High Court:-10 साल की सजा काट रहा कैदी बहन की विदाई में होगा शामिल, हाईकोर्ट ने इंसानियत दिखाते हुए पुलिस पहरे में दी इजाजत

High Court:-छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और मानवीय फैसला सुनाते हुए डकैती और आपराधिक साजिश के मामले में 10 साल की सजा काट रहे एक कैदी को उसकी बहन की विदाई में शामिल होने की अनुमति दी है। हालांकि अदालत ने उसे अंतरिम जमानत नहीं दी, बल्कि कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच समारोह में शामिल होने का आदेश दिया।HighCourtछत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और मानवीय फैसला सुनाते हुए डकैती और आपराधिक साजिश के मामले में 10 साल की सजा काट रहे एक कैदी को उसकी बहन की विदाई में शामिल होने की अनुमति दी है। हालांकि अदालत ने उसे अंतरिम जमानत नहीं दी, बल्कि कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच समारोह में शामिल होने का आदेश दिया।
यह मामला भिलाई के सुपेला कृष्णानगर निवासी मनीष बंसोर का है। उसे दुर्ग की विशेष अदालत ने नवंबर 2025 में डकैती और साजिश के मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। वर्तमान में वह जेल में बंद है।
High Court:-बहन की शादी का दिया हवाला
मनीष ने हाईकोर्ट में अंतरिम जमानत की मांग करते हुए कहा कि उसकी सगी बहन की शादी है और परिवार में उसके अलावा कोई दूसरा भाई नहीं है, जो पारंपरिक भाई की रस्में निभा सके। इसलिए उसे कुछ दिनों के लिए जमानत दी जाए।
High Court:-सरकार ने किया विरोध
राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि मनीष गंभीर अपराध में सजायाफ्ता कैदी है, इसलिए उसे खुली जमानत देना उचित नहीं होगा। हालांकि सरकार ने यह भी सुझाव दिया कि यदि अदालत चाहे तो उसे पुलिस अभिरक्षा में शादी की रस्मों में शामिल होने की अनुमति दी जा सकती है।
High Court:-हाईकोर्ट ने दिया मानवीय फैसला
जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की एकल पीठ ने सामाजिक और मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अंतरिम जमानत देने से इनकार किया, लेकिन पुलिस कस्टडी में बहन की विदाई में शामिल होने की अनुमति दे दी।
कोर्ट ने केंद्रीय जेल अधीक्षक और दुर्ग पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए कि 30 जून को पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के साथ मनीष को भिलाई स्थित विवाह स्थल ले जाया जाए। विदाई की रस्म पूरी होने के तुरंत बाद उसे वापस जेल भेजा जाएगा।
High Court:-क्या है इस फैसले का संदेश?
यह फैसला बताता है कि गंभीर अपराधों में सजा काट रहे कैदियों के मामलों में भी अदालत जरूरत पड़ने पर मानवीय और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर संतुलित निर्णय ले सकती है। साथ ही सुरक्षा से कोई समझौता न हो, इसका भी विशेष ध्यान रखा जाता है।