Nag Panchami:-23 साल बाद सावन में महायोग! नाग पंचमी और सोमवार का दुर्लभ संयोग, शिवभक्तों के लिए 17 अगस्त बनेगा सबसे शुभ दिन

Nag Panchami:-सावन का पवित्र महीना इस वर्ष 30 जुलाई से 28 अगस्त 2026 तक रहेगा। इस बार सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं, लेकिन 17 अगस्त का दिन सबसे खास माना जा रहा है। धार्मिक पंचांग के अनुसार इस दिन सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी एक साथ पड़ रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ऐसा दुर्लभ ‘सोमवती नाग पंचमी’ का संयोग करीब 23 वर्षों बाद बन रहा है, जिससे इस दिन भगवान शिव और नाग देवता की पूजा का महत्व कई गुना बढ़ गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 17 अगस्त को सर्वार्थ सिद्धि योग और शिववास योग का भी प्रभाव रहेगा। माना जाता है कि इस शुभ संयोग में भगवान शिव का रुद्राभिषेक, जलाभिषेक तथा गंगाजल, दूध, बेलपत्र, चंदन और धतूरा अर्पित करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। नाग पंचमी होने के कारण इस दिन नाग देवता की पूजा भी विशेष फलदायी मानी जाती है।
Nag Panchami:-दूसरा सोमवार भी रहेगा विशेष
सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को पड़ेगा। इस दिन सोम प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग बन रहा है। त्रयोदशी तिथि में भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेक और प्रदोष काल में व्रत-पूजन को अत्यंत शुभ माना गया है। श्रद्धालु इस दिन दूध, बेलपत्र, धतूरा और गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की कामना करेंगे।
Nag Panchami:-अंतिम सोमवार पर होगा सावन व्रत का समापन
सावन का चौथा और अंतिम सोमवार 24 अगस्त को रहेगा। इस दिन भी शुभ योगों का प्रभाव रहेगा। श्रद्धालु भगवान शिव को जल, काले तिल, नारियल और बेलपत्र अर्पित कर विशेष आराधना करेंगे। धार्मिक परंपरा के अनुसार अंतिम सोमवार की पूजा के साथ कई श्रद्धालु अपने सावन व्रत का विधिवत समापन भी करते हैं।
Nag Panchami:-सावन में क्यों बढ़ जाता है शिवभक्ति का महत्व?
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान देशभर के शिवालयों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, कांवड़ यात्रा, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और शिव चालीसा का पाठ किया जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई शिव पूजा से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। इस बार 17 अगस्त को बनने वाला दुर्लभ संयोग श्रद्धालुओं के लिए पूरे सावन का सबसे बड़ा आध्यात्मिक अवसर माना जा रहा है।
