर सामने आया है।
Chhattisgarh News:-गुरु घासीदास-तमोर पिंगला बना देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व
वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से छत्तीसगढ़ के लिए एक और बड़ी उपलब्धि गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व है। नवंबर 2024 में इसे भारत के 56वें टाइगर रिजर्व के रूप में अधिसूचित किया गया था। करीब 2,829.38 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। इससे आगे आंध्र प्रदेश का नागार्जुनसागर-श्रीशैलम और असम का मानस टाइगर रिजर्व हैं।
यह टाइगर रिजर्व छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, सूरजपुर और बलरामपुर जिलों में फैला है। इसमें 2,049.2 वर्ग किलोमीटर का कोर क्षेत्र और 780.15 वर्ग किलोमीटर का बफर क्षेत्र शामिल है।
वन्यजीव संरक्षण के इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ में बाघ, तेंदुआ और दूसरे वन्यजीवों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक आवास तैयार करने की दिशा में काम को मजबूती मिलने की उम्मीद है। खास तौर पर बस्तर में तेंदुआ शावकों को उनकी मां से मिलाने का अभियान मानव और वन्यजीव के बीच बेहतर सह-अस्तित्व की एक सकारात्मक मिसाल बनकर सामने आया है।
