CG News:-बिजली हुई महंगी, लेकिन जेब पर नहीं पड़ेगा बड़ा झटका! 200 यूनिट तक आधा बिल योजना से लाखों परिवारों को राहत

CG News:-छत्तीसगढ़ में 1 जुलाई 2026 से बिजली उपभोक्ताओं को नई दरों के अनुसार बिल चुकाना होगा। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली शुल्क में औसतन 6.23 प्रतिशत वृद्धि की घोषणा की है। हालांकि सरकार की मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के चलते आम उपभोक्ताओं की जेब पर इसका असर अपेक्षाकृत कम रहने का दावा किया जा रहा है।
आयोग के अनुसार बीते वर्षों में कोयले की बढ़ती कीमत, बिजली उत्पादन लागत, ट्रांसमिशन खर्च और पूर्व वर्षों के राजस्व घाटे की भरपाई के लिए टैरिफ में संशोधन जरूरी हो गया था। इसके बावजूद आयोग ने घरेलू उपभोक्ताओं और निम्न आय वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए बढ़ोतरी को सीमित रखने का प्रयास किया है।
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नई व्यवस्था के तहत घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में औसतन 30 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। 200 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं पर 30 पैसे प्रति यूनिट, 201 से 600 यूनिट तक खपत करने वालों पर 40 पैसे प्रति यूनिट तथा 600 यूनिट से अधिक खपत करने वालों पर 50 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी लागू होगी।
हालांकि मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के तहत 400 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक की खपत पर आधा बिजली बिल देने की सुविधा जारी रहेगी। सरकार का दावा है कि इस योजना के कारण लाखों निम्न और मध्यम आय वर्गीय परिवारों पर वास्तविक अतिरिक्त भार केवल 15 से 20 पैसे प्रति यूनिट के आसपास ही रहेगा।
CG News:-ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत बड़ी संख्या में उपभोक्ता अपने घरों में रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कर रहे हैं। इससे उनकी ग्रिड आधारित बिजली खपत कम हो रही है और बढ़ी हुई दरों का प्रभाव भी सीमित रहेगा।
कृषि क्षेत्र को भी राहत दी गई है। कृषि पंपों के लिए 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि घोषित की गई है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी के कारण किसानों को इसका सीधा आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।
वहीं गैर-घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं की बिजली दरों में 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक वृद्धि की गई है। औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए भी ऊर्जा प्रभार और डिमांड चार्ज में संशोधन किया गया है। उद्योग जगत का मानना है कि बढ़ोतरी के बावजूद छत्तीसगढ़ की बिजली दरें देश के कई राज्यों की तुलना में प्रतिस्पर्धी बनी हुई हैं।
नई टैरिफ व्यवस्था में आदिवासी क्षेत्रों के छात्रावासों को विशेष राहत दी गई है। बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में संचालित छात्रावासों को अब व्यावसायिक श्रेणी के बजाय घरेलू श्रेणी में शामिल किया गया है, जिससे उनके बिजली बिल में कमी आएगी।
इसके अलावा बिजली बिल का भुगतान देर से करने वाले उपभोक्ताओं के लिए भी राहत दी गई है। अब विलंबित भुगतान अधिभार केवल वास्तविक देरी की अवधि के आधार पर ही लगाया जाएगा। वहीं 10 किलोवाट से अधिक भार वाले घरेलू और गैर-घरेलू उपभोक्ताओं को ऑफ-पीक समय में बिजली उपयोग करने पर 20 पैसे प्रति यूनिट की छूट मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ी हुई दरों के बावजूद छत्तीसगढ़ में बिजली शुल्क अभी भी मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और झारखंड जैसे पड़ोसी राज्यों की तुलना में कम है। ऐसे में राज्य की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और निवेश आकर्षण पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है।
कुल मिलाकर बिजली दरों में वृद्धि जरूर हुई है, लेकिन राहत योजनाओं, सब्सिडी और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली नीतियों के कारण आम उपभोक्ताओं को बड़ा झटका नहीं लगेगा। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि नई दरों का वास्तविक प्रभाव घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर कितना पड़ता है।
