US Iran Deal:-कौन झुका, कौन जीता? अमेरिका-ईरान समझौते पर तेहरान का बड़ा दावा – ‘दुश्मन ने सरेंडर किया, हमने नहीं

US Iran Deal:-महीनों से चले तनाव, आर्थिक दबाव और सैन्य टकराव के बाद आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि इस ऐतिहासिक समझौते के ऐलान के साथ ही दोनों देशों की ओर से अलग-अलग जीत के दावे भी सामने आने लगे हैं। जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे अपनी कूटनीतिक सफलता बता रहे हैं, वहीं ईरान की सेना और सुरक्षा प्रतिष्ठान इसे अमेरिका और इजराइल की हार करार दे रहे हैं।
US Iran Deal:-ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने जारी बयान में कहा कि ईरानी जनता और सशस्त्र बलों के दृढ़ संकल्प ने दुश्मन को झुकने पर मजबूर कर दिया। सेना का दावा है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों के पास समझौते के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। ईरान ने इस समझौते को अपनी रणनीतिक और कूटनीतिक जीत बताते हुए कहा कि वह भविष्य में भी अमेरिका की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखेगा।

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का मसौदा तैयार हो चुका है और 19 जून को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में इस पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मंजूरी भी दे दी है।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुए इस समझौते में क्षेत्रीय सैन्य अभियानों को समाप्त करने, समुद्री व्यापार बहाल करने और आगे की वार्ताओं के लिए एक नया ढांचा तैयार करने पर सहमति बनी है। हालांकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल नीति और क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अंतिम फैसला अभी बाकी है। इन विषयों पर अगले 60 दिनों के भीतर अलग दौर की बातचीत होगी।
US Iran Deal:-ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने भी बयान जारी कर कहा कि यह समझौता ईरानी नेतृत्व, जनता और सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। परिषद ने पाकिस्तान और कतर की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि लंबे और कठिन वार्ता दौर के बाद समझौते का मसौदा अंतिम रूप दिया गया है।

इस बीच, समझौते की खबर का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई दिया। होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने की संभावना से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई और निवेशकों ने राहत की सांस ली। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में भी सकारात्मक माहौल देखने को मिला।
अब पूरी दुनिया की निगाहें 19 जून को जिनेवा में होने वाले हस्ताक्षर समारोह पर टिकी हैं, जहां अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की ओर से वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहेगा। कूटनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि डोनाल्ड ट्रंप स्वयं इस ऐतिहासिक मौके पर जिनेवा पहुंच सकते हैं।
क्या यह समझौता पश्चिम एशिया में स्थायी शांति लाएगा या फिर यह केवल एक अस्थायी विराम साबित होगा? इसका जवाब आने वाले दिनों में दुनिया को मिल जाएगा।