छत्तीसगढ़

Surajpur Murder Case:-गर्भस्थ शिशु के DNA ने पलटा पूरा केस! ट्रायल कोर्ट से बरी आरोपी पर हाईकोर्ट सख्त, फिर शुरू होगी सुनवाई

Surajpur Murder Case:-सूरजपुर जिले के चर्चित गर्भवती युवती हत्याकांड में ट्रायल कोर्ट से बरी हुए आरोपी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील स्वीकार करते हुए मामले में सुनवाई की अनुमति (Leave to Appeal) दे दी है। अदालत ने कहा कि डीएनए और फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्यों की गहन न्यायिक समीक्षा आवश्यक है।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने माना कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर मौजूद वैज्ञानिक साक्ष्य ऐसे हैं, जिनके आधार पर ट्रायल कोर्ट के फैसले की अपीलीय स्तर पर विस्तार से जांच की जानी चाहिए।

Surajpur Murder Case:-क्या है पूरा मामला?

मामला सूरजपुर जिले के प्रेमनगर थाना क्षेत्र स्थित तारा चौकी का है। 2 दिसंबर 2023 को जंगल में एक अज्ञात महिला का अधजला शव मिला था। पुलिस जांच में मृतका की पहचान होने के बाद उसके प्रेम संबंधों के आधार पर अतवार सिंह मरावी को गिरफ्तार किया गया।

अभियोजन के अनुसार आरोपी युवती को जंगल ले गया, जहां विवाह को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद उसने दुपट्टे से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी और पहचान छिपाने के लिए शव पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी।

Surajpur Murder Case:-DNA रिपोर्ट बनी सबसे बड़ा सबूत

पोस्टमार्टम में खुलासा हुआ कि मृतका गर्भवती थी। एफएसएल जांच में घटनास्थल से मानव शुक्राणु मिलने की पुष्टि हुई। वहीं डीएनए परीक्षण में गर्भस्थ भ्रूण का डीएनए आरोपी से मेल खाया, जिससे जांच एजेंसियों ने उसे भ्रूण का जैविक पिता बताया।

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने मौखिक गवाहों, चिकित्सीय रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया तथा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला पर विचार किए बिना आरोपी को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया।

Surajpur Murder Case:-हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि डीएनए और एफएसएल रिपोर्ट जैसे वैज्ञानिक साक्ष्य प्रथम दृष्टया अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में मामले की मेरिट पर विस्तृत सुनवाई आवश्यक है। अदालत ने आरोपी के खिलाफ ₹5,000 का जमानती वारंट जारी करते हुए उसे 28 जुलाई 2026 को उपस्थित होने का निर्देश दिया है। साथ ही ट्रायल कोर्ट का पूरा रिकॉर्ड भी तलब किया गया है।

अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में हाईकोर्ट आरोपी की बरी होने संबंधी वैधता पर विस्तृत सुनवाई करेगा। यदि राज्य सरकार की अपील सफल होती है तो ट्रायल कोर्ट का फैसला पलट भी सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *