Rani Gaind Kunwar:-150 साल पुराना रहस्य: देवी भक्त राजा, कृष्ण भक्त रानी… ऐसे पड़ा खैरागढ़ के ‘श्री गैंद बिहारी’ मंदिर का अनोखा नाम

Rani Gaind Kunwar:-छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ स्थित श्री गैंद बिहारी सरकार मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि राजवंशीय इतिहास, कृष्ण भक्ति और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। करीब 150 वर्ष पुराने इस मंदिर का नाम किसी स्थान, राजा या संत के नाम पर नहीं, बल्कि खैरागढ़ रियासत की रानी गैंद कुंवर की भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अगाध श्रद्धा से जुड़ा माना जाता है। यही वजह है कि आज भी यह मंदिर पूरे क्षेत्र में ‘श्री गैंद बिहारी सरकार’ के नाम से प्रसिद्ध है।
स्थानीय इतिहासकार भागवत शरण सिंह के अनुसार, मंदिर का इतिहास खैरागढ़ राजवंश की परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। उपलब्ध राजवंशीय वंशावली और स्थानीय ऐतिहासिक संदर्भों के आधार पर उन्होंने मंदिर के नामकरण और इसकी परंपराओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य साझा किए हैं।
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Rani Gaind Kunwar:-राजा थे देवी उपासक, रानी थीं कृष्ण की अनन्य भक्त
बताया जाता है कि खैरागढ़ रियासत के महाराजा कमल नारायण सिंह मां बम्लेश्वरी, मां दंतेश्वरी और मां शीतला के परम भक्त थे। धार्मिक साहित्य में उनकी विशेष रुचि थी और उन्होंने ‘शीतला जस मालिका’ जैसी रचना भी की थी।

वहीं उनकी धर्मपत्नी रानी गैंद कुंवर भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य आराधिका थीं। स्थानीय परंपरा के अनुसार, रानी की गहरी कृष्ण भक्ति से प्रभावित होकर राजपरिवार ने भगवान श्रीकृष्ण के विग्रह को ‘गैंद बिहारी’ नाम से प्रतिष्ठित किया। समय के साथ यही नाम मंदिर की स्थायी पहचान बन गया।
हालांकि इतिहासकार यह भी बताते हैं कि इस परंपरा का व्यापक अकादमिक दस्तावेजीकरण सीमित है और इसे स्थानीय ऐतिहासिक परंपरा एवं लोकमान्यता के रूप में देखा जाता है।
Rani Gaind Kunwar:-ऐसे पड़ा ‘खैरागढ़’ नाम
स्थानीय इतिहास के अनुसार, नागवंश के राजा टिकैत राय को खैरागढ़ का प्रथम संस्थापक माना जाता है। उनके पिता का नाम राजा खड़्गराय था। मान्यता है कि पहले इस क्षेत्र का नाम ‘खड़गढ़’ था, जो समय के साथ यहां खैर के पेड़ों की अधिकता और स्थानीय बोलचाल के कारण बदलकर ‘खैरागढ़’ हो गया।

Rani Gaind Kunwar:-150 वर्षों से निकल रही ऐतिहासिक रथयात्रा
श्री गैंद बिहारी मंदिर खैरागढ़ की सबसे पुरानी धार्मिक परंपराओं का केंद्र भी माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, पिछले लगभग डेढ़ सौ वर्षों से इसी मंदिर से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की भव्य रथयात्रा निकाली जाती है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इसमें शामिल होकर इस ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाते हैं।
धार्मिक जानकारों का मानना है कि यह रथयात्रा आज खैरागढ़ की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

Rani Gaind Kunwar:-बढ़ रही है ऐतिहासिक धरोहरों में लोगों की रुचि
हाल के वर्षों में खैरागढ़ राजपरिवार से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों और मंदिरों के प्रति लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। विशेषकर कमल विलास पैलेस परिसर के ऐतिहासिक मंदिरों और दरबार हॉल को आम लोगों के लिए खोले जाने के बाद स्थानीय इतिहास और विरासत को लेकर लोगों में नई उत्सुकता देखने को मिली है।

Rani Gaind Kunwar:-आस्था और इतिहास का अनूठा संगम
श्री गैंद बिहारी सरकार मंदिर आज केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि खैरागढ़ की राजशाही, सनातन परंपरा, कृष्ण भक्ति और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका है। इसकी पहचान धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास से भी जुड़ी हुई है।
